कोल्हान

पश्चिम सिंहभूम में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला उजागर, कृषि भूमि पर फर्जी निर्माण से करोड़ों का मुआवजा निकाला गया

पश्चिम सिंहभूम में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला उजागर, कृषि भूमि पर फर्जी निर्माण से करोड़ों का मुआवजा निकाला गया

चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर मुआवजा घोटाला, अवैध निर्माण और भू-अर्जन विभाग–दलाल गठजोड़ का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। एंटी करप्शन ऑफ इंडिया झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि पेरियार ने उपायुक्त को विस्तृत शिकायत देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद कई मार्गों—कुदाहतु–उसम्बीर, टोंटो–मंझारी, जोड़ापोखर–झींकपानी—पर रातों-रात एक जैसे डिजाइन के अस्थायी और सेडनुमा घर खड़े कर दिए गए। अधिकांश भूमि अब भी राजस्व रिकॉर्ड में कृषि भूमि के रूप में दर्ज है, फिर भी आवासीय मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

शिकायत में आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण विभाग और भू-अर्जन कार्यालय में 35–40% कमीशन लेकर फर्जी फाइलें पास की जा रही हैं। इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है, बल्कि कई ग्रामीणों की जमीन भी गलत तरीके से प्रभावित हुई है।

पेरियार ने कहा है कि कृषि भूमि पर बिना कन्वर्ज़न और बिना नक्शा स्वीकृति के निर्माण करना अवैध है, फिर भी इन्हीं संरचनाओं का हवाला देकर भारी मुआवजा निकाला जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र संबंधी धाराओं के अंतर्गत गंभीर अपराध है।

उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि अधिसूचना के बाद बने सभी निर्माणों की पहचान कर हटाया जाए, फर्जी मुआवजों को रद्द किया जाए, संलिप्त अधिकारियों–दलालों पर FIR दर्ज हो, और पूरे मामले की जांच सतर्कता ब्यूरो या लोकायुक्त से कराई जाए। साथ ही मुआवजा सूची और भुगतान राशि को जिला वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।

शिकायत के साथ कई स्थानों पर बने सेडनुमा घरों के GPS फोटो भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें शिकायत में घोटाले का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया गया है।

मानकी मुण्डा संघ कोल्हान पोड़ाहाट समिति में पुनर्गठन अटका – आपात बैठक की जरूरत पर महासचिव चंदन होनहागा का बयान

मानकी मुण्डा संघ कोल्हान पोड़ाहाट समिति में पुनर्गठन अटका – आपात बैठक की जरूरत पर महासचिव चंदन होनहागा का बयान

पश्चिमी सिंहभूम : कोल्हान पोड़ाहाट क्षेत्र के सभी मानकी मुण्डा एवं डाकुवा समुदाय से संवाद करते हुए, मानकी मुण्डा संघ कोल्हान पोड़ाहाट केन्द्रीय समिति पश्चिमी सिंहभूम झारखंड के महासचिव चंदन होनहागा ने समिति के पुनर्गठन में आ रही परेशानियों पर चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने बताया कि नवंबर माह की मासिक बैठक में उपस्थिति अत्यंत कम रही, जिसके कारण पुनर्गठन की तिथि तय करना संभव नहीं हो पाया। साथ ही पिछले तीन वर्षों से केंद्रीय कोषाध्यक्ष की ओर से हिसाब-किताब प्रस्तुत न किए जाने को भी एक बड़ी समस्या बताया।

महासचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि समूचे मानकी मुण्डा एवं डाकुवा समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर पुनर्गठन हो जाता, तो कई नये चेहरे समिति में आते और काम को मजबूती मिलती।

आपातकालीन बैठक की जरूरत

चंदन होनहागा ने सुझाव दिया कि नवंबर माह में ही एक आपातकालीन बैठक आयोजित कर समाधान निकाला जाना चाहिए, अन्यथा स्थिति लगातार बिगड़ती जाएगी।

न्याय पंच को लेकर गंभीर टिप्पणी

समिति से जुड़े मानकी मुण्डा न्याय पंच को लेकर भी उन्होंने गंभीर टिप्पणियां कीं। उनका कहना है कि न्याय पंच समिति का ही हिस्सा होते हुए भी कई कार्यकर्ता स्वयं को अलग समझ रहे हैं, जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

महासचिव ने विधि सलाहकार श्री महेंद्र दोराईबुरू पर अत्यधिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि

> “उन्हें अपने दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए और न्याय पंच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसी वजह से कई मानकी मुण्डा एवं डाकुवाओं को परेशानी हो रही है।”



उन्होंने मांग की कि —

1) वे बिना का मानकी मुण्डा न्याय के कार्यालय में भी न प्रवेश करें।


2. उन्हें एवं उनकी धर्म पत्नी को सलाहकार समिति से हटाया जाए, क्योंकि वे समिति की स्वीकृति से नहीं बल्कि स्वयं नियुक्त हुए हैं।



महासचिव ने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ, उनके क्लाइंट के माध्यम से उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम व विधानसभा सचिवालय, रांची में भारी आरोप पत्र भेजा गया है, जो समिति की मर्यादा के विरुद्ध है।

अंत में उन्होंने कहा—
“अब आप ही सोचिए, ऐसे सलाहकार को समिति में जगह कैसे दी जा सकती है?”

और सभी सदस्यों को हार्दिक जोहार प्रेषित किया।

सरदार पटेल जयंती पर भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस, मंगलवार को चाईबासा में यूनिटी मार्च

सरदार पटेल जयंती पर भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस, मंगलवार को चाईबासा में यूनिटी मार्च

चाईबासा : सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी, पश्चिमी सिंहभूम ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, जिला अध्यक्ष संजय पांडे, प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कूवर गागराई, पूर्व विधायक जवाहरलाल बांनरा और गुरु चरण नायक सहित कई नेता उपस्थित थे।

सांसद आदित्य साहू ने बताया कि सरदार पटेल की स्मृति में मंगलवार को चाईबासा में यूनिटी मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च सुबह 8 बजे पुरानी डीसी ऑफिस के पास स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा स्थल से शुरू होगा। उन्होंने शहरवासियों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से अधिक संख्या में शामिल होकर एकता के संदेश को मजबूत करने की अपील की।

आदित्य साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल के योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया सम्मान मिला है। उन्होंने बताया कि विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा—स्टैच्यू ऑफ यूनिटी—देश की ओर से सरदार पटेल को दी गई सर्वोच्च श्रद्धांजलि है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए प्रशासनिक सुधार, सीमाओं की सुरक्षा और सहकारी संघवाद को मजबूत कर रही है।

भाजपा नेताओं ने कहा कि सरदार पटेल ने 562 रियासतों को एकजुट कर आधुनिक भारत की नींव रखी। आज भाजपा सरकार उसी संकल्प के साथ देश को मजबूत, आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए कार्य कर रही है।

अंत में, नेताओं ने सभी नागरिकों से यूनिटी मार्च में शामिल होकर सरदार पटेल को सामूहिक श्रद्धांजलि देने की अपील की।

जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए कड़े कदमों का निर्देश

जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए कड़े कदमों का निर्देश

चाईबासा : जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में सोमवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पुलिस अधीक्षक, तीनों अनुमंडलों के पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक की शुरुआत जिला परिवहन पदाधिकारी ने सड़क दुर्घटनाओं के विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत करते हुए की। उन्होंने पिछले वर्षों के हादसों व मृतकों की संख्या, वर्ष 2024-25 के तुलनात्मक डेटा, जिले में चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों, नियम उल्लंघन पर की गई कार्रवाई और सड़क निर्माण विभाग के सुधारात्मक प्रयासों की जानकारी दी।

दुर्घटना की समीक्षा के बाद उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन स्थानों पर बार-बार हादसे हो रहे हैं, वहां राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, परिवहन विभाग और पुलिस संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक सुधार तुरंत सुनिश्चित करें। सड़क मरम्मत, चौड़ीकरण, संकेत बोर्ड और रोड मार्किंग जैसे कार्य जल्द पूरा करने का आदेश दिया गया। साथ ही अगली बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।

उन्होंने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय थाना और अंचल अधिकारियों को विशेष बैठक कराने के निर्देश दिए। चाईबासा शहर में टोटो चालकों से जुड़ी समस्याओं पर उन्होंने नगरपालिका और परिवहन विभाग को सभी चालकों के साथ बैठक कर उन्हें सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और नाबालिग, बिना लाइसेंस व बिना पंजीकरण वाले वाहनों पर सख्त अभियान चलाने को कहा।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दिसंबर में पिकनिक सीजन के दौरान पिकनिक स्थलों पर वाहनों की सघन जांच की जाएगी। अधिकांश दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार से चल रहे दोपहिया वाहन शामिल होने की बात सामने आई है। इसलिए नियमित जांच, हेलमेट की अनिवार्यता और गति नियंत्रण पर सख्ती के निर्देश सभी थानों को दिए गए हैं। ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया जाएगा।

बैठक में सांसद प्रतिनिधि प्रदीप अग्रवाल ने सिंघपोखरिया क्षेत्र में हादसों में बढ़ोतरी की बात कही। इस पर उपायुक्त ने तत्काल उस क्षेत्र का निरीक्षण कर सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया। सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य राजा राम गुप्ता ने एम्बुलेंस सेवाओं को बेहतर करने की मांग की, जिस पर उपायुक्त ने सभी उपलब्ध एम्बुलेंस के संपर्क नंबर सार्वजनिक करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया।

बैठक में यह सहमति बनी कि जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और सड़क निर्माण एजेंसियां मिलकर काम करेंगी, ताकि जिले में सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सके।

तितिरबिला में ग्राम देवी जहेरा स्थल का विधायक दशरथ गागराई ने किया उद्घाटन

तितिरबिला में ग्राम देवी जहेरा स्थल का विधायक दशरथ गागराई ने किया उद्घाटन

सरायकेला_खरसावाँ : सरायकेला प्रखंड के नुवागांव पंचायत अंतर्गत तितिरबिला गांव में सोमवार को ग्राम देवी जहेरा स्थल का उद्घाटन खरसावां विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री दशरथ गागराई ने पूजा-अर्चना व फीता काटकर किया।

इस अवसर पर विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि ग्राम देवी गांव की रक्षा करती हैं, इसलिए उनकी पूजा पूरे सम्मान के साथ की जाती है।

उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से विधायक प्रतिनिधि अर्जुन उर्फ नायडू गोप, जिला उपाध्यक्ष संजय प्रधान, विधायक प्रतिनिधि पंकज प्रधान, उप प्रमुख बासुदेव महतो, प्रखंड अध्यक्ष भगत महतो, प्रकाश महतो, अरुण जामुदा, उप मुखिया कन्हैया बेहरा, लक्ष्मण महतो, सुब्रतो कोर, गोमा पुरती, संजीव महतो, मिश्री लाल महतो, उकार मांझी, लालचंद महतो, मनसा टुडू सहित झामुमो कार्यकर्ता और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

झामुमो ने गीता कोड़ा के आरोपों को बताया बौखलाहट का नतीजा

झामुमो ने गीता कोड़ा के आरोपों को बताया बौखलाहट का नतीजा

चाईबासा : पूर्व सांसद श्रीमती गीता कोड़ा द्वारा झामुमो पर लगाए गए आरोपों को पार्टी ने बौखलाहट और निराधार करार दिया है। झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने कहा कि सारंडा मामले पर भाजपा को बयान देने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सारंडा में हुई दो ग्राम सभाओं में भाजपा अनुपस्थित रही और अप्रत्यक्ष रूप से अडानी के पक्ष में खड़ी दिखाई दी।

लागुरी ने कहा कि झामुमो ने सारंडा के आदिवासी मूलवासियों की आवाज़ न सिर्फ राज्य सरकार तक पहुंचाई, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में भी मजबूती से रखी। उन्होंने बताया कि आर्थिक नाकेबंदी के आंदोलन ने 18 नवंबर को होने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप 13 नवंबर 2025 को ही सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासी मूलवासियों के विस्थापन को रोकने का निर्णय लिया।

प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा झूठे और मनगढ़ंत आरोपों से जनता को गुमराह नहीं कर सकती। जिले की जनता भाजपा की राजनीति को भली-भांति समझती है, इसी कारण विधानसभा की सभी पाँच सीटों से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने गीता कोड़ा के बयान को ‘निराधार आरोपों का पुलिंदा’ बताया।

लागुरी ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार पारदर्शिता और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध है। इसके विपरीत, भाजपा विपक्ष में रहते हुए भी अफवाह फैलाने और झूठ की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि झामुमो ने सारंडा के आदिवासी मूलवासियों के जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा के लिए हमेशा आवाज़ उठाई है, इसलिए सारंडा आंदोलन को नैतिक समर्थन देना बिल्कुल उचित था।

उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी स्पष्ट किया था कि सरकार की प्राथमिकता खनन हित नहीं, बल्कि सारंडा के आदिवासियों के अधिकार हैं, और सुप्रीम कोर्ट ने भी वन अधिकार अधिनियम को ध्यान में रखते हुए फैसला दिया है।

लागुरी ने भाजपा से पूछा कि यदि उसे वास्तव में जनहित की चिंता है, तो केंद्र सरकार से सारंडा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर वार्ता करे और कोल्हान, पोड़ाहाट, सारंडा समेत जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के लिए सड़क निर्माण में आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए, ताकि उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

लखीमपोस गांव में कई दिनों से बंद बिजली बहाल, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई के हस्तक्षेप से लगा नया ट्रांसफार्मर

लखीमपोस गांव में कई दिनों से बंद बिजली बहाल, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई के हस्तक्षेप से लगा नया ट्रांसफार्मर

कुमारडुंगी : मझगांव विधानसभा क्षेत्र के कुमारडुंगी प्रखंड के लखीमपोस गांव में कई दिनों से जला हुआ 63 केवी ट्रांसफार्मर ग्रामीणों की परेशानी का कारण बना हुआ था। ट्रांसफार्मर खराब होने से गांव पूरी तरह अंधेरे में था और बच्चों की पढ़ाई व दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही थीं।

ग्रामीणों ने सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन समय पर समाधान नहीं मिला, जिससे नाराज़गी बढ़ती जा रही थी।

इस बीच, ग्रामीणों की समस्या की सूचना मिलने पर पूर्व मंत्री व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से बात कर नए ट्रांसफार्मर की व्यवस्था कराने को कहा। उनके प्रयास के बाद विभाग ने गांव के लिए नया 63 केवी का ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराया और बिजली बहाली का काम शुरू कर दिया गया।

ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री के हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके प्रयास से ही समस्या का समाधान हुआ।
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहे।

नया ट्रांसफार्मर लगने के बाद गांव में बिजली आपूर्ति बहाल होने से लोगों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई कि आगे ऐसी समस्याओं पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जी. सी. जैन कॉमर्स कॉलेज में अव्यवस्था पर NSUI का विरोध, नया भवन कब्जे में—पुराना जर्जर भवन छात्रों के लिए जोखिम

जी. सी. जैन कॉमर्स कॉलेज में अव्यवस्था पर NSUI का विरोध, नया भवन कब्जे में—पुराना जर्जर भवन छात्रों के लिए जोखिम

चाईबासा : जी. सी. जैन कॉमर्स कॉलेज की स्थिति बेहद चिंताजनक और शर्मनाक बताई जा रही है। वर्ष 2016 में कक्षाओं की कमी के कारण छात्रों को पेड़ों के नीचे पढ़ाई करनी पड़ी थी। लंबे आंदोलन और संघर्ष के बाद नया भवन तैयार हुआ ताकि छात्रों को सुरक्षित और व्यवस्थित कक्षाएँ मिल सकें।

लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। नया भवन छात्रों के बजाय स्किल डेवलपमेंट, सोलर प्लांट और अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कब्जे में रखा गया है। कक्षाएँ बंद हैं और प्रयोगशालाओं की जगह मशीनें रखी गई हैं।

जब छात्रों ने कॉलेज प्रशासन से पूछा कि किस आदेश के आधार पर नया भवन इस तरह उपयोग किया जा रहा है, तो प्रशासन कोई भी आधिकारिक आदेश-पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। कई प्राध्यापक भी इस मामले से अनजान पाए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भवन का उपयोग मनमाने ढंग से और बिना अनुमति के किया जा रहा है।

प्राचार्य के रवैये पर नाराज़गी


NSUI पदाधिकारियों ने प्राचार्य पर असम्मानजनक व्यवहार का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान प्राचार्य का रवैया छात्रों के प्रति असंगत और संस्थान की गरिमा के विरुद्ध था। छात्रों ने कहा कि जो प्राचार्य छात्रों की बात सुनने को तैयार नहीं, उसे कॉलेज की कमान संभालने का अधिकार नहीं है।

पुराना भवन बन चुका है खतरा


कॉलेज का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों में गहरी दरारें, कमजोर छतें और भूकंप जैसी स्थिति के कारण यहां पढ़ाई करना छात्रों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। इसके बावजूद नया भवन खाली रखा जा रहा है और छात्र पुराने खतरनाक ढांचे में पढ़ने को मजबूर हैं।

NSUI की मुख्य मांगें :

1. नया भवन तुरंत शिक्षण कार्य के लिए खोला जाए।


2. स्किल डेवलपमेंट व अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियाँ तत्काल रोकी जाएँ।


3. भवन उपयोग से संबंधित आदेश-पत्र सार्वजनिक किया जाए।


4. पुराने भवन की तकनीकी जांच कर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


5. प्राचार्य छात्रों से सम्मानजनक संवाद सुनिश्चित करें।



NSUI ने चेतावनी दी है कि छात्रों की पढ़ाई, सुरक्षा और भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो सड़क से लेकर परिसर तक बड़े आंदोलन किए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।

प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष अनीश गोप, महासचिव कृष्णा सिरका, कॉलेज अध्यक्ष आर्या प्रकाश सोय, सचिन बिरुवा, मुकेश नायक, बबलु कोड़ा, शिवा तिवारी, संदीप गोंड सहित कई छात्र मौजूद रहे।

प्रखंड कार्यालय में जन आरोग्य समिति के क्षमता वर्धन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

प्रखंड कार्यालय में जन आरोग्य समिति के क्षमता वर्धन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

चक्रधरपुर : प्रखंड कार्यालय के सभागार में सोमवार को टाटा स्टील फाउंडेशन और जन आरोग्य समिति के संयुक्त समन्वय से एक दिवसीय क्षमता वर्धन कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम में बीडीओ कांचन मुखर्जी ने भाग लेते हुए कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व के बारे में जानकारी दी।

कार्यशाला में मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, चिकित्सा पदाधिकारी, एनजीओ प्रतिनिधि, एएनएम और जन आरोग्य समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समिति को अधिक प्रभावी बनाना था। इस दौरान सदस्यों की भूमिका, जिम्मेदारियाँ और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में उनकी भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में राकेश उरांव, सुनील कुमार मारवा, छबिता प्रधान, शीला जोंको, दशना जोकों सहित कई सदस्य उपस्थित थे। कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

सारंडा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झामुमो–कांग्रेस सरकार घिरी, भाजपा ने लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप

सारंडा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झामुमो–कांग्रेस सरकार घिरी, भाजपा ने लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप

चाईबासा : सारंडा रिज़र्व फ़ॉरेस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद राज्य की झारखंड मुक्ति मोर्चा–कांग्रेस गठबंधन सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जंगलों में रहने वाले आदिवासी–मूलवासी समुदाय के अधिकार कभी समाप्त नहीं हुए थे और Forest Rights Act, 2006 की धारा 3 और 4(1) के अनुसार आवास, भूमि और सामुदायिक वनाधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं।

पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला साबित करता है कि झामुमो द्वारा फैलाया गया भय और भ्रम निराधार था। भाजपा नेताओं का आरोप है कि झामुमो के सांसद, विधायक और मंत्री पहले कैबिनेट में सेंचुरी प्रक्रिया को मंजूरी देते रहे और बाद में उसी मुद्दे पर सड़क पर उतरकर जनता को गुमराह करते रहे। कभी आर्थिक नाकेबंदी की धमकी दी गई, तो कभी केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाए गए। लेकिन फैसले के बाद जब यह स्पष्ट हो गया कि किसी को विस्थापित नहीं किया जाएगा, तब झामुमो ने चुपचाप नाकेबंदी वापस ले ली।

भाजपा ने कहा कि केंद्र सरकार आदिवासी समाज के संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है। FRA, PESA, वन धन योजना और जनजातीय विकास कार्यक्रम इसकी पुष्टि करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भी इन अधिकारों की रक्षा को मजबूती दी है।

भाजपा का दावा है कि अब जनता समझ चुकी है कि कौन उनके जल–जंगल–जमीन का सच्चा रक्षक है और कौन राजनीति के लिए भ्रम फैलाता रहा है।