चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में आगामी पर्व-त्योहार को देखते हुए जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री धनेश्वर हेम्ब्रम ने चाईबासा शहर के पोस्ट ऑफिस चौक और सदर बाजार क्षेत्र में रेस्टोरेंट तथा ठेला-खोमचा सहित विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।
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जांच के दौरान 7 दुकानों में फूड लाइसेंस या पंजीकरण नहीं पाया गया। संबंधित दुकानदारों को निर्धारित समय के भीतर लाइसेंस या पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया।
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निरीक्षण के क्रम में छेना का खाद्य नमूना भी संग्रहित किया गया। अमित पोद्दार और शिवा महतो के प्रतिष्ठान में खाद्य पदार्थों में अखाद्य रंग पाए जाने पर सामग्री को मौके पर ही नष्ट कराया गया और दोनों को सख्त चेतावनी दी गई।
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इसके अलावा घुगनी, आलू चोखा, इमली की चटनी, टमाटर की चटनी, आलू मसाला और जलेबी सहित अन्य खाद्य सामग्री की ऑन-द-स्पॉट जांच की गई। अधिकारियों ने दुकानों में स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण, साफ पानी के उपयोग और कर्मचारियों द्वारा एप्रन, ग्लव्स तथा हेडगियर पहनने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए।
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला के जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त चंदन कुमार के निर्देशन में जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा लगातार दूसरे दिन डायन प्रथा उन्मूलन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया।
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यह कार्यक्रम कुमारडुंगी, तांतनगर, मंझगांव, हाटगम्हरिया, झींकपानी, सदर चाईबासा, चक्रधरपुर, खूंटपानी, बंदगांव और गोईलकेरा प्रखंडों में आयोजित किया गया। विभिन्न हाट-बाजारों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया।
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नाटक के जरिए महिलाओं पर डायन बिसाही के नाम पर होने वाली क्रूरता, शारीरिक और मानसिक यातना तथा डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम-2001 की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि डायन प्रथा समाज के लिए अभिशाप है। इसका शिकार अधिकतर गरीब और कमजोर वर्ग की महिलाएं बनती हैं। उन पर जादू-टोना का आरोप लगाकर हिंसा करना कानूनन अपराध है और पूरी तरह गलत है।
मनोहरपुर : पश्चिम सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड स्थित सारंडा क्षेत्र में राजाबुरु खदान को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने आंदोलन की घोषणा की है। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया ने खदान में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन बंद का फैसला लिया है। इस संबंध में समिति ने बीएसएल सेल गुवा प्रबंधन को पत्र सौंपा है।
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शनिवार को दुईया पंचायत भवन में समिति अध्यक्ष श्री लगुड़ा देवगाम की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं की स्थिति पर चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि जब तक स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार नहीं दिया जाता, तब तक खदान में काम बंद रहेगा।
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समिति का आरोप है कि सरकार ने सारंडा क्षेत्र में खनन की अनुमति मानकी, मुंडा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति से दी थी। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार देने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन वर्तमान में सारंडा पावर वर्क (MSPW) ठेकेदार के माध्यम से काम कराया जा रहा है और स्थानीय प्रतिनिधियों की अनदेखी की जा रही है।
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ग्रामीण 23 फरवरी 2026 को सुबह 6 बजे से दुईया पंचायत भवन में एकत्र होकर राजाबुरु खदान को अनिश्चितकालीन बंद करेंगे। समिति ने कहा है कि जब तक स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।
इस मामले की सूचना संबंधित थाना और प्रशासनिक अधिकारियों को भी दे दी गई है। अब प्रबंधन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर है।
कोल्हान : पश्चिम सिंहभूम जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र बिटकलसोया स्थित नवस्थापित कैंप जी/134 वाहिनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा 21 फरवरी 2026 को सिविक एक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों के साथ जन-सहभागिता बढ़ाना था।
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इस दौरान ग्रामीणों के बीच खेती से संबंधित सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं तथा स्कूली बच्चों के लिए फुटबॉल, स्टेशनरी और स्कूल बैग वितरित किए गए। महिलाओं को साड़ियां सहित अन्य आवश्यक सामान भी दिए गए।
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कार्यक्रम 134 बटालियन के कमांडेंट त्रिलोकीनाथ सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ। इसमें बिटकलसोया, काशिगड़ा और नयागांव के ग्रामीणों ने भाग लिया। क्षेत्र में पहली बार आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखा गया। उन्होंने सीआरपीएफ के जनहित कार्यों की सराहना की।
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कार्यक्रम में जी/134 बटालियन के कंपनी कमांडर शेखर कुमार सिंह, निरीक्षक जीडी संजय कुमार राम, निरीक्षक जीडी सिद्धेश्वर कुमार सिंह सहित अन्य जवान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों के लिए चाय और भोजन की भी व्यवस्था की गई।
इस पहल से सुरक्षा बल और ग्रामीणों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूती मिली।
चाईबासा : मंझारी प्रखंड अंतर्गत पांगा पंचायत के टेंगरा गांव के लोवागोड़ा और जोबासाई टोला में पिछले एक वर्ष से चापाकल और जलमीनार खराब पड़े हैं। इसके कारण ग्रामीणों को पीने के लिए चुवां (झरना) का पानी उपयोग करना पड़ रहा है। स्वच्छ पेयजल की सुविधा नहीं होने से आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल ने इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने कहा कि दूषित पानी कई बीमारियों की जड़ है और इसके सेवन से लोग गंभीर रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उचित इलाज के अभाव में कई बार लोग अंधविश्वास का शिकार हो जाते हैं, जिससे डायन के नाम पर हिंसा जैसी घटनाएं सामने आती हैं।
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उन्होंने बताया कि केवल पांगा पंचायत ही नहीं, बल्कि पूरे मंझारी प्रखंड के सैकड़ों गांवों और टोलों में स्वच्छ पेयजल की कमी है। लोग नदी, नाला और झरने का पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
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जिला परिषद सदस्य ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से सभी खराब चापाकल और जलमीनारों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
इस संबंध में उन्होंने उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम, मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार तथा कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल को आवेदन की प्रति भेजी है। साथ ही गांधी टोला स्थित जिला स्तरीय पेयजल जांच प्रयोगशाला में पानी का नमूना जांच के लिए जमा कराया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब पहल कर स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में बीमारियों और अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं पर रोक लग सके।
रांची स्थित प्रेस क्लब में आगामी 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादेमी द्वारा “साहित्य पुरस्कार–2026” का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न झारखंडी भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा।
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संताली साहित्य के लिए श्री सुन्दर टुडू को उनकी पुस्तक “आगाम रेयाग नागाम आर संताड़ी धोरोम शास्त्र”, कुड़ुख साहित्य के लिए डॉ नारायण उरांव को “तोलौंग सिकी उद्भव एवं विकास”, खोरठा साहित्य के लिए श्री चितरंजन महतो को “जिनगीक टोह”, नागपुरी साहित्य के लिए श्री छितिस कुमार राय को “रूपु” तथा पंचपरगनिया साहित्य के लिए डॉ दीनबंधु महतो को “राम किस्ट केर” पुस्तक के लिए साहित्य सम्मान प्रदान किया जाएगा। वहीं हो, मुंडारी और खड़िया साहित्य के पुरस्कार फिलहाल लंबित रखे गए हैं।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महामहिम राज्यपाल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ रामेश्वर उरांव को आमंत्रित किया गया है।
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अखिल झारखंड साहित्य अकादेमी के संस्थापक एवं त्यागी विधायक श्री सूर्य सिंह बेसरा हैं। वे Rabindranath Tagore की कृति Gitanjali और Harivansh Rai Bachchan* की प्रसिद्ध कृति Madhushala के संताली अनुवादक हैं। उन्हें वर्ष 2017 में Sahitya Akademi, नई दिल्ली द्वारा साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। वे Ram Dayal Munda और स्वर्गीय B. P. Keshri के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पित हैं।
आयोजित आमसभा की अध्यक्षता श्री सूर्य सिंह बेसरा ने की, जबकि संचालन अकादेमी की सचिव डॉ सबिता केशरी ने किया। बैठक में उपाध्यक्ष डॉ बीरबल महतो सहित विभिन्न भाषाओं के संयोजक एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे।
सरायकेला : नगर पालिका आम निर्वाचन–2026 के सफल, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन को लेकर शुक्रवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर पालिका) सह उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने काशी साहू महाविद्यालय, सरायकेला परिसर का निरीक्षण किया। यहां प्रस्तावित डिस्पैच सेंटर, स्ट्रांग रूम (बज्रगृह) और मतगणना केंद्र के लिए चिन्हित स्थलों का जायजा लिया गया।
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निरीक्षण के दौरान परिसर में पेयजल, शौचालय, विद्युत आपूर्ति, सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पार्किंग सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को सभी तैयारियां योजनाबद्ध और समयबद्ध तरीके से पूरी करने तथा निर्वाचन से पूर्व सभी व्यवस्थाएं सुदृढ़ और त्रुटिरहित सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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इस दौरान निर्वाचन सामग्रियों की पैकेजिंग प्रक्रिया का भी अवलोकन किया गया। निर्देश दिया गया कि प्रत्येक पैकेट में निर्धारित सूची के अनुसार सभी आवश्यक सामग्री अनिवार्य रूप से शामिल की जाए तथा पैकिंग पूर्ण होने के बाद प्रत्येक पैकेट की सूक्ष्म जांच अवश्य की जाए।
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मौके पर निदेशक डीआरडीए अजय तिर्की, अपर उपायुक्त जयबर्धन कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो, उप निर्वाचन पदाधिकारी सुरेन्द्र उरांव, उप निबंधक, जिला पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
सरायकेला : आदित्यपुर नगर निगम, कपाली नगर परिषद एवं सरायकेला नगर पंचायत के लिए प्रतिनियुक्त मतगणना माइक्रो ऑब्जर्वर, मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायकों का जिला स्तरीय प्रथम चरण का प्रशिक्षण नृपराज जमा दो उच्च विद्यालय में संपन्न हुआ।
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प्रशिक्षण में कर्मियों को उनके दायित्व, कार्य-प्रणाली और अनुशासन के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें निर्देश दिया गया कि मतगणना प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुसार पूरी की जाए। मतगणना कक्ष की व्यवस्था, टेबलों की संख्या, आवश्यक सामग्री और ले-आउट के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
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सत्र के दौरान मतपेटी खोलने की प्रक्रिया, सीलों के सत्यापन, अभिलेखों के मिलान और मतपत्रों की गिनती की पूरी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझाया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि किन परिस्थितियों में मतपत्र अस्वीकृत किए जा सकते हैं। वैध और अवैध मतपत्रों का प्रदर्शन कर कर्मियों को सही पहचान की जानकारी दी गई।
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इसके अलावा प्रपत्र 19 (भाग-1 एवं भाग-2), प्रपत्र 20 और प्रपत्र 21 भरने की प्रक्रिया समझाई गई। प्रपत्र 17 (मतपत्र लेखा) और प्रपत्र 18 (पेपर सील लेखा) के संधारण और मिलान पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि परिणाम घोषणा से पहले सभी दस्तावेज पूरी तरह सही और सत्यापित हों।
अधिकारियों ने निर्देश दिया कि मतगणना कार्य पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ संपन्न किया जाए, जिससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
मनोहरपुर : झारखंड के सारंडा क्षेत्र स्थित मनोहरपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय दीघा में एस्पायर संस्था के सहयोग से भव्य बाल मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभा को निखारना, विद्यालय में उपस्थिति बढ़ाना और शिक्षा के प्रति रुचि विकसित करना था।
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बाल मेले में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय परिसर दिनभर रंग-बिरंगी गतिविधियों से गुलजार रहा। इस दौरान बॉल रेस, गणित रेस, रंगोली प्रतियोगिता, ड्राइंग प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। गणित रेस में बच्चों ने अपनी तार्किक क्षमता का प्रदर्शन किया, जबकि रंगोली और ड्राइंग प्रतियोगिता में उनकी कलात्मक प्रतिभा देखने को मिली। सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गीत और नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
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शिक्षकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से बच्चों का मनोबल बढ़ता है और वे नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रेरित होते हैं। एस्पायर संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाल मेला बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर देता है। शिक्षा को रोचक और आनंदमय बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
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विद्यालय प्रबंधन ने कार्यक्रम को सफल बताया और भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखने की बात कही।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक अनिल, विजय, शकुंतला, एसएमसी अध्यक्ष अनिल तोपनो, दीघा उपमुखिया रोलेन तोपनो तथा एस्पायर संस्था के कार्यकर्ता रघुनाथ महतो उपस्थित रहे।
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले से लगभग 13–14 वर्ष पहले लापता हुआ एक बालक आखिरकार केरल के कन्नूर जिले में सुरक्षित मिला है। उस समय महज 5–6 वर्ष की उम्र में भटककर केरल पहुंच गया यह बच्चा अब लगभग 18 वर्ष का हो चुका है। लंबे समय तक घर से दूर रहने के कारण वह अपनी मातृभाषा, गांव और जिले का नाम तक भूल चुका था। उसे केवल अपने पिता बलराम, माता मानी, भाई फंटूश और छोटी बहन टुरकी के नाम तथा घर के पहाड़ पर होने की धुंधली यादें ही थीं।
बालक अब तक एनजीओ और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के संरक्षण में केरल में रह रहा था। उम्र 18 वर्ष के करीब पहुंचने के कारण उसे संस्था में रखने की सीमा समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उसके परिवार को खोजने की प्रक्रिया तेज की गई।
सोशल मीडिया से मिला परिवार का सुराग
परिवार का कोई ठोस पता नहीं मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता बासिल हेम्ब्रोम ने बच्चे का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में बच्चे ने अपनी यादों के आधार पर घर और परिवार का विवरण बताया तथा लोगों से पहचान कराने की अपील की गई। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लाखों लोगों तक पहुंच गया।
इसी दौरान वीडियो परिवार के एक सदस्य हिम्मत गोप तक पहुंचा, जिन्होंने “ग्रामीण विमर्श” टीम से संपर्क किया। इसके बाद खोजबीन करते हुए टीम को सोनुवा प्रखंड के आसनतलिया पंचायत अंतर्गत हाड़ीमारा गांव में बच्चे के परिवार की जानकारी मिली।
अब परिवार में सिर्फ मां और तीन बहनें
ग्रामीण विमर्श के सदस्य जब हाड़ीमारा गांव पहुंचे तो पाया कि बालक का घर पहाड़ पर स्थित है, लेकिन वहां कोई नहीं रहता और घर बंद पड़ा है। ग्रामीणों से जानकारी मिली कि परिवार कई वर्ष पहले ही रोज़गार की तलाश में पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित एक ईंट भट्ठा में काम करने चला गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे के पिता बोड़राम गोप और बड़े भाई फंटूश गोप का निधन हो चुका है। वर्तमान में परिवार में मां मानी गोप, बहनें बलेमा गोप, परमिला गोप, लक्ष्मी गोप और भतीजी स्वीटी गोप ही हैं, जो ईंट भट्ठे में मजदूरी कर जीवनयापन कर रहे हैं।
राजा के भविष्य को लेकर चिंता
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति देखकर चिंता जताई कि यदि बालक वापस घर आता है तो क्या उसे शिक्षा और बेहतर वातावरण मिल पाएगा। लोगों का कहना है कि गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है और वह भी कम उम्र में मजदूरी के दायरे में फंस सकता है।
NIOS से +2 में दाखिला और केरल में फुटबॉल से बनाई पहचान
बालक, जिसे अब राजा के नाम से पहचाना जा रहा है, ने केरल में रहते हुए फुटबॉल में अपनी प्रतिभा दिखाई। वह इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लब Kerala Blasters FC की जूनियर टीम से भी जुड़ा रहा, जिससे उसे राज्य स्तर पर पहचान मिली है।
वह वर्तमान में National Institute of Open Schooling (NIOS) से उच्च माध्यमिक (+2) की पढ़ाई कर रहा है। पदाधिकारियों के अनुसार क्लब से जुड़े रहने के कारण उसे नियमित स्कूलिंग कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था, इसलिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से पढ़ाई जारी रखी गई। बताया जा रहा है कि राजा फुटबॉल में काफी प्रतिभाशाली है और भविष्य में इस खेल में अच्छा करियर बना सकता है।
सामाजिक संगठनों की पहल से मिली सफलता
मामले में नया मोड़ तब आया जब “मिसिंग फाउंड” ग्रुप में बच्चे की तस्वीर साझा हुई। इसके बाद मुंबई प्रोजेक्ट को लीड कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता फरदीन खान (Railway Children India) ने परिवार खोजने की जिम्मेदारी उठाई। फरदीन खान झारखंड के कोडरमा जिले के निवासी हैं और पिछले सात वर्षों से हजारों बच्चों को उनके परिवार से मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
खोज के दौरान उनके सहयोगी शुभम तिग्गा (इंडियन एक्सप्रेस) तथा स्थानीय सोशल मीडिया क्रिएटर्स आयुष और बासिल हेम्ब्रोम की मदद से वीडियो तैयार किया गया। वीडियो लगभग 10 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने संपर्क किया।
बालक की मां ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने अपने बेटे के जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी थी और उसे मृत मान लिया था। अब उसके मिलने की खबर से परिवार बेहद खुश है।
जल्द हो सकेगा परिवार से मिलन
फिलहाल फरदीन खान और उनकी टीम संबंधित सरकारी प्रक्रियाएं पूरी कराने में जुटी है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही बालक को सुरक्षित उसके परिवार से मिलाया जाएगा।
यह घटना साबित करती है कि समर्पण, टीमवर्क और सोशल मीडिया की ताकत से वर्षों पुरानी बिछड़न भी समाप्त की जा सकती है।