जमशेदपुर | स्टील उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में टाटा स्टील ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। कंपनी ने स्टील निर्माण प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले एलडी (LD) स्लैग से कृत्रिम रेत (एम-सैंड) तैयार कर पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन कंक्रीट विकसित किया है। यह नवाचार प्राकृतिक रेत पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ निर्माण (सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन) को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कंपनी की विशेषज्ञ टीम ने लंबे समय तक शोध एवं परीक्षण के बाद एलडी स्लैग को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाली एम-सैंड तैयार की।

इसी कृत्रिम रेत का उपयोग करते हुए एम-15, एम-20 और एम-25 ग्रेड के ग्रीन कंक्रीट का सफलतापूर्वक विकास किया गया, जो गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरा उतरा।

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विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो नदियों से होने वाले अत्यधिक रेत खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

इस तकनीक का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि निर्माण कार्यों के दौरान कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। साथ ही, स्टील उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट का पुनः उपयोग होने से औद्योगिक कचरा प्रबंधन भी अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सकेगा।

जमशेदपुर से शुरू हुई यह पहल भविष्य में देश के निर्माण क्षेत्र के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाया गया, तो यह पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगी।


