राजनगर | राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जो हुआ, वह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की नंगी सच्चाई है। जहाँ जननी की सुरक्षा होनी चाहिए थी, वहाँ अंधेरा था, बिजली तक नहीं। जहाँ डॉक्टरों की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी, वहाँ गैरहाजिरी और लापरवाही थी।

एक माँ और उसका मासूम बच्चा इस भ्रष्ट और लापरवाह व्यवस्था की बलि चढ़ गए। यह सीधे-सीधे स्वास्थ्य तंत्र की असफलता नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनहीनता और कर्तव्यहीनता का परिणाम है।

एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व प्रत्याशी रहे धी रामहरि पेरियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, यह हादसा नहीं, बल्कि अबुआ सरकार के सिस्टम द्वारा की गई हत्या है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए। उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। स्वास्थ्य केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के लिए जवाबदेही तय की जाए। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो एंटी करप्शन ऑफ इंडिया सड़कों पर उतरकर जनआंदोलन करने को मजबूर होगा। अब सवाल सीधा है, गरीबों की जान की कोई कीमत है या नहीं? कब तक कागजों में विकास और जमीन पर मौत का खेल चलता रहेगा?

