चाईबासा | मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झामुमो ने सोमवार को चाईबासा में पुतला दहन कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस दौरान झामुमो के जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता किसी भी राजनीतिक सत्ता से ऊपर होनी चाहिए। मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए सोनाराम देवगम ने कहा कि चुनाव आयोग का काम केवल चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना भी है। यदि SIR की प्रक्रिया के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटता है या उसे अपने अस्तित्व और नागरिक अधिकार को साबित करने के लिए अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले दस महीनों के दौरान चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने SIR से जुड़े निर्णयों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम-से-कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। वहीं, चुनाव आयोग ने इन खबरों के बाद कहा है कि SIR सहित सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

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देवगम ने कहा कि जब देश की चुनावी व्यवस्था पर जनता का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है, तब पारदर्शिता की कमी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर उठाए जा रहे सवालों का तथ्यात्मक और सार्वजनिक जवाब देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक शोर बताकर खारिज करने के बजाय चुनाव आयोग को बूथवार प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटाने के आधार, आपत्तियों के निस्तारण और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। झामुमो ने मांग की कि SIR की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सत्यापन योग्य और नागरिकों के मताधिकार की संवैधानिक सुरक्षा के अनुरूप हो।

देवगम ने कहा, “वोट किसी सरकार, पार्टी या आयोग की संपत्ति नहीं है। यह भारत के नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से बाहर होने का डर नहीं होना चाहिए। चुनाव आयोग को यह भरोसा अपने कार्यों से स्थापित करना होगा।”
उन्होंने कहा कि झामुमो लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा के लिए हर संवैधानिक मंच पर सवाल उठाता रहेगा।

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उन्होंने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। देवगम ने उनके कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके इस्तीफे की मांग उठ रही है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को बिना टेंडर किसी प्रकार का कार्य या जिम्मेदारी दिए जाने से संबंधित आरोपों पर भी स्पष्टता की मांग की और मामले की निष्पक्ष जांच कर पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
देवगम ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है तथा जनता से जुड़े किसी भी निर्णय में नियम-कायदों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन होना चाहिए।

कार्यक्रम में जिला सचिव राहुल आदित्य, इकबाल अहमद, रामलाल मुंडा, अशोक दास, अकबर खान, चंद्रमोहन बोदरा, विश्वनाथ बारा, दीपक प्रधान, बाबू भट्टाचार्य, गणेश बोदरा, अघना कंडुलना, सतीश सुंडी, नवाज हुसैन, विजय बारी, जवाहर बोयपाई, बसीद इकबाल, मनोज लागुरी, मोझाहिद अहमद, सोमबारी बहंदा, मंजीत कोड़ा, शहीद अहमद, बृन्दाबन गोप, लाला राउट, रमेश बिरुआ, अरविन्द कुंकल, दुर्गा चरण देवगम, नितेश माधव, मो. तवारक, मो. प्रिंच, बागुन सवाइयां, डुबलिया बारी, दामू बारी, जगदीश गोप, तुराम सुंडी, मन्नाराम कुदादा, राजू सुंडी, चंद्रमोहन देवगम, मोहन सुंबरुई, विजय सिंह पूर्ति, उदय चेरोवा, मनसुख हांसदा, अर्जुन सुनीता देवगम, शिला जमुदा, बसंती सुंडी, चिड़िया बुड़िउली, हरिलाल कर्जी, प्रदीप तमसोय, भोला, बबलू, शेखर बारिक, कौशल सिन्हा, अर्जुन बनरा, जगदीश जमुदा, मुंडा, नितीश कच्चाप, तुरी कोड़ा, अमूल्य प्रधान, प्रीतम गुप्ता, कैरा सोय, शशि पूर्ति, भादो हांसदा, ताना हांसदा, कैलाश कलुंडिया, कैलाश सामाड, शारिक रजा, राजू प्रसाद, टुकना महतो, सम्राट प्रधान, जीतेन्द्र पूर्ति, राजकिशोर बोईपाई, कैरा कुंकल, नवाब अंसारी, सोमनाथ कुंकल, जयसिंह हेस्सा, सरवर नेहाल नज्जू, वसीम अकरम हुसैन, बंटी जुन्नैद, नईम, केदार जायसवाल, बबलू गोडसोरा, बिरसा तियु समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।

