चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा उपायुक्त श्री मनीष कुमार के नेतृत्व में संचालित “प्रोजेक्ट प्राण” के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में माहवारी स्वच्छता हेतु सेनेटरी नैपकिन इंसिनरेटर (भस्मक) स्थापित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित माहवारी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती थीं। इस आवश्यकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पंचायत स्तर पर स्थायी समाधान विकसित करने का निर्णय लिया, जिसका सकारात्मक प्रभाव अब पूरे जिले में दिखाई देने लगा है।
15वें वित्त आयोग की मद से स्थानीय मुखिया एवं पंचायत सचिवों के समन्वित प्रयासों से जिले के 158 पंचायत सचिवालयों और 63 विद्यालयों, यानी कुल 221 स्थानों पर माहवारी स्वच्छता भस्मकों की स्थापना पूरी कर ली गई है। इन भस्मकों के माध्यम से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन का सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण सुनिश्चित होगा। इससे पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालय परिसरों की स्वच्छता बेहतर होगी तथा खुले में अपशिष्ट फेंकने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि माहवारी स्वच्छता के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना, मिथकों एवं संकोच को दूर करना तथा महिलाओं एवं किशोरियों के लिए सम्मानजनक वातावरण तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक स्थापना स्थल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं छात्राओं को भस्मक के सुरक्षित उपयोग, रखरखाव तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई।

विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, माहवारी के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों, संक्रमण से बचाव तथा स्वच्छता से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसके प्रति किसी भी प्रकार की झिझक या सामाजिक संकोच रखने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।

वहीं पंचायत सचिवालयों में स्थापित भस्मक ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा विभिन्न कार्यों से सचिवालय आने वाली महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे। इससे पंचायत सचिवालय महिलाओं के अनुकूल सार्वजनिक परिसरों के रूप में विकसित होंगे तथा ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि प्रोजेक्ट प्राण का उद्देश्य पंचायत सचिवालयों को केवल प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण विकास, जनकल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि माहवारी स्वच्छता महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालयों में भस्मकों की स्थापना से सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा स्वच्छ और स्वस्थ पंचायतों के निर्माण की दिशा में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।

उपायुक्त ने सभी मुखिया, पंचायत सचिवों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं स्वयं सहायता समूहों से भस्मकों के नियमित उपयोग, रखरखाव और जनजागरूकता गतिविधियों को निरंतर जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब समुदाय स्वयं इन सुविधाओं को अपनाएगा और इनके संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएगा, तभी इस पहल का वास्तविक उद्देश्य सफल हो सकेगा।
जिला प्रशासन का मानना है कि महिलाओं और किशोरियों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहवारी प्रबंधन सुनिश्चित करना केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, गरिमा और महिला सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसी सोच के साथ प्रोजेक्ट प्राण के अंतर्गत पंचायत सचिवालयों को आधुनिक, जनहितैषी और समावेशी सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नवाचारी पहलें लगातार जारी रहेंगी।

