पश्चिमी सिंहभूम में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप, 100 आवासीय छात्र संक्रमित; सारंडा सबसे अधिक प्रभावित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिले में अब तक लगभग 1,600 मलेरिया मरीजों की पहचान की जा चुकी है। गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान तेज कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संक्रमण का सबसे अधिक असर सारंडा और आसपास के वन क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर रैपिड टेस्ट किट से जांच कर रही हैं तथा संक्रमित मरीजों को तत्काल दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और मच्छरदानी वितरण का कार्य भी जारी है। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से जिले में अब तक मलेरिया से किसी की मृत्यु नहीं हुई है।
विशेष रूप से आवासीय विद्यालयों के लगभग 100 छात्र मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने विद्यालयों में जांच और उपचार की व्यवस्था बढ़ा दी है।

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कोल्हान और गोड्डा संभाग के सात प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित
सारंडा वन क्षेत्र का विस्तार मुख्य रूप से मनोहरपुर, नोवामुंडी, गोइलकेरा और आनंदपुर प्रखंडों में होने के कारण ये क्षेत्र संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक पहुंचे सरायकेला, चार डेंजर जोन प्रखंडों पर विशेष नजर
सरायकेला: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया से हुई हालिया मौतों के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा बुधवार को सरायकेला-खरसावां पहुंचे।

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उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में मलेरिया की स्थिति, जांच और उपचार व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद सदर अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।
कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां डेंजर जोन घोषित
बैठक के दौरान जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. सुजाता मुर्मू ने बताया कि कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां प्रखंडों को डेंजर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। मानसून के दौरान इन क्षेत्रों में मलेरिया के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं।

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मिशन निदेशक ने इन चारों प्रखंडों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानकी-मुंडा सहित स्थानीय पारंपरिक जनप्रतिनिधियों के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग बुखार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों के बजाय सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच और इलाज कराएं।
उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया जांच किट और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा जरूरत पड़ने पर अन्य प्रखंडों से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिनियुक्ति (मैनपावर शिफ्टिंग) करने का आश्वासन दिया।
बैठक के बाद मिशन निदेशक ने सदर अस्पताल, सरायकेला का निरीक्षण किया। उन्होंने माइक्रोस्कोप से मलेरिया जांच की प्रक्रिया का अवलोकन किया और इंडोर वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा उपचार व्यवस्था की जानकारी ली।

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फील्ड वर्कर्स को हर महीने 100 ब्लड सैंपल जांच का लक्ष्य
मिशन निदेशक ने निर्देश दिया कि प्रत्येक फील्ड लेवल स्वास्थ्यकर्मी हर महीने कम से कम 100 ब्लड सैंपल की जांच सुनिश्चित करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि लक्ष्य से कम जांच करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ वेतन रोकने सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अगले तीन महीनों तक विशेष “मिशन मोड” में अभियान चलाया जाएगा और सभी स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित निगरानी होगी।
साथ ही निर्देश दिया गया कि अस्पताल में बुखार की शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक मरीज की मलेरिया जांच अनिवार्य रूप से की जाए।

By maskal.news

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