चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग द्वारा संचालित आधुनिक मत्स्य पालन कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। सदर प्रखंड के छोटा जयपुर गांव निवासी रामसिंह मुन्दुईया इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करने वाले रामसिंह ने आधुनिक केज कल्चर (Cage Culture) तकनीक अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

पहले रामसिंह पारंपरिक खेती और छोटे-मोटे कार्यों के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग की केज कल्चर आधारित योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया और आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

योजना के तहत उन्हें 2.70 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, संतुलित आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता बनाए रखने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने संबंधी तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया। विभागीय विशेषज्ञों के सतत मार्गदर्शन में उन्होंने जलाशय में आधुनिक केज स्थापित कर पंगास एवं तिलापिया प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया।

वर्तमान में रामसिंह प्रतिवर्ष लगभग 5 से 6 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें 3.5 से 4.5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं तथा भविष्य की योजनाओं को अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा कर पा रहे हैं।
रामसिंह की सफलता का प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर गांव एवं आसपास के क्षेत्रों के अनेक किसान और युवा भी आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि पात्र लाभुकों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि रामसिंह मुन्दुईया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और प्रशासनिक सहयोग के समन्वय से ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं। उन्होंने जिले के युवाओं एवं किसानों से विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

जिला मत्स्य पदाधिकारी श्री नवीन कुमार ने कहा कि आधुनिक केज कल्चर पद्धति कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली प्रभावी तकनीक है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक इच्छुक मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श और विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिले में मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीणों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो सके। उन्होंने बताया कि विभाग लाभुकों को प्रत्येक चरण में आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
अपने अनुभव साझा करते हुए लाभुक रामसिंह मुन्दुईया ने कहा, “पहले सीमित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था, लेकिन मत्स्य विभाग से मिले प्रशिक्षण और सहयोग ने मेरी जिंदगी बदल दी। आज मैं सम्मानजनक आय अर्जित कर रहा हूं और भविष्य को लेकर आश्वस्त हूं। मैं सभी ग्रामीण भाइयों-बहनों से अपील करता हूं कि वे सरकारी योजनाओं पर विश्वास करें, प्रशिक्षण प्राप्त करें और आधुनिक मत्स्य पालन अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।”

