चाईबासा | विश्व बाल श्रम दिवस के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा बाल श्रम उन्मूलन एवं जन-जागरूकता अभियान के तहत गुरुवार को जिला समाहरणालय परिसर से दो जागरूकता वाहनों को रवाना किया गया। उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार तथा अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर वाहनों को जिले के विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना किया।

जागरूकता वाहन जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भ्रमण कर आम लोगों को बाल श्रम के दुष्प्रभावों, बच्चों के शिक्षा एवं संरक्षण के अधिकारों तथा बाल श्रम निषेध से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देंगे। अभियान का उद्देश्य समाज में बाल श्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को शिक्षा तथा सुरक्षित बचपन उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करना है।

इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बाल श्रम एक गंभीर सामाजिक अपराध है और इसके उन्मूलन के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन बाल श्रम की रोकथाम तथा प्रभावित बच्चों के पुनर्वास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक प्रयास अत्यंत जरूरी हैं।

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा संबंधित विभागों से अपील की कि बाल श्रम से संबंधित किसी भी घटना की सूचना प्रशासन को दें और इस सामाजिक बुराई के उन्मूलन में सहयोग करें।

उन्होंने कहा, “हम सभी मिलकर पहले बाल श्रम मुक्त गांव, फिर बाल श्रम मुक्त पंचायत और अंततः बाल श्रम मुक्त जिला बनाने की दिशा में संगठित प्रयास करेंगे।”

कार्यक्रम में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, नजारत उप समाहर्ता, स्थापना उप समाहर्ता, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग, श्रम अधीक्षक, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

