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दिव्यांग किसान सोनाराम हेंब्रम बने प्रेरणा के स्रोत, आम बागवानी और फूलों की खेती से लिखी सफलता की कहानी

दिव्यांग किसान सोनाराम हेंब्रम बने प्रेरणा के स्रोत, आम बागवानी और फूलों की खेती से लिखी सफलता की कहानी

बंदगांव | अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि शारीरिक चुनौतियां व्यक्ति की प्रगति में बाधा बनती हैं, लेकिन बंदगांव प्रखंड की लांडूपोदा पंचायत अंतर्गत डोमगोड़ा गांव निवासी दिव्यांग किसान सोनाराम हेंब्रम ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से इस सोच को गलत साबित कर दिया है।

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शारीरिक चुनौतियों के बावजूद वे कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

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सोनाराम हेंब्रम ने अपने खेत में आम की बागवानी के साथ-साथ फूलों की खेती को भी व्यवस्थित एवं आकर्षक ढंग से विकसित किया है। उनकी बागवानी न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रही है, बल्कि क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि और उद्यानिकी अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रही है।

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बंदगांव प्रखंड के कृषि पदाधिकारी विजय सिंह जोंकों ने सोनाराम हेंब्रम के बागान का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आम के बगीचे एवं फूलों की खेती का अवलोकन किया और सोनाराम की मेहनत, समर्पण तथा नवाचार की सराहना की।

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कृषि पदाधिकारी ने कहा कि सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद जिस प्रकार सोनाराम ने बागवानी को सफल बनाया है, वह अन्य किसानों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

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सोनाराम हेंब्रम की सफलता यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और आत्मविश्वास हो तो किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश है।