चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय स्थित प्रकोष्ठ में जिले की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा एवं सुदृढ़ीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी, जिला अग्निशमन पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने हाल के दिनों में विभिन्न स्थानों पर हुई अग्निकांड की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिले में व्यापक स्तर पर अग्नि सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने विशेष रूप से चाईबासा एवं चक्रधरपुर शहर क्षेत्र में संचालित होटल, लॉज, हॉस्टल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा सार्वजनिक उपयोग के भवनों में अग्निशमन सुरक्षा मानकों की जांच कराने को कहा।

उपायुक्त ने जिला अग्निशमन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि शहरों के साथ-साथ संकरी गलियों और मार्गों में संचालित दुकानों, गोदामों तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का भी विशेष सर्वेक्षण एवं निरीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास व्यवस्था, विद्युत वायरिंग की स्थिति तथा अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन की विस्तृत जांच की जाए, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।

बैठक में उपायुक्त ने विद्युत शॉर्ट सर्किट को आग लगने की प्रमुख वजहों में से एक बताते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निवारक उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने पुराने एवं जर्जर विद्युत तारों, अवैध कनेक्शनों तथा अत्यधिक विद्युत भार वाले प्रतिष्ठानों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई करने पर जोर दिया। साथ ही, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों को विद्युत सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश भी दिया।

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिले के सभी होटल, लॉज, हॉस्टल, छात्रावास एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले प्रतिष्ठानों में अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, आपातकालीन निकास मार्ग तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नहीं पाई जाएगी अथवा निर्धारित मानकों का अनुपालन नहीं होगा, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सदर अस्पताल चाईबासा, अनुमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में अग्निशमन सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता एवं उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज एवं उनके परिजन मौजूद रहते हैं, इसलिए इन संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग एवं अग्निशमन विभाग को संयुक्त रूप से सभी स्वास्थ्य संस्थानों के अधिकारियों एवं कर्मियों के लिए अग्निशमन यंत्रों के उपयोग, आग लगने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, सुरक्षित निकासी प्रक्रिया तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया। साथ ही अग्नि सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित प्रचार-प्रसार अभियान चलाने पर भी बल दिया।
उपायुक्त ने कहा कि आगजनी की घटनाओं की रोकथाम केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी संस्थानों, व्यवसायियों और आम नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने होटल, लॉज, हॉस्टल संचालकों, व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की कि वे अपने प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करें तथा समय-समय पर अग्निशमन उपकरणों की जांच एवं रखरखाव कराते रहें।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा आगामी दिनों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत विभिन्न प्रतिष्ठानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं की रोकथाम कर नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों, संस्थानों एवं आमजन के सहयोग से जिले में सुरक्षित एवं उत्तरदायी अग्नि सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाएगा।

