कुचाई | कारगिल युद्ध-1999 में देश की रक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सेवानिवृत्त जवान सरदार हेम्ब्रम का शुक्रवार (26 जून 2026) को निधन हो गया। वे 61 वर्ष के थे। उन्होंने अपने पैतृक गांव जिलींगदा में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

सरदार हेम्ब्रम का जन्म 1 जनवरी 1965 को स्वर्गीय लोतो हो के परिवार में हुआ था। वर्ष 1987 में वे बीएसएफ में भर्ती हुए और लगभग 22 वर्षों की सेवा के बाद 1 अगस्त 2009 को सेवानिवृत्त हुए। अपने पीछे वे पत्नी सरस्वती हेम्ब्रम, छोटे भाई करन हेम्ब्रम सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, जब पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था, तब सरदार हेम्ब्रम बीएसएफ की उस टुकड़ी का हिस्सा थे, जिसे भारतीय सेना के साथ अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया गया था।

दुर्गम पहाड़ियों में चले सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया। उनकी यूनिट ने सेना की सप्लाई लाइन को सुरक्षित रखने तथा घुसपैठियों की घेराबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

सरदार हेम्ब्रम के निधन पर आदिवासी हो समाज महासभा ने गहरा शोक व्यक्त किया। महासभा के बड़ी संख्या में सदस्य उनके आवास पहुंचे और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने उनके छोटे भाई करन हेम्ब्रम को सांत्वना देते हुए कहा कि समाज हर परिस्थिति में उनके परिवार के साथ खड़ा रहेगा।

दिवंगत सरदार हेम्ब्रम का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव जिलींगदा में पारंपरिक हो रीति-रिवाज के अनुसार किया गया। अंतिम संस्कार में आदिवासी हो समाज महासभा के उपाध्यक्ष मनोज कुमार सोय, प्रखंड अध्यक्ष रामलाल हेम्ब्रम, सालेन सोय, विजय दिग्गी, श्याम सोय, मानसिंह बांकीरा, सुरेंद्र सरदार, उपेंद्र सरदार, लखविंदर सरदार, गुरुचरण सरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं समाज के लोग उपस्थित रहे।


