राज्य

लखीमपोस गांव में कई दिनों से बंद बिजली बहाल, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई के हस्तक्षेप से लगा नया ट्रांसफार्मर

लखीमपोस गांव में कई दिनों से बंद बिजली बहाल, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई के हस्तक्षेप से लगा नया ट्रांसफार्मर

कुमारडुंगी : मझगांव विधानसभा क्षेत्र के कुमारडुंगी प्रखंड के लखीमपोस गांव में कई दिनों से जला हुआ 63 केवी ट्रांसफार्मर ग्रामीणों की परेशानी का कारण बना हुआ था। ट्रांसफार्मर खराब होने से गांव पूरी तरह अंधेरे में था और बच्चों की पढ़ाई व दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही थीं।

ग्रामीणों ने सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन समय पर समाधान नहीं मिला, जिससे नाराज़गी बढ़ती जा रही थी।

इस बीच, ग्रामीणों की समस्या की सूचना मिलने पर पूर्व मंत्री व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से बात कर नए ट्रांसफार्मर की व्यवस्था कराने को कहा। उनके प्रयास के बाद विभाग ने गांव के लिए नया 63 केवी का ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराया और बिजली बहाली का काम शुरू कर दिया गया।

ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री के हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके प्रयास से ही समस्या का समाधान हुआ।
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहे।

नया ट्रांसफार्मर लगने के बाद गांव में बिजली आपूर्ति बहाल होने से लोगों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई कि आगे ऐसी समस्याओं पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जी. सी. जैन कॉमर्स कॉलेज में अव्यवस्था पर NSUI का विरोध, नया भवन कब्जे में—पुराना जर्जर भवन छात्रों के लिए जोखिम

जी. सी. जैन कॉमर्स कॉलेज में अव्यवस्था पर NSUI का विरोध, नया भवन कब्जे में—पुराना जर्जर भवन छात्रों के लिए जोखिम

चाईबासा : जी. सी. जैन कॉमर्स कॉलेज की स्थिति बेहद चिंताजनक और शर्मनाक बताई जा रही है। वर्ष 2016 में कक्षाओं की कमी के कारण छात्रों को पेड़ों के नीचे पढ़ाई करनी पड़ी थी। लंबे आंदोलन और संघर्ष के बाद नया भवन तैयार हुआ ताकि छात्रों को सुरक्षित और व्यवस्थित कक्षाएँ मिल सकें।

लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। नया भवन छात्रों के बजाय स्किल डेवलपमेंट, सोलर प्लांट और अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कब्जे में रखा गया है। कक्षाएँ बंद हैं और प्रयोगशालाओं की जगह मशीनें रखी गई हैं।

जब छात्रों ने कॉलेज प्रशासन से पूछा कि किस आदेश के आधार पर नया भवन इस तरह उपयोग किया जा रहा है, तो प्रशासन कोई भी आधिकारिक आदेश-पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। कई प्राध्यापक भी इस मामले से अनजान पाए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भवन का उपयोग मनमाने ढंग से और बिना अनुमति के किया जा रहा है।

प्राचार्य के रवैये पर नाराज़गी


NSUI पदाधिकारियों ने प्राचार्य पर असम्मानजनक व्यवहार का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान प्राचार्य का रवैया छात्रों के प्रति असंगत और संस्थान की गरिमा के विरुद्ध था। छात्रों ने कहा कि जो प्राचार्य छात्रों की बात सुनने को तैयार नहीं, उसे कॉलेज की कमान संभालने का अधिकार नहीं है।

पुराना भवन बन चुका है खतरा


कॉलेज का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों में गहरी दरारें, कमजोर छतें और भूकंप जैसी स्थिति के कारण यहां पढ़ाई करना छात्रों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। इसके बावजूद नया भवन खाली रखा जा रहा है और छात्र पुराने खतरनाक ढांचे में पढ़ने को मजबूर हैं।

NSUI की मुख्य मांगें :

1. नया भवन तुरंत शिक्षण कार्य के लिए खोला जाए।


2. स्किल डेवलपमेंट व अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियाँ तत्काल रोकी जाएँ।


3. भवन उपयोग से संबंधित आदेश-पत्र सार्वजनिक किया जाए।


4. पुराने भवन की तकनीकी जांच कर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


5. प्राचार्य छात्रों से सम्मानजनक संवाद सुनिश्चित करें।



NSUI ने चेतावनी दी है कि छात्रों की पढ़ाई, सुरक्षा और भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो सड़क से लेकर परिसर तक बड़े आंदोलन किए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।

प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष अनीश गोप, महासचिव कृष्णा सिरका, कॉलेज अध्यक्ष आर्या प्रकाश सोय, सचिन बिरुवा, मुकेश नायक, बबलु कोड़ा, शिवा तिवारी, संदीप गोंड सहित कई छात्र मौजूद रहे।

प्रखंड कार्यालय में जन आरोग्य समिति के क्षमता वर्धन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

प्रखंड कार्यालय में जन आरोग्य समिति के क्षमता वर्धन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

चक्रधरपुर : प्रखंड कार्यालय के सभागार में सोमवार को टाटा स्टील फाउंडेशन और जन आरोग्य समिति के संयुक्त समन्वय से एक दिवसीय क्षमता वर्धन कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम में बीडीओ कांचन मुखर्जी ने भाग लेते हुए कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व के बारे में जानकारी दी।

कार्यशाला में मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, चिकित्सा पदाधिकारी, एनजीओ प्रतिनिधि, एएनएम और जन आरोग्य समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समिति को अधिक प्रभावी बनाना था। इस दौरान सदस्यों की भूमिका, जिम्मेदारियाँ और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में उनकी भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में राकेश उरांव, सुनील कुमार मारवा, छबिता प्रधान, शीला जोंको, दशना जोकों सहित कई सदस्य उपस्थित थे। कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

पटना में 20 नवंबर को एनडीए की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह

पटना में 20 नवंबर को एनडीए की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को प्रचंड जीत मिलने के बाद नई सरकार का गठन तेजी से हो रहा है। इसी क्रम में एनडीए सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में आयोजित होगा।

प्रशासन ने समारोह की तैयारियों को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति की संभावना है। वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है।

चुनाव में महत्वपूर्ण बहुमत मिलने के बाद एनडीए समर्थक दलों में उत्साह का माहौल है। शपथ ग्रहण समारोह में राज्य और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

सारंडा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झामुमो–कांग्रेस सरकार घिरी, भाजपा ने लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप

सारंडा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झामुमो–कांग्रेस सरकार घिरी, भाजपा ने लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप

चाईबासा : सारंडा रिज़र्व फ़ॉरेस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद राज्य की झारखंड मुक्ति मोर्चा–कांग्रेस गठबंधन सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जंगलों में रहने वाले आदिवासी–मूलवासी समुदाय के अधिकार कभी समाप्त नहीं हुए थे और Forest Rights Act, 2006 की धारा 3 और 4(1) के अनुसार आवास, भूमि और सामुदायिक वनाधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं।

पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला साबित करता है कि झामुमो द्वारा फैलाया गया भय और भ्रम निराधार था। भाजपा नेताओं का आरोप है कि झामुमो के सांसद, विधायक और मंत्री पहले कैबिनेट में सेंचुरी प्रक्रिया को मंजूरी देते रहे और बाद में उसी मुद्दे पर सड़क पर उतरकर जनता को गुमराह करते रहे। कभी आर्थिक नाकेबंदी की धमकी दी गई, तो कभी केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाए गए। लेकिन फैसले के बाद जब यह स्पष्ट हो गया कि किसी को विस्थापित नहीं किया जाएगा, तब झामुमो ने चुपचाप नाकेबंदी वापस ले ली।

भाजपा ने कहा कि केंद्र सरकार आदिवासी समाज के संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है। FRA, PESA, वन धन योजना और जनजातीय विकास कार्यक्रम इसकी पुष्टि करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भी इन अधिकारों की रक्षा को मजबूती दी है।

भाजपा का दावा है कि अब जनता समझ चुकी है कि कौन उनके जल–जंगल–जमीन का सच्चा रक्षक है और कौन राजनीति के लिए भ्रम फैलाता रहा है।

धनसारी में झारखंड स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा जयंती धूमधाम से आयोजित

धनसारी में झारखंड स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा जयंती धूमधाम से आयोजित

पश्चिम सिंहभूम : कुमारडुगी प्रखंड अंतर्गत भोण्डा पंचायत के धनसारी गांव में झारखंड स्थापना दिवस एवं भगवान बिरसा मुंडा जयंती का भव्य आयोजन किया गया। गांववासियों के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत छोटे-छोटे बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकालने से हुई। बच्चों ने गांव के प्रत्येक कोने में जाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए, जिसमें नाचकन, जीके, ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताओं ने उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर माननीय मनोज पाट पिंगुवा (पूर्व BSF) शामिल हुए। साथ ही गांव के सम्मानित शिक्षक—महेश पाट पिंगुवा, चंद्र मोहन पाट पिंगुवा, सतीश पाट पिंगुवा, दुलूराम पाट पिंगुवा, कुल कोड़ा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम का आयोजन उन बच्चों द्वारा किया गया जो गांव में संचालित ग्रुप स्टडी में नियमित रूप से हिस्सा लेते हैं। गांव में चार से पाँच स्थानों पर प्रतिदिन शाम को ग्रुप स्टडी चलती है। इन बच्चों ने अपने प्रयास से घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने का बीड़ा उठाया और पूरे गांव को कार्यक्रम से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

धनसारी गांव के संयुक्त सहयोग और बच्चों के उत्साह ने इस आयोजन को विशेष और प्रेरणादायक बना दिया।

मझगांव में भाजपा का आत्मनिर्भर भारत संकल्प सम्मेलन, स्वदेशी अपनाने और स्थानीय रोजगार पर जोर

मझगांव में भाजपा का आत्मनिर्भर भारत संकल्प सम्मेलन, स्वदेशी अपनाने और स्थानीय रोजगार पर जोर

मझगांव : आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी मझगांव विधानसभा का सम्मेलन कुमारढूंगी डाक बंगला में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता जे. बी. तुबिद उपस्थित थे। सम्मेलन की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। संचालन मंडल महामंत्री विनय दास ने किया।

जिला संयोजक प्रताप कटियार महतो ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए सबसे पहले प्रत्येक व्यक्ति का आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। इसके लिए स्थानीय और क्षेत्रीय रोजगार व्यवस्था को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार कौशल विकास प्रशिक्षण और स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से युवाओं को रोजगार व स्वावलंबन के अवसर दे रही है। महिलाओं का स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर होना भी सकारात्मक बदलाव है।

प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुवर गागराई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और कई देश भारत के साथ व्यापारिक समझौते कर रहे हैं। पतंजलि और श्री श्री रविशंकर के माध्यम से निर्मित स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ाकर देश को और अधिक स्वावलंबी बनाने की जरूरत है।

मुख्य अतिथि जे. बी. तुबिद ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत गांव-गांव में किसानों, महिलाओं, युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और बिक्री के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में विदेशी वस्तुओं के स्थान पर स्वदेशी उत्पाद अपनाना जरूरी है। रक्षा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत अब आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि निर्यातक देश के रूप में भी उभर रहा है।

कार्यक्रम को युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष चंद्र मोहन तियू और वरिष्ठ कार्यकर्ता वशिष्ठ प्रधान ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में घनश्याम पाटपिंगुवा, बेबी सिंपल, पीतांबर रावत, हरिश्चंद्र केसरी, मरचू बोदरा, खगेश्वर रावत, सुमन प्रधान, महेंद्र हेस्सा, अशोक तुम्बिल, जगदीश नायक, रामदेव पिगुवा, डमरूधर बारिक, अमरजीत कुमार, किरण नायक, सचिन नायक, कांग्रेस माझी, श्याम पिंगुवा, लक्ष्मण पिंगुवा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

देवघर में एससी समुदाय पर अत्याचार के खिलाफ सामाजिक संगठनों की बैठक, सरकार को सख्त चेतावनी

देवघर में एससी समुदाय पर अत्याचार के खिलाफ सामाजिक संगठनों की बैठक, सरकार को सख्त चेतावनी

देवघर : देवघर में पिछले एक साल से अनुसूचित जाति समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सामाजिक संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पीड़ित परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए और जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।

प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासन के ढीले रवैये से अपराधियों के हौसले बढ़े हैं और समाज में आक्रोश फैला है। उनका आरोप है कि कुछ जातिवादी तत्वों को प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई नहीं हो पाती।

आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड सरकार को चेतावनी दी है। पार्टी ने कहा कि यदि जातिवादी घटनाओं पर जल्द और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष काशिफ रज़ा ने कहा कि न्याय की मांग करने वालों के साथ खड़ा रहना उनका दायित्व है और पीड़ितों को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

देवघर की यह बैठक सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश बनकर उभरी।

बिरसा मुंडा जयंती: शहीद की विरासत और समाज का गिरता सच

बिरसा मुंडा जयंती: शहीद की विरासत और समाज का गिरता सच

बिरसा मुंडा की जयंती: शहीद की याद या सांस्कृतिक पतन का उत्सव ?

15 नवंबर, अमर शहीद बिरसा मुंडा की जयंती—जिसे आदिवासी इतिहास में एक गौरवपूर्ण दिवस माना जाता है। वही दिन आज समाज में कैसे और किस रूप में मनाया जा रहा है, इस पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सामाजिक चिंतक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने अपने विस्तृत लेख में इस दिन को ‘सांस्कृतिक पतन का उत्सव’ बनाने की प्रवृत्ति पर तीखी आलोचना की है।
जहां एक युवा योद्धा ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके देशी दलालों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। लेकिन अफसोस! आज यह दिन क्या बनकर रह गया है? एक बहाना – नाचने-गाने,शराब पीने, मांस भक्षण करने और फूहड़ आर्केस्ट्रा के नाम पर अश्लीलता फैलाने का आयोजन बन कर रह गया है। जहाँ संस्कृति के नाम पर द्विअर्थी गाने बजते हैं,अश्लील नृत्य होते हैं और लोग इतने मदमस्त हो जाते हैं कि उन्हें याद भी नही रहता कि किसके नाम पर यह सब हो रहा है। यह न सिर्फ बिरसा मुंडा की आत्मा का अपमान है, बल्कि पूरे आदिवासी संघर्ष की मिट्टी पलीद करने का घिनौना प्रयास है। हमारी पीढ़ी इतनी गिर चुकी है कि शहीदों की याद को भी बाजारु मनोरंजन में बदल देती है। मेरा यह आलेख इसी कटु सत्य की गहन पड़ताल करेगा, ताकि हम समझ सकें कि कैसे हमने अपने नायकों को भुला दिया है।

बिरसा मुंडा : एक योद्धा का जीवन और उलगुलान का विद्रोह।

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र में एक मुंडा आदिवासी परिवार में हुआ था। वह कोई साधारण व्यक्ति नही थे। वह एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की लूट और उसके सहयोगी जमींदारों-महाजनों की शोषणकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। 19वीं शताब्दी के अंत में आदिवासी इलाकों में ब्रिटिशों ने जमींदारी प्रथा थोप दी थी,जिसके तहत आदिवासियों की जमीनें छीन ली जाती थी,उन्हें बंधुआ मजदूर बना दिया जाता था और सूदखोर महाजन उनके खून-पसीने को चूसते थे। बिरसा ने इससे सहन नही किया। उन्होंने ‘उलगुलान’ – अर्थात ‘महान विद्रोह’ – की शुरुआत की,जो 1899-1900 में चला।
उलगुलान कोई साधारण विद्रोह नही था। यह ‘आबुआ राज’ (हमारा राज) का सपना था – जहाँ आदिवासी अपनी जमीन,अपनी संस्कृति और अपनी स्वतंत्रता पर अपना हक जताते थे। बिरसा ने आदिवासियों को एकजुट किया,उन्हें बताया कि ब्रिटिश और उनके दलाल कैसे उनकी जड़ें काट रहे हैं। उन्होंने धार्मिक-सांस्कृतिक आंदोलन भी चलाया, जहाँ ईसाई मिशनरियों के प्रभाव से बचाव और अपनी परंपराओं की रक्षा पर जोर दिया। ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार किया और 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी मौत हो गई। संभवतः जहर देकर या यातनाओं से योजनाबद्ध षडयंत्र के तहत मार दिया गया। लेकिन उनका संदेश अमर रहा “अपनी जमीन बचाओ, शोषकों के खिलाफ लड़ो।” आज जब हम उनके इस संघर्ष को याद करते हैं, तो यह प्रेरणा का स्रोत होना चाहिए – न कि मदिरा पान और फूहड़ता में मदहोश।

आज की जयंती: शहीद की याद या बाजारु तमाशा ?

दुर्भाग्य से आज बिरसा मुंडा की जयंती पूरे देश में ‘धूमधाम’ से मनाई जा रही है – लेकिन किस तरह की धूमधाम? गांवों, शहरों और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में कार्यक्रमों के नाम पर क्या हो रहा है ? नाच-गाना,डीजे पर तेज संगीत,शराब की बोतलें खुलना,मांस की दावतें और आर्केस्ट्रा जहाँ फूहड़ डांस होते हैं। संस्कृति के नाम पर द्विअर्थी गाने बजते हैं,अश्लील नृत्य होते हैं और युवा पीढ़ी इतनी मदहोश हो जाती है कि उन्हें पता भी नही चलता कि यह दिन किसके लिए है। क्या यही है बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि ? क्या उनका उलगुलान इसीलिए था कि हम उनकी याद में मदिरा पीकर नाचें और अपनी संस्कृति को अश्लीलता में डुबो दें?
यह कटु सत्य है कि हमारी समाज ने शहीदों को कमर्शियलाइज कर दिया है। राजनीतिक दल और स्थानीय नेता इस दिन को वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करते हैं – रैलियां निकालते हैं, भाषण देते हैं,लेकिन शाम होते ही सब कुछ पार्टी में बदल जाता है। आदिवासी इलाकों में जहाँ बिरसा ने जमीन के लिए लड़ाई लड़ी,आज भी शोषण जारी है – कॉर्पोरेट लूट,खनन कंपनियां और विकास के नाम पर विस्थापन इत्यादि। लेकिन जयंती पर कोई इन मुद्दों पर कोई बात नही करता है। इसके बजाय फूहड़ कार्यक्रम होते हैं जहाँ महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है और पुरुष मदिरा में डूबकर अपनी मर्दानगी दिखाते हैं। यह न सिर्फ बिरसा मुंडा का अपमान है,बल्कि पूरे आदिवासी समाज की गरिमा का मखौल है। हम इतने गिर चुके हैं कि शहीद की याद को भी ‘एन्जॉयमेंट’ में बदल देते हैं – जैसे कोई त्योहार हो, न कि संघर्ष की याद। क्या बिरसा मुंडा ने इसके लिए जान दी थी ? क्या उलगुलान का मतलब यही था – शराब और अश्लीलता ?
यह स्थिति और भी दुखद तब हो जाती है जब हम देखते हैं कि युवा पीढ़ी को बिरसा मुंडा के बारे में कुछ पता ही नही है। स्कूलों में उनके बारे में पढ़ाया जाता है,लेकिन वह किताबी ज्ञान बनकर रह जाता है। जयंती पर वे नाचते हैं,पीते हैं और अगले दिन भूल जाते हैं। यह सांस्कृतिक पतन है – जहाँ परंपराएं विकृत हो रही हैं और शहीदों की विरासत को बाजारु मनोरंजन में बेच दिया जा रहा है। अगर बिरसा आज जीवित होते, तो शायद वे फिर से उलगुलान का बिगुल फूंकते – इस बार अपने ही लोगों की अज्ञानता और पतन के खिलाफ।

बिरसा मुंडा के संदेश की आज की प्रासंगिकता।

बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी उतना ही समसामयिक है। आज आदिवासी इलाकों में क्या हो रहा है? विकास के नाम पर जंगलों की कटाई, खनन कंपनियों  की लूट,आदिवासियों की जमीनें छीन रही हैं और सरकारी नीतियां उन्हें मुख्यधारा से बाहर रख रही हैं। बिरसा ने ‘आबुआ राज’ का सपना देखा था – स्वशासन का, जहाँ आदिवासी अपनी किस्मत खुद लिखें। लेकिन आज हम क्या कर रहे हैं? उनकी जयंती पर मदिरा पीकर नाच रहे हैं, जबकि उनके बताए रास्ते पर चलने की बजाय हम शोषण को सहन कर रहे हैं।
उनका संदेश था – एकजुट होकर लड़ो, अपनी संस्कृति बचाओ। लेकिन आज संस्कृति के नाम पर क्या बच रहा है? फूहड़ डांस और अश्लील कार्यक्रम ? यह तो संस्कृति का विनाश है। बिरसा ने ब्रिटिश दलालों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन आज के दलाल – राजनीतिक नेता, एनजीओ और कॉर्पोरेट – उनके नाम पर पैसा कमा रहे हैं। जयंती पर अगर हम सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो उनके संघर्ष से प्रेरणा लें। आदिवासी अधिकारों के लिए आवाज उठाएं, जमीन बचाने के लिए लड़ें और सांस्कृतिक शुद्धता बनाए रखें। लेकिन अफसोस हमारी पीढ़ी इतनी कमजोर और स्वार्थी हो चुकी है कि शहीदों को भी ‘पार्टी’ में बदल देती है।
बिरसा मुंडा की जयंती कोई उत्सव नही, बल्कि चिंतन और संघर्ष का दिन होना चाहिए। हमें इस कटु सत्य को स्वीकार करना होगा कि हमने उनके बलिदान को भुला दिया है। नाच-गाना,शराब और फूहड़ता से हम उनकी आत्मा को और पीड़ा दे रहे हैं। सच्ची श्रद्धांजलि है – उनके इतिहास को पढ़ना, युवाओं को सिखाना और आज के शोषण के खिलाफ आवाज उठाना। अगर हम ऐसा नही करेंगे, तो बिरसा मुंडा जैसे नायक सिर्फ कैलेंडर की तारीख बनकर रह जाएंगे। आइए इस पतन को रोकें – वरना हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नही करेंगी। बिरसा मुंडा अमर रहें, लेकिन उनकी याद को अमर रखने की जिम्मेदारी हमारी है। जागो, वरना उलगुलान फिर से जरुरी हो जाएगा – इस बार खुद के खिलाफ !
आज बिरसा मुंडा के सपनों और उद्देश्यों के विरोधी हमारे अपने समाज के अंदर हैं।
इससे बदलना होगा।
यही वक्त की जरुरत है।

घोड़ाबांधा में अर्जुन मुंडा ने एशियन मास्टर्स चैम्पियन श्री एस. के. तोमर को दी बधाई

घोड़ाबांधा में अर्जुन मुंडा ने एशियन मास्टर्स चैम्पियन श्री एस. के. तोमर को दी बधाई

जमशेदपुर : भाजपा के पूर्व सांसद व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने आज जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास में श्री एस. के. तोमर से मुलाकात की।
श्री तोमर ने हाल ही में चेन्नई में आयोजित 23वीं एशियन मास्टर्स एथलेटिक्स चैम्पियनशिप (5–9 नवम्बर 2025) में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने 50+ आयु वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए हैमर थ्रो में स्वर्ण पदक और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन किया।

अर्जुन मुंडा ने उनकी इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री तोमर की सफलता कई खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।