जमशेदपुर : 14 नबंवर शुक्रवार (पूर्वी सिंहभूम)सुंदरनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की बदुंहुडंग ओपेन कस्ट माइंस में नया टेंडर जारी होने के बाद पिछले पाँच दिनों से बदुंहुडंग-केरुवाडुंगरी एंव प्रभावित संयुक्त विस्थापित कमेटी द्वारा ओपन कास्ट माइंस का संचालन ठप कर दिया गया है।
विस्थापित कमेटी ने UCIL प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 में हुआ लिखित समझौता कंपनी द्वारा लागू नहीं किया गया। साथ ही कमेटी का कहना है कि ओपन कास्ट माइंस में प्रबंधन ने UCIL कर्मचारियों की एक अलग कमेटी बनाकर ठेका कार्य को उन्हीं के माध्यम से चलाना शुरू कर दिया है, जिससे मूल विस्थापित परिवारों को—
स्थायी नौकरी,
ठेकेदारी में काम
तथा मृत्यु परिजन को समय पर नौकरी
जैसी सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं।
15 वर्षों से ठेकेदारी का आरोप :
कमेटी का यह भी आरोप है कि UCIL प्रबंधन और कुछ स्थायी कर्मचारियों की मिलीभगत से एक दल पिछले 15 वर्षों से ठेकेदारी व्यवस्था में काम कर रहा था। लेकिन नए टेंडर चार माह का लागू होते ही स्थिति बदल गई।
सोमवार को विस्तापित परिवार द्वारा ओपन कास्ट माइंस बंद होने की खबर मिलते ही पुराने ठेकेदार मजदूर अपने संगठन अध्यक्ष के साथ आकर नए संयुक्त विस्थापित कमेटी पर धावा बोल दिया।इसी दौरना धरना पर बैठी कई महिला प्रदर्शनकारी पीटकर घायल कर दी गईं।
त्रिपक्षीय वार्ता भी विफल :
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए कंपनी प्रबंधन ने गुरुवार दिनांक 13 नबंवर को दोनों पक्षों को बुलाकर त्रिपक्षीय बैठक की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद भी समाधान नहीं निकल सका।बदुंहुडंग-केरुवाडुंगरी एंव प्रभावित संयुक्त विस्थापित कमेटी ने आरोप लगाया कि प्रबंधन लगातार पुराने दल का ही समर्थन करता रहा।
नई संयुक्त विस्थापित कमेटी ने असहमति जताते हुए
बैठक को छोड़कर वापस धरना स्थल पल लौट आई और अपनी पुरानी माँगों पर अडिग रही।
आज शाम खबर लिखे जाने तक केरुवा डुंगरी के दोनों स्थायी कर्मचारी राधे गोप (कर्मचारी संख्या 20089) और जेना हो (कर्मचारी संख्या 20060) को कंपनी प्रबंधन द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
कंपनी प्रबंधन का आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने स्थानीय ग्रामीणों एवं बदुंहुडंग–केरुवाडुंगरी संयुक्त प्रभावित विस्थापित कमेटी को उकसा कर मांइस बंदी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
वहीं,अब आगे देखना होगा कि दोनों कर्मचारियों ने अपने गांव के हक के लडा़ई आवाज बनने में कंपनी प्रबंधन कितना दोषा करार देकर उनके विरुद क्या करवाई करतें हैं।
ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है—कंपनी समर्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
विस्थापित समिति और स्थानीय ग्रामीणों का सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब कंपनी प्रबंधन के समर्थन में कुछ कर्मचारियों ने जबरन मारपीट कर काम चालू कराया जा रहा था, तो उन पर अब तक पुलिस प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
विस्तापित परिवारों का आरोप है कि :
कंपनी के पक्ष में खड़े कुछ कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर धमकी, धक्का-मुक्की और जबरदस्ती काम शुरू करा रहा था,
परंतु घटना के वीडियो और गवाह मौजूद होने के बावजूद पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया।
नराज विस्तापित परिवारों के लोगों का कहना है कि
> “क्या कानून केवल विस्थापितों और ग्रामीणों के लिए है?
जब मारपीट कंपनी समर्थित कर्मचारियों ने की है, तो उन पर कार्रवाई कौन करेगा?”
इन सवालों के जवाब का इंतजार अब भी बना हुआ है।
ग्रामीणों और विस्थापित कमेटी द्वारा पिछले पाँच दिनों से मांइस बंद कर नए टेंडर का विरोध जारी है।
हमारी माँगे :-
1. बान्दुहूडाँग से विस्थापित हुए विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों को ठेकेदारी में 70% तक बहाली किया जाए।
2. बान्दुहूडाँग परियोजना से विस्थापित हुए मृत्यु केस को अविलंब नियोजन प्रक्रिया पूरी कर स्थायी नौकरी दिया जाए।
3. 2004-05 के बचे सभी विस्थापितो को यूसिल में नियोजन प्रक्रिया पूरी कर स्थायी नौकरी दिया जाए ।
4. 2004 – 05 विस्थापितों के पुनर्वास कर उनका संपूर्ण विकास किया जाए एवं मुआवजा दिया जाए ।
5. ऐसे विस्थापित कर्मी जो यूसिल में नौकरी के दौरान मृत्यु हुई है उनके आश्रित को 90 दिनों के अंदर नौकरी में बहाल किया जाए।
6. ऐसे विस्थापित जो नौकरी के उपरान्त अस्वस्थ्य होने के कारण अथवा नौकरी में लम्बे समय तक अनुपस्थित होने के कारण उन्हें नौकरी से बेदखल कर दिया गया है उनके आश्रितो को अविलम्ब नौकरी प्रदान किया जाए ।

