चाईबासा : झारखंड राज्य सीनियर अंतर जिला फुटबॉल प्रतियोगिता में पश्चिमी सिंहभूम जिला फुटबॉल टीम की 7–0 की करारी और शर्मनाक हार ने जिलेभर के खिलाड़ियों, पूर्व खिलाड़ियों, कोचों और खेलप्रेमियों में उबाल ला दिया है।
हर ओर से एक ही आवाज उठ रही है,
हार खिलाड़ियों की नहीं, SSA चाईबासा की अवैध और भ्रष्ट कमिटी की है।
खेल प्रेमियों का कहना है कि वर्षों से SSA चाईबासा खेल को आगे बढ़ाने के बजाय गुटबाजी, पक्षपात, अहंकार और निजी स्वार्थ में डूबा हुआ है, जिसका नतीजा आज जिला फुटबॉल की बर्बादी के रूप में सामने है।
1. अवैध कमिटी की मनमानी उजागर, क्लब पंजीकरण होने के बावजूद लीग से बाहर
जिले के कई प्रतिष्ठित क्लबों ने बताया कि SSA की अवैध कमिटी ने:
सुपर डिवीजन के कई क्लबों को पंजीकरण के बाद भी लीग में जगह नहीं दी, लीग मैच जल्दबाज़ी में, अधूरे और बिना अनुमति मानक के कराए,
विरोध होने पर भी किसी खिलाड़ी-कोच या क्लब की बात नहीं सुनी, पदेन अध्यक्ष और उपायुक्त को दिए गए आवेदन की भी अनदेखी की,
कई क्लबों को जबरन दबाव और धमकियों के बीच खेलने से बाहर होना पड़ा। खिलाड़ियों का आरोप है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि
कमिटी के पसंदीदा क्लबों और खिलाड़ियों को टीम में जगह देने का रास्ता साफ़ रहे।
2. टीम चयन में भारी पक्षपात, ओपन ट्रायल सिर्फ दिखावा
खिलाड़ी और पूर्व खिलाड़ी बताते हैं कि:
ओपन ट्रायल की सूचना सोच-समझकर देर से जारी की गई, ट्रायल में खिलाड़ियों को बराबर मौका नहीं दिया गया,सीनियर व अनुभवी खिलाड़ियों को जानबूझकर बाहर रखा गया, पहले से फिक्स खिलाड़ियों की सूची तैयार थी, चयन प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं रखी गई।
खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि पूरी चयन प्रक्रिया सिर्फ एक ड्रामा थी, निर्णय पहले से ही कर लिया गया था।
3. मात्र 2–3 दिनों का कैंप – टीम गठन मजाक बन गया
जिले की फुटबॉल टीम वर्षों से कैंप के जरिए प्रशिक्षण लेती थी,
लेकिन इस बार SSA की अवैध कमिटी ने सिर्फ दो–तीन दिनों के औपचारिक कैंप में टीम तैयार कर दी,
खिलाड़ियों के बीच तालमेल, फिटनेस और रणनीति पर शून्य ध्यान दिया, कोच और चयनकर्ताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही। पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि
“SSA ने जिले की प्रतिभा के साथ नहीं, बल्कि पूरे खेल के साथ मज़ाक किया है।
4. प्रतियोगिता में अपमानजनक प्रदर्शन – SSA की लापरवाही का नतीजा
पहला मैच: खूंटी जैसी कमजोर टीम के खिलाफ भी पश्चिमी सिंहभूम किसी तरह 4–3 से जीत पाया।
यह शुरुआती चेतावनी थी कि टीम में तालमेल और तैयारी गंभीर रूप से कमजोर है।
दूसरा मैच: सरायकेला–खरसावां ने हमारी टीम को 7–0 से रौंद दिया।
यह परिणाम प्रतिभा की कमी नहीं,
बल्कि SSA की तानाशाही, गलत चयन और अव्यवस्था की देन है।
खेलप्रेमियों ने कहा: हार मैदान में नहीं हुई—हार SSA के दफ्तर में पहले ही तय हो चुकी थी।
5. SSA पर बड़े आरोप – फुटबॉल नहीं, दुकानें और फायदे प्राथमिकता
खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों ने SSA की अवैध कमिटी पर गंभीर आरोप लगाए: स्टेडियम परिसर की दुकानों पर अवैध कब्जा,
आर्थिक लाभ और किराया विवाद, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर मनमर्जी, खेल निधियों के उपयोग पर भी गंभीर सवाल। खेलप्रेमियों ने कहा:
“SSA को फुटबॉल से ज्यादा अपनी जेब और राजनीतिक दोस्ती की चिंता है। पिछले 18 वर्षों में पश्चिमी सिंहभूम जिला टीम सिर्फ एक बार संयुक्त विजेता बनी—
वह भी मैच बारिश के कारण न होने के चलते। यह SSA की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है।
6. खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों की कड़ी चेतावनी – अब संघर्ष के लिए तैयार
खिलाड़ी–पूर्व खिलाड़ी–खेलप्रेमी समिति ने चेतावनी जारी की है कि अगर SSA की अवैध कमिटी को तत्काल भंग कर
नियमित, पारदर्शी और लोकतांत्रिक कमिटी का गठन नहीं किया गया, तो:
SSA कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना,
स्टेडियम गेट पर अनशन
जिलेभर के खिलाड़ियों द्वारा जनआंदोलन, फुटबॉल सुधार के लिए आर-पार की लड़ाई,
शुरू की जाएगी। समिति ने कहा: यह आंदोलन सिर्फ आज की हार का नहीं है—यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।
जारीकर्ता:
खिलाड़ी – पूर्व खिलाड़ी – खेलप्रेमी समिति, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा
हस्ताक्षरकर्ता:
मधुसूदन समाड, राज केसरी, तुराम देवगम, सुरजा देवगम, जयसिंह हेस्सा, गोविन्द सिंह पुरती,
संजय बारी, मोनो पुरती, अमित मछुवा, हरिचरण गोप, जम्बीरा गोप, अभय सिंह देवगम,
सोमा पुरती, मंगल सिंह पुरती, महेश बारी, मिथुन मछुवा, युगल किशोर पुरती,
रमेश जामुदा, अनूप गोप, विजय सिंह बारी, दुलुराम सिंकू, जयपाल सिंह सिरका,
कृष्णा गोप, नरसिंह बिरुवा, डोबरो पूरती, बिनु पूरती, मनीष, लाल सिंह पुरती, साधो बारी,
तथा अनेक पूर्व खिलाड़ी, कोच और फुटबॉल प्रेमियों ने संयुक्त रूप से अपना आक्रोश व्यक्त किया।