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नोवामुंडी में भाजपा की जीत पर जश्न, मधु कोड़ा बोले—जनता ने मजबूत नेतृत्व पर जताया भरोसा

नोवामुंडी में भाजपा की जीत पर जश्न, मधु कोड़ा बोले—जनता ने मजबूत नेतृत्व पर जताया भरोसा

नोवामुंडी (झारखंड) | झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री Madhu Koda ने सोमवार को नोवामुंडी में भारतीय जनता पार्टी की असम, बंगाल एवं पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में मिली जीत पर कार्यकर्ताओं के साथ उत्साहपूर्वक जश्न मनाया। इस दौरान मिठाइयां बांटी गईं और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर मधु कोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि यह जीत स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि देश की जनता Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर विश्वास जता रही है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण से जुड़े कानूनों तथा एसआईआर जैसे निर्णयों को जनता का व्यापक समर्थन मिला है, जो चुनाव परिणामों में परिलक्षित होता है।

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उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर उठाए गए “बेतुके सवालों” का जवाब दे दिया है। कोड़ा ने कहा, “कुछ लोग ऑपरेशन सिंदूर जैसे मामलों पर प्रश्न उठाकर देश के नेतृत्व को घेरने का प्रयास कर रहे थे, वहीं विदेश नीति को लेकर भी भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। लेकिन जनता ने अपने मत से स्पष्ट कर दिया कि वह मजबूत और निर्णायक नेतृत्व के साथ खड़ी है।”

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मधु कोड़ा ने आगे कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों और अवैध घुसपैठियों के प्रति सहानुभूति रखने वालों को भी जनता ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने असम, बंगाल और पुडुचेरी की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “आप सभी ने पार्टी के नीति-सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप यह विजय प्राप्त हुई है।”
अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि जिस प्रकार देशभर में भाजपा को समर्थन मिल रहा है, उसी प्रकार झारखंड की जनता भी जल्द ही वर्तमान सरकार से मुक्ति का मार्ग चुनते हुए विकास और सुशासन की दिशा में कदम बढ़ाएगी।

जमशेदपुर में NEET UG-2026 परीक्षा पर सवाल, टॉपर छात्रा ने लगाए अव्यवस्था के आरोप

जमशेदपुर में NEET UG-2026 परीक्षा पर सवाल, टॉपर छात्रा ने लगाए अव्यवस्था के आरोप

जमशेदपुर | शहर में आयोजित NEET (UG)-2026 परीक्षा को भले ही प्रशासन ने शांतिपूर्ण बताया हो, लेकिन एक नेशनल स्तर की टॉपर छात्रा की शिकायत ने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CISCE बायोसाइंस टॉपर और सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा शांभवी तिवारी ने परीक्षा के दौरान व्यवधान और अव्यवस्था का आरोप लगाया है।
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक शिकायत दर्ज कराई गई है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी इसकी जानकारी दी गई है।
शांभवी के परिचित राजेश कुमार सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि गोलमुरी स्थित एबीएम कॉलेज परीक्षा केंद्र पर NTA की गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार, परीक्षा के दौरान अव्यवस्था और असमानता का माहौल रहा, जिससे छात्रों को मानसिक दबाव और समय की कमी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि दोपहर 2 बजे से 5 बजे के बीच निरीक्षक लगातार छात्रों को डिस्टर्ब करते रहे।

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परीक्षा के दौरान नियमों की अनदेखी का आरोप
शांभवी के पिता राकेश रमन ने बताया कि NTA के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद परीक्षा के बीच में कई बार थंब इम्प्रेशन लिया गया और अलग-अलग स्थानों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके अलावा बार-बार एडमिट कार्ड और फोटो की जांच की गई, जबकि यह प्रक्रिया परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्ति के बाद की जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि इससे परीक्षा का माहौल प्रभावित हुआ।

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समय बर्बाद होने से प्रभावित हुई एकाग्रता
परिजनों के अनुसार, इन अतिरिक्त प्रक्रियाओं में करीब 15 से 20 मिनट का समय व्यर्थ हुआ, जिससे शांभवी की एकाग्रता भंग हो गई। परिणामस्वरूप वह चार ऐसे प्रश्न हल नहीं कर सकी, जिनके उत्तर उसे ज्ञात थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गाइडलाइन के अनुसार पारदर्शी बोतल ले जाने की अनुमति होने के बावजूद छात्रों को पानी ले जाने से रोका गया और केंद्र पर भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।

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प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राहुल जी आनंद ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि वे स्वयं परीक्षा केंद्र पर मौजूद थे और सभी प्रक्रियाएं व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुसार पूरी की गईं। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा निष्पक्ष और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराई गई।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा संचालन की पारदर्शिता और व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट से दंतैल हाथी गंभीर रूप से घायल

सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट से दंतैल हाथी गंभीर रूप से घायल

चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) | सारंडा जंगल में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक दंतैल हाथी आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना सारंडा वन प्रमंडल के कोयना वन प्रक्षेत्र अंतर्गत कोलभोंगा क्षेत्र के समीप की बताई जा रही है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाथी का दाहिना अगला पैर जमीन में दबे आईईडी पर पड़ते ही जोरदार विस्फोट हो गया। विस्फोट के कारण हाथी के पैर में गहरा घाव हो गया है, जिससे वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि यह आईईडी नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लगाया गया था।

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घटना की सूचना स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को दी। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचने की तैयारी में जुट गई है और घायल हाथी के उपचार एवं बचाव के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। हालांकि, जिस इलाके में हाथी घायल पड़ा है, वहां अन्य आईईडी होने की आशंका के चलते बचाव कार्य में विशेष सावधानी बरती जा रही है।

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वन विभाग और सुरक्षा बल संयुक्त रूप से पहले पूरे क्षेत्र की सघन जांच कर रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके। जांच पूरी होने के बाद ही हाथी के सुरक्षित रेस्क्यू और उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
यह घटना एक बार फिर सारंडा क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों के कारण वन्यजीवों और आम लोगों पर मंडरा रहे खतरे को उजागर करती है।

जनगणना 2027 में ‘सरना धर्म कोड’ शामिल करने की मांग, मुख्यमंत्री Hemant Soren ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

जनगणना 2027 में ‘सरना धर्म कोड’ शामिल करने की मांग, मुख्यमंत्री Hemant Soren ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

रांची | झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने आगामी जनगणना 2027 में आदिवासियों के लिए ‘सरना धर्म कोड’ को अलग से शामिल करने की मांग को लेकर महत्वपूर्ण पहल की है। इस संबंध में उन्होंने देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu, प्रधानमंत्री Narendra Modi और झारखंड के राज्यपाल Santosh Kumar Gangwar को अलग-अलग पत्र लिखकर अपनी बात रखी है।

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मुख्यमंत्री ने अपने पत्रों में कहा कि झारखंड राज्य की आधारशिला यहाँ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्रकृति-आधारित जीवनशैली पर आधारित है, जिसे व्यापक रूप से ‘सरना धर्म’ के रूप में पहचान प्राप्त है। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान जनगणना प्रारूप में अनुसूचित जाति और जनजाति का उल्लेख तो है, लेकिन आदिवासियों की विशिष्ट धार्मिक पहचान दर्ज करने के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं है, जिससे भविष्य की नीतियों और योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण ही राष्ट्र के विकास का सर्वोत्तम मार्ग है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान देश के 21 राज्यों में लगभग 50 लाख लोगों ने अलग कोड न होने के बावजूद स्वेच्छा से ‘सरना’ को धर्म के कॉलम में दर्ज कराया था, जो इस मांग की व्यापकता को दर्शाता है।
राष्ट्रपति को भेजे पत्र में उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों और पांचवीं अनुसूची का हवाला देते हुए हस्तक्षेप का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जनजातीय समाज की संरक्षक होने के नाते उनकी विशिष्ट पहचान को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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इसके अलावा, राज्यपाल से भी मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया है कि झारखंड विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव और स्थानीय जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के समक्ष इस मुद्दे पर सकारात्मक अनुशंसा भेजी जाए।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्रों में यह भी उल्लेख किया कि भारत तकनीकी और डिजिटल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में जनगणना प्रपत्र में ‘सरना धर्म कोड’ को शामिल करना पूरी तरह संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि जनगणना के दूसरे चरण में इस पहचान को आधिकारिक मान्यता मिलती है, तो इससे न केवल सामाजिक समरसता को बल मिलेगा, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता को भी संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उचित स्थान मिलेगा।
पत्रों के अंत में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि झारखंड की आकांक्षाओं और आदिवासी समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए आगामी जनगणना प्रपत्रों में आवश्यक संशोधन किए जाएं।

चाईबासा में नीट (यूजी)-2026 परीक्षा शांतिपूर्ण व कदाचार-मुक्त माहौल में संपन्न

चाईबासा में नीट (यूजी)-2026 परीक्षा शांतिपूर्ण व कदाचार-मुक्त माहौल में संपन्न

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में रविवार को आयोजित नीट (यूजी)-2026 परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार-मुक्त वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। परीक्षा के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला उपायुक्त मनीष कुमार ने मांगीलाल रुंगटा प्लस टू उच्च विद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने परीक्षार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें ओएमआर शीट पर मांगी गई सभी जानकारियों को सावधानीपूर्वक एवं सही तरीके से भरने का निर्देश दिया। उन्होंने परीक्षा केंद्र पर की गई व्यवस्थाओं का भी गहन निरीक्षण किया, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, मेडिकल टीम की उपलब्धता, पेयजल व्यवस्था तथा परीक्षार्थियों की उपस्थिति जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल थे।

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इस दौरान उपायुक्त ने ड्यूटी पर तैनात दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह सतर्क एवं मुस्तैद रहने का निर्देश दिया, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

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मांगीलाल रुंगटा प्लस टू उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर कुल 480 में से 459 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जबकि दूसरे परीक्षा केंद्र सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला स्कूल में 125 में से 122 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। दोनों ही केंद्रों पर बेहतर प्रबंधन के साथ परीक्षा का सफल आयोजन सुनिश्चित किया गया।

चाईबासा: उच्च शिक्षा को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

चाईबासा: उच्च शिक्षा को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

चाईबासा | झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन ने व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया है। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 10(11) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए कई कॉलेजों के प्रिंसिपलों और प्राध्यापकों के तबादले एवं नई नियुक्तियों से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है।

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इस फेरबदल में सबसे चर्चित नाम डॉ. अमर सिंह का है, जिनका लगभग एक महीने के भीतर दूसरी बार तबादला किया गया है। पहले उन्हें कोऑपरेटिव कॉलेज से टाटा कॉलेज, चाईबासा स्थानांतरित किया गया था, जबकि अब उन्हें डिग्री कॉलेज, जगन्नाथपुर का प्रिंसिपल नियुक्त किया गया है। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की नाराजगी के कारण उनका बार-बार स्थानांतरण हो रहा है।
वहीं, विश्वविद्यालय की प्रभारी परीक्षा नियंत्रक डॉ. रिंकी दोराई को अहम जिम्मेदारी देते हुए टाटा कॉलेज, चाईबासा का प्रभारी प्रिंसिपल बनाया गया है।

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प्रमुख तबादले एवं नियुक्तियां:
डॉ. नीता सिन्हा को जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज से स्थानांतरित कर कोऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर में पदस्थापित किया गया है।
डॉ. अमर सिंह को टाटा कॉलेज, चाईबासा से हटाकर डिग्री कॉलेज, जगन्नाथपुर का प्रिंसिपल बनाया गया है।
प्रो. रिंकी दोराई को टाटा कॉलेज, चाईबासा का प्रभारी प्रिंसिपल नियुक्त किया गया है।
डॉ. मो. नजरुल इस्लाम को डिग्री कॉलेज, जगन्नाथपुर से स्थानांतरित कर वर्कर्स कॉलेज, जमशेदपुर भेजा गया है।
पंकज श्रीवास्तव को मॉडल कॉलेज, खरसावां से टाटा कॉलेज, चाईबासा में पदस्थापित किया गया है।

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अतिरिक्त प्रभार में बदलाव:
डॉ. लाडली कुमारी और डॉ. बसंत शुभंकर को अन्य कॉलेजों में दिए गए अतिरिक्त प्रभार समाप्त कर दिए गए हैं।
डॉ. ब्रजेश कुमार को सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, बुधवार और शुक्रवार) विश्वविद्यालय के पीजी रसायन विज्ञान विभाग में शैक्षणिक एवं विभागीय कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह व्यापक फेरबदल शैक्षणिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सातबाकड़ा में सेंगेल अभियान के नेतृत्व में निर्मल जल से श्राद्ध, सामाजिक सुधार की नई मिसाल

सातबाकड़ा में सेंगेल अभियान के नेतृत्व में निर्मल जल से श्राद्ध, सामाजिक सुधार की नई मिसाल

घाटशिला/डुमुरिया | आदिवासी सेंगेल अभियान के घाटशिला प्रमंडलीय अध्यक्ष श्री रामेश्वर मुर्मू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि डुमुरिया प्रखंड थाना क्षेत्र अंतर्गत कान्टासोला पंचायत के सातबाकड़ा गांव में 1 मई 2026 को कार्तिक मुर्मू के परिवार में सेंगेल अभियान के नेतृत्व में निर्मल जल से श्राद्ध एवं दशर्कम सम्पन्न कराया गया।

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इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से घाटशिला अनुमंडल सेंगेल अध्यक्ष रामेश्वर मुर्मू, सुपाई मुर्मू, जोसेफ हेम्ब्रोम, लखिन्द्र मुर्मू, सरोसकोना प्रखंड सेंगेल बीडीओ अनंत चरण मारांडी, प्रशांत हांसदा, भागीरथी माझी, पुनता माझी सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि 28 अप्रैल 2026 को सेंगेल दिशोम परगना सोना राम सोरेन ने सेंगेल के आठ प्रतिनिधियों एवं पीड़ित परिवार के साथ सातबाकड़ा ग्राम के माझी प्रधान दुखूराम मुर्मू के कथित आड़ियाली रवैये के खिलाफ जिला उपायुक्त एवं प्रशासन को अवगत कराया था। आरोप है कि दुखूराम मुर्मू द्वारा कार्तिक मुर्मू एवं उनके परिवार का वर्षों से सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा था।

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स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि कार्तिक मुर्मू के पिता, बड़े भाई एवं बहन की मृत्यु के बाद उनके शवों को गांव में दफनाने से भी मना कर दिया गया। इसके बाद कार्तिक मुर्मू ने सेंगेल पदाधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद तीनों मृतकों का अंतिम संस्कार सेंगेल अभियान के माध्यम से सम्पन्न कराया गया।
बताया गया कि सेंगेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह समाज सुधारक सालखन मुर्मू के सामाजिक सुधार कार्यक्रमों—जैसे नशापान उन्मूलन, अंधविश्वास के खिलाफ अभियान, जबरन आर्थिक जुर्माना, डायन प्रथा, महिला विरोधी मानसिकता और वोट खरीद-फरोख्त के विरोध—से प्रभावित होकर कार्तिक मुर्मू ने अपने परिवार सहित सेंगेल की सदस्यता ग्रहण की।

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1 मई 2026 को कार्तिक मुर्मू के परिवार ने हांडिया (स्थानीय शराब) का त्याग कर निर्मल जल से श्राद्ध एवं दशर्कम सम्पन्न कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की।
इस आयोजन को सफल बनाने में पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन, डुमुरिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी निलेश कुमार मुर्मू तथा थाना प्रभारी पंचानन तिग्गा का विशेष योगदान रहा, जिनके प्रति सेंगेल संगठन ने आभार व्यक्त किया है।
– रामेश्वर मुर्मू
घाटशिला अनुमंडल सेंगेल अध्यक्ष

कांड्रा के शिव मंदिर में सोलर जलमीनार 6 माह से बंद, श्रद्धालु और स्थानीय लोग परेशान

कांड्रा के शिव मंदिर में सोलर जलमीनार 6 माह से बंद, श्रद्धालु और स्थानीय लोग परेशान

कांड्रा | एसकेजी कॉलोनी स्थित शिव मंदिर प्रांगण में स्थापित सोलर जलमीनार पिछले लगभग छह महीनों से रखरखाव के अभाव और तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है। इसके चलते मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, जलमीनार के बंद रहने से मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान पानी की उपलब्धता नहीं हो पाती, जिससे श्रद्धालुओं को काफी असुविधा होती है। वहीं, भीषण गर्मी के इस मौसम में आसपास के निवासियों को भी पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि सोलर जलमीनार की शीघ्र मरम्मत कर उसे पुनः चालू किया जाए, ताकि मंदिर परिसर में जलापूर्ति बहाल हो सके और लोगों को राहत मिल सके।

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सरायकेला में संकुल स्तरीय भाषा कार्यशाला आयोजित, शिक्षण पद्धतियों पर हुआ मंथन

सरायकेला में संकुल स्तरीय भाषा कार्यशाला आयोजित, शिक्षण पद्धतियों पर हुआ मंथन

सरायकेला |  सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला में रविवार को संकुल स्तरीय एक दिवसीय भाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शिशु मंदिर सरायकेला, सिनि, महालीमुरूप, बड़बंबो और बुरूडीह के हिंदी, अंग्रेजी एवं संस्कृत विषय के आचार्य एवं दीदी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत वंदना से हुई, जिसके उपरांत विद्यालय के प्रधानाचार्य पार्थ सारथी आचार्य ने आगंतुक अतिथियों का परिचय कराया।
विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष रामनाथ आचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा एक आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है और वर्तमान शिक्षण पद्धति बाल-केंद्रित है। उन्होंने कहा कि शिक्षण के दौरान विभिन्न युक्तियों का प्रयोग किया जाता है तथा भाषा और साहित्य में व्याख्या का विशेष महत्व होता है। इस दौरान उन्होंने शिक्षण विधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित मास्टर ट्रेनर सह प्रधानाचार्य तरुण सिंह ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं और बच्चों के भविष्य को आकार देने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि भाषा के बिना शिक्षा की कल्पना संभव नहीं है। बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान करना शिक्षकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस अवसर पर उन्होंने नई शिक्षा नीति की भी जानकारी दी।

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द्वितीय सत्र में सभी आचार्य एवं दीदी ने पंचपदी शिक्षण पद्धति के आधार पर अपने-अपने शिक्षण कार्य का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान अध्यक्ष रामनाथ आचार्य, गुरु चरण महतो एवं प्रसाद महतो ने शिक्षण कार्य का सूक्ष्म निरीक्षण किया।

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चौथे सत्र में प्रस्तुत शिक्षण कार्यों की समीक्षा की गई। इस क्रम में रामनाथ आचार्य ने आचार्य एवं दीदी से विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका संतोषजनक उत्तर दिया गया।
कार्यशाला में शिशु मंदिर सरायकेला, सिनि, महालीमुरूप, बड़बंबो और बुरूडीह के भाषा आचार्य, दीदी एवं प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

राजनगर सीएचसी में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, लापरवाही के आरोप में प्रशासन सख्त, जांच शुरू

राजनगर सीएचसी में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, लापरवाही के आरोप में प्रशासन सख्त, जांच शुरू

राजनगर (सरायकेला-खरसावां) | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), राजनगर में विगत गुरुवार की रात प्रसव के दौरान कथित लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

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उपायुक्त नितीश कुमार सिंह के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने रविवार को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), सरायकेला अभिनव प्रकाश के नेतृत्व में राजनगर सीएचसी पहुंचकर प्रारंभिक जांच की। इस दौरान घटना की पूरी परिस्थितियों की बारीकी से पड़ताल की गई। ड्यूटी पर तैनात नर्सों और जनरेटर ऑपरेटर से एसडीओ ने गहन पूछताछ की। घटना के समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. शिवशंकर कुंकल मौके पर उपस्थित नहीं थे। एसडीओ ने उन्हें तथा प्रसव में शामिल नर्सिंग स्टाफ को तलब कर अलग से पूछताछ करने की बात कही है।

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प्रशासन की प्रारंभिक जांच का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद अस्पताल में उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्थाओं—जैसे सोलर सिस्टम और जनरेटर—का उपयोग क्यों नहीं किया गया। एसडीओ अभिनव प्रकाश ने सोलर सिस्टम, इन्वर्टर और जनरेटर की स्थिति का विस्तृत निरीक्षण किया और संबंधित कर्मियों से जवाब-तलब किया।
पूछताछ के दौरान पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन सोरेन ने बताया कि घटना की रात सोलर बैटरी चार्ज नहीं थी और सोलर सिस्टम के उपयोग के कारण पिछले छह महीनों से जनरेटर (डीजी) का उपयोग नहीं हुआ था, जिससे उसकी स्थिति ठीक नहीं रही।

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इस पर एसडीओ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जनरेटर के रखरखाव और ईंधन पर हुए खर्च की भी विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
एसडीओ ने स्पष्ट किया कि उपायुक्त के निर्देश पर जांच कमेटी का गठन किया गया है और प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद जनरेटर नहीं चलाया गया, जो गंभीर लापरवाही का संकेत है। आगे भी विस्तृत जांच की जाएगी और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर व नर्सों से पूछताछ के बाद जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी जाएगी। दोषी पाए जाने वाले सभी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।