सरायकेला | सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला में रविवार को संकुल स्तरीय एक दिवसीय भाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शिशु मंदिर सरायकेला, सिनि, महालीमुरूप, बड़बंबो और बुरूडीह के हिंदी, अंग्रेजी एवं संस्कृत विषय के आचार्य एवं दीदी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत वंदना से हुई, जिसके उपरांत विद्यालय के प्रधानाचार्य पार्थ सारथी आचार्य ने आगंतुक अतिथियों का परिचय कराया।
विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष रामनाथ आचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा एक आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है और वर्तमान शिक्षण पद्धति बाल-केंद्रित है। उन्होंने कहा कि शिक्षण के दौरान विभिन्न युक्तियों का प्रयोग किया जाता है तथा भाषा और साहित्य में व्याख्या का विशेष महत्व होता है। इस दौरान उन्होंने शिक्षण विधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित मास्टर ट्रेनर सह प्रधानाचार्य तरुण सिंह ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं और बच्चों के भविष्य को आकार देने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि भाषा के बिना शिक्षा की कल्पना संभव नहीं है। बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान करना शिक्षकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस अवसर पर उन्होंने नई शिक्षा नीति की भी जानकारी दी।

द्वितीय सत्र में सभी आचार्य एवं दीदी ने पंचपदी शिक्षण पद्धति के आधार पर अपने-अपने शिक्षण कार्य का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान अध्यक्ष रामनाथ आचार्य, गुरु चरण महतो एवं प्रसाद महतो ने शिक्षण कार्य का सूक्ष्म निरीक्षण किया।

चौथे सत्र में प्रस्तुत शिक्षण कार्यों की समीक्षा की गई। इस क्रम में रामनाथ आचार्य ने आचार्य एवं दीदी से विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका संतोषजनक उत्तर दिया गया।
कार्यशाला में शिशु मंदिर सरायकेला, सिनि, महालीमुरूप, बड़बंबो और बुरूडीह के भाषा आचार्य, दीदी एवं प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

