चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय की बदहाल शैक्षणिक व्यवस्था के खिलाफ छात्र संघ के पदाधिकारियों ने जोरदार छात्र आंदोलन की चेतावनी दी है। सोमवार को प्रेस वार्ता कर छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर विद्यार्थियों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई, तो छात्र संगठन लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।

छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा आदिवासी बहुल अनुसूचित क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण उच्च शिक्षण संस्थान है। इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नियमित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान समय में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद स्थापित कोल्हान विश्वविद्यालय आज विद्यार्थियों के लिए केवल नामांकन और परीक्षा आयोजित करने का केंद्र बनकर रह गया है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं महाविद्यालयों में नियमित कक्षाओं का संचालन नहीं होना चिंताजनक है। वहीं, विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र भी लगभग एक वर्ष पीछे चल रहा है, जिससे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की समस्याओं के समाधान के लिए छात्र संगठनों की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन एवं जिला प्रशासन के साथ वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद बैठक निर्धारित नहीं की गई। उनका कहना है कि वार्ता से बचकर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 18 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय की विभिन्न समस्याओं को लेकर छात्र आंदोलन किया गया था। आंदोलन के लगभग चार महीने बीत जाने के बावजूद कुलपति द्वारा छात्रों के साथ समस्याओं पर गंभीर एवं निर्णायक बैठक नहीं की गई है। इससे विद्यार्थियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से वार्ता और समाधान का रास्ता अपनाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अपेक्षित पहल नहीं हुई। ऐसी स्थिति में अब जोरदार छात्र आंदोलन ही छात्रों के पास बचा एकमात्र लोकतांत्रिक विकल्प है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित आंदोलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय को बंद करना या विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित करना नहीं है। बल्कि आंदोलन के माध्यम से नियमित कक्षाओं का संचालन, समय पर शैक्षणिक सत्र पूरा करना, बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों की समस्याओं का स्थायी समाधान कराना है।

छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं जिला प्रशासन से मांग की कि विद्यार्थियों के साथ तत्काल बैठक आयोजित कर उनकी समस्याओं पर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो छात्र संगठन लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध एवं जोरदार आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय एवं प्रशासन की होगी।
प्रेस वार्ता में पीजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष सनातन पिंगुआ, टाटा कॉलेज के पूर्व सचिव पीपुन बारीक, विकास तमसोय, आशीष गागराई, सौरिश पिंगुआ, कृष्णा हेम्ब्रम, समित कालिंदी, अभिषेक कुंकल, बैजू हेम्ब्रम, अर्जुन गोप सहित अन्य छात्र उपस्थित थे।

