चाईबासा | एमएमडीआर संशोधन को लेकर झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी के बयान पर भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन तिउ ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि झामुमो को एमएमडीआर संशोधन पर राजनीति करने से पहले पश्चिमी सिंहभूम की जनता और आदिवासी समाज को अपने आठ वर्षों के शासन का हिसाब देना चाहिए।

चंद्रमोहन तिउ ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम की खदानों से पिछले वर्षों में रॉयल्टी, डीएमएफटी, जीएसटी, वैट और उत्पाद शुल्क समेत विभिन्न मदों में राज्य सरकार को करोड़ों-अरबों रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके बावजूद जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई गांवों में लोग लाल पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं, कुपोषण, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं।

उन्होंने झामुमो से सवाल किया कि पश्चिमी सिंहभूम की सभी अनुसूचित जनजाति आरक्षित विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक और लोकसभा की आरक्षित सीट से निर्वाचित सांसद यदि सत्ताधारी गठबंधन के साथ हैं, तो आदिवासी समाज को उसका हक क्यों नहीं मिला? आठ वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है?

तिउ ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल आंदोलन करने के लिए छोड़ देना विकास नहीं है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वनभूमि अधिकार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विस्थापन और खनन से होने वाले लाभ में स्थानीय लोगों की वास्तविक भागीदारी कब सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि बालू और लघु खनिजों से भी सरकार को राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन पश्चिमी सिंहभूम की धरती पर उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं देता। जिस जिले की खनिज संपदा राज्य के खजाने को भरती है, उसी जिले के लोग आज भी अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं।

भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष ने झामुमो प्रवक्ता से कहा, “एमएमडीआर संशोधन को लेकर जनता को भ्रमित करने के बजाय झामुमो यह स्पष्ट करे कि आठ वर्षों में पश्चिमी सिंहभूम के आदिवासियों को उनका वास्तविक हक क्यों नहीं मिला और वह हक आखिर कब मिलेगा? सत्ता आपके पास है, सांसद-विधायक आपके साथ हैं, फिर भी आदिवासी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर क्यों हैं?”

