चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार एवं आय के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट बदलाव के तहत जेएसएलपीएस दीदियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए राखी स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रक्षाबंधन पर्व को लेकर इन स्टॉलों पर ग्राहकों, विशेषकर बच्चियों और महिलाओं की भीड़ देखी जा रही है। जिलेभर में लगाए गए राखी स्टॉलों से अब तक करीब 51 हजार रुपये की राखियों की बिक्री हो चुकी है।

जेएसएलपीएस दीदियों द्वारा तैयार की गई राखियों में स्थानीय हस्तकला, आकर्षक डिजाइन और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का विशेष ध्यान रखा गया है। राखियों के साथ पूजा सामग्री और मिठाई को शामिल करते हुए आकर्षक पैकेज भी तैयार किए गए हैं, ताकि लोगों को रक्षाबंधन से संबंधित आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके।

किफायती दरों पर उपलब्ध हैं राखी पैकेज
राखी स्टॉलों पर अलग-अलग जरूरत और बजट के अनुसार तीन प्रकार के पैकेज उपलब्ध कराए गए हैं। पैकेज-1 की कीमत 60 रुपये है, जिसमें दो राखी, कुमकुम और अरवा चावल शामिल हैं। पैकेज-2 की कीमत 120 रुपये है, जिसमें चार राखी, कुमकुम, अरवा चावल और चार लड्डू दिए जा रहे हैं। वहीं पैकेज-3 की कीमत 150 रुपये है, जिसमें पांच राखी, कुमकुम, अरवा चावल, चार लड्डू और गिफ्ट हैंपर शामिल है। किफायती कीमतों के कारण लोग अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार इन पैकेजों की खरीदारी कर रहे हैं।

स्थानीय महिलाओं के उत्पादों को मिल रहा बाजार
इन राखी स्टॉलों के माध्यम से जिले के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को सीधे बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को अपने हुनर का प्रदर्शन करने के साथ-साथ उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। जिला प्रशासन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करना है।

स्थानीय राखी खरीदने की जिला प्रशासन ने की अपील
जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उन्होंने अब तक रक्षाबंधन के लिए राखी की खरीदारी नहीं की है, तो अपने क्षेत्र में लगाए गए जेएसएलपीएस दीदियों के राखी स्टॉल पर पहुंचकर राखी और अन्य उपलब्ध सामग्री की खरीदारी करें। स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की खरीदारी कर लोग न केवल रक्षाबंधन की खुशियों को साझा कर सकते हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों को मजबूती मिलती है। आमजनों की सहभागिता से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए नए बाजार और आजीविका के अवसर सृजित होंगे तथा जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों को और गति मिलेगी।

