सरायकेला | उत्कलमणि आदर्श पाठागार, सरायकेला द्वारा उत्कल दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पाठागार के नाटक भवन में उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गपोबन्धु दास तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने ओड़िया भाषा, संस्कृति एवं परंपरा को संरक्षित और समृद्ध बनाए रखने का संकल्प लिया।

उत्कल दिवस के मौके पर क्लब के सदस्यों ने बारी-बारी से अपने विचार व्यक्त किए और इस गौरवमयी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान ओड़िया शिक्षकों एवं अन्य प्रतिभागियों ने “वंदे उत्कल जननी” और “पथ एबे सरि नाहीं…” जैसे प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत कर माहौल को भावपूर्ण बना दिया।

इसके उपरांत सभी सदस्यों एवं स्थानीय ओड़िया भाषी बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में उत्कलमणि गपोबन्धु दास की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। कार्यक्रम में पाठागार सदस्यों, ओड़िया शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उत्कल दिवस के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर सुशांत महापात्र, सुदीप पटनायक, जलेश कवि, कलहु महापात्र, काशीनाथ कर, कार्तिक परीक्षा, दुखुरम साहू, बद्रीनारायण दरोगा, शिक्षिका रीता रानी नंदा, अर्चना दास, संध्या कर, गीतांजलि महंती, रश्मिता दास, शिक्षक शक्ति पति, रूपम राणा, दुखनू कर, चक्रधर महांती सहित बड़ी संख्या में ओड़िया भाषा-भाषी लोग उपस्थित थे।

