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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रखा विकसित झारखंड का विजन, केंद्र से विशेष सहयोग की मांग

नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रखा विकसित झारखंड का विजन, केंद्र से विशेष सहयोग की मांग

रांची | नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के समग्र विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, सिंचाई, खनन तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में केंद्र सरकार से विशेष सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का स्रोत नहीं, बल्कि विकसित भारत-2047 के निर्माण में एक महत्वपूर्ण साझेदार बनना चाहता है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों के माध्यम से देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, राज्य ने विस्थापन और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खनिज संपदा को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़कर ही वास्तविक और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

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बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन की लंबित 6,000 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित करने तथा उद्योग, खेल, शिक्षा और आधारभूत संरचना के विकास के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
आंगनबाड़ी और शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में संचालित 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से लगभग 15 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है। इसके बावजूद पोषण अभियान और राज्य सरकार की ‘सामार’ योजना के माध्यम से कुपोषण और स्टंटिंग की दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सभी बच्चों को प्रतिदिन एक अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है तथा राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण करा रही है।

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शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से अब विद्यार्थियों का चयन आईआईटी, मेडिकल कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में होने लगा है। उन्होंने केंद्र से पीएम श्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं के बेहतर समन्वय की मांग की।
कौशल विकास और रोजगार पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड में हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत अब तक 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है। वहीं, बिरसा कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के अधिकांश प्रखंडों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों के क्षेत्र में युवाओं को तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

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स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर
स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य में 1,276 दवा दुकानें संचालित की जा रही हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने और नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की। साथ ही राज्य में एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल विकसित करने की योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इससे गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान और उपचार संभव हो सकेगा।
खेल, कृषि और सिंचाई क्षेत्र के लिए भी रखीं मांगें
मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और तीरंदाजी जैसे खेलों में झारखंड की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हॉकी एवं फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना तथा खेल संघों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

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कृषि एवं जल संसाधन के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं। वहीं, बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 1.5 लाख एकड़ क्षेत्र में फलदार पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं और जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की मांग दोहराई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संबोधन की 5 प्रमुख बातें
विकसित झारखंड का विजन: वर्ष 2047 तक झारखंड को खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर मैन्युफैक्चरिंग हब, ग्रीन इकोनॉमी और नॉलेज इकोनॉमी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य।

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शिक्षा और पोषण पर फोकस: 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण, कुपोषण में कमी तथा सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के बेहतर परिणाम।
कौशल विकास और रोजगार: सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण, साथ ही AI, EV और रोबोटिक्स जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष जोर।
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: पंचायत स्तर तक 1,276 दवा दुकानों का संचालन और एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल विकसित करने की पहल।
केंद्र से प्रमुख मांगें: जल जीवन मिशन की 6,000 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान तथा उद्योग, शिक्षा, खेल और आधारभूत संरचना के लिए अधिक केंद्रीय सहयोग की मांग।