चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा संचालित “प्रोजेक्ट परिवर्तन – हुनर से पहचान” के अंतर्गत मंडल कारा चाईबासा में बंदियों के कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में 10 बंदियों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने की पहल की गई।

प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को कंप्यूटर एवं मोबाइल उपकरणों के आधारभूत संचालन, डिजिटल तकनीक के सुरक्षित उपयोग, इंटरनेट सेवाओं तक पहुंच तथा दैनिक जीवन में तकनीक के प्रभावी उपयोग से संबंधित जानकारी प्रदान की गई। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक तथा ओटीपी साझा करने के जोखिमों के प्रति भी उन्हें जागरूक किया गया।

इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल युग का है और समाज के प्रत्येक वर्ग तक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कारा में निरुद्ध बंदियों को सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें भविष्य के लिए सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य किया जाना चाहिए। डिजिटल साक्षरता उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और रिहाई के बाद बेहतर जीवन जीने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी अपर्णा कुमारी ने कहा कि डिजिटल साक्षरता आज की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को तकनीक के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराधों से बचाव की महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है, जिससे वे भविष्य में डिजिटल सेवाओं का बेहतर लाभ उठा सकें।

जिला प्रशासन की यह पहल बंदियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से जोड़ने तथा उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि यह डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम प्रत्येक रविवार को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा, ताकि चरणबद्ध तरीके से सभी बंदियों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाया जा सके।


