चाईबासा में अन्ना अमृता फाउंडेशन के सेंट्रल किचन का उपायुक्त ने किया निरीक्षण, भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने बुधवार को चाईबासा स्थित अन्ना अमृता फाउंडेशन द्वारा संचालित सेंट्रल किचन का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार, अन्ना अमृता फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सेंट्रल किचन में भोजन तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता व्यवस्था, भंडारण प्रणाली तथा विद्यालयों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया।

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उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं फाउंडेशन के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि विद्यालयों में आयोजित होने वाले तिथि भोज कार्यक्रमों में बच्चों के लिए खीर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मिक्स दाल-सब्जी परोसने की व्यवस्था बंद कर बच्चों को अधिक स्वादिष्ट, पौष्टिक और विविधतापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

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भोजन परिवहन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि भोजन वितरण में प्रयुक्त सभी वाहनों में अनिवार्य रूप से जीपीएस ट्रैकर लगाया जाए। इससे वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी और निर्धारित समय पर विद्यालयों तक भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
इस अवसर पर उपायुक्त ने सेंट्रल किचन में कार्यरत कर्मियों से बातचीत कर वेतन भुगतान, उपलब्ध सुविधाओं, कार्य अवधि तथा कार्य परिस्थितियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कर्मियों के कार्यों की सराहना करते हुए उनके सुझावों को भी गंभीरता से सुना।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सेंट्रल किचन परिसर में बनाए रखी गई स्वच्छता एवं साफ-सफाई व्यवस्था की प्रशंसा की और इसे निरंतर बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

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उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान में अन्ना अमृता फाउंडेशन के माध्यम से जिले के चार प्रखंडों के विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं फाउंडेशन प्रबंधन को भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता एवं स्वाद पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर पोषण मिल सके और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति को भी बढ़ावा मिले।

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उन्होंने कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना बच्चों के स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना है। इसलिए भोजन तैयार करने से लेकर उसके वितरण तक प्रत्येक स्तर पर निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

By maskal.news

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