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लंदन में गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महात्मा गांधी को किया नमन

लंदन में गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महात्मा गांधी को किया नमन

रांची : गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने लंदन स्थित पार्लियामेंट स्क्वायर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू के सत्य, अहिंसा और ईमानदारी के आदर्श आज भी हमें उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व, समाज सेवा और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचार और जीवन मूल्य न केवल नागरिकों के लिए मार्गदर्शक हैं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में झारखंड से अध्ययन के लिए आए स्कॉलर्स, प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्य तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस अवसर को यादगार और प्रेरणादायी बताया।

77वें गणतंत्र दिवस पर लंदन में डॉ. अंबेडकर के निवास पर पहुंचे हेमंत सोरेन

77वें गणतंत्र दिवस पर लंदन में डॉ. अंबेडकर के निवास पर पहुंचे हेमंत सोरेन

रांची/लंदन: 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लंदन स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के निवास स्थान पर जाने का अवसर प्राप्त हुआ। इस ऐतिहासिक क्षण को उन्होंने अत्यंत भावुक बताते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर के प्रति नमन करते हुए वे उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिसने भारत जैसे विशाल लोकतंत्र की सशक्त नींव रखी। उन्होंने बाबा साहेब के समावेशी, सशक्त और समानतामूलक समाज के विचारों को आत्मसात करने की बात कही।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान

नई दिल्ली / रांची : भारत सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा करते हुए झारखंड आंदोलन के प्रणेता और वरिष्ठ आदिवासी नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। यह सम्मान उन्हें सार्वजनिक कार्यों तथा लोककल्याण के क्षेत्र में उनके बहुसंख्यक योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा।

डोडा में दर्दनाक हादसा: सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवान बलिदान, 7 घायल

डोडा में दर्दनाक हादसा: सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवान बलिदान, 7 घायल

कश्मीर : जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह उपमंडल में गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। भद्रवाह–चंबा अंतरराज्यीय मार्ग पर खन्नी टॉप के पास सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गया और लगभग 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा।

इस दुर्घटना में 10 जवान बलिदान हो गए, जबकि 7 अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, बुलेटप्रूफ वाहन में कुल 17 जवान सवार थे, जो एक ऊंची सैन्य पोस्ट की ओर जा रहे थे। इसी दौरान चालक के नियंत्रण खो देने से यह हादसा हुआ।

घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन और सेना द्वारा राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया।

ऑक्सफोर्ड में प्रो. अल्पा शाह से संभावित मुलाकात पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल

ऑक्सफोर्ड में प्रो. अल्पा शाह से संभावित मुलाकात पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल

रांची : झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री के 23 जनवरी को ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी यात्रा और वहां प्रोफेसर अल्पा शाह से संभावित मुलाकात को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस प्रस्तावित मुलाकात पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मुख्यमंत्री और उनके सलाहकारों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि प्रोफेसर अल्पा शाह को उनके लेखन और विचारों के कारण वामपंथी विचारधारा से जुड़ा माना जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पा शाह की पुस्तक “Nightmarch: Among India’s Revolutionary Guerrillas” में नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दिखाई गई है और उन्हें ‘क्रांतिकारी’ के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
मरांडी ने यह भी दावा किया कि इस विचारधारा से जुड़े लोग कश्मीर को भारत से अलग करने, जनमत संग्रह की वकालत करने, भारतीय सुरक्षा बलों पर आरोप लगाने तथा समाज में विभाजन फैलाने जैसे विचारों का समर्थन करते रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री का ऐसे व्यक्ति से मुलाकात करना कितना उचित है, जिन पर भारत विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। मरांडी ने इसे झारखंड की जनता और देश के शहीदों के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए मुख्यमंत्री से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।
हालांकि, इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सरायकेला-खरसावां में “Protect Today, Secure Tomorrow” अभियान के तहत पर्यावरणीय विधिक साक्षरता कार्यक्रम आयोजित

सरायकेला-खरसावां में “Protect Today, Secure Tomorrow” अभियान के तहत पर्यावरणीय विधिक साक्षरता कार्यक्रम आयोजित

नालसा : नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सरायकेला-खरसावां रमाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में सोमवार को जिले में “Protect Today, Secure Tomorrow” शीर्षक से पैन-इंडिया पर्यावरणीय विधिक साक्षरता एवं सामुदायिक संरक्षण पहल के तहत जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत जिले के सभी प्रखंडों एवं पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों का उद्देश्य आम लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना था।
इस पहल का मुख्य कार्यक्रम अर्का जैन विश्वविद्यालय, गम्हरिया में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दिलीप कुमार शॉ, मुख्य एलएडीसी सरायकेला-खरसावां एवं विधि संकाय के अधिष्ठाता, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, विधि संकाय के छात्र तथा पैरा लीगल वॉलंटियर्स उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिलीप कुमार शॉ ने NALSA, नई दिल्ली की कॉन्सेप्ट नोट एवं इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय विधिक साक्षरता न केवल वर्तमान समय की आवश्यकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक संरक्षण तभी संभव है जब समाज के प्रत्येक वर्ग को पर्यावरणीय कानूनों और उनके पालन की जानकारी हो।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। छात्रों और पैरा लीगल वॉलंटियर्स की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम को प्रभावी बनाया गया। इस पहल से सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और सहभागिता को बढ़ावा मिला, जिससे भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में समाज अधिक सक्षम होगा।

मनरेगा को कमजोर करने का आरोप, कांग्रेस ने किया विरोध

मनरेगा को कमजोर करने का आरोप, कांग्रेस ने किया विरोध

दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लगभग 20 वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संसद ने सर्वसम्मति से मनरेगा कानून पारित किया था, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों, खासकर गरीब, वंचित और अतिगरीब वर्ग को रोजगार का कानूनी अधिकार मिला।

सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा के कारण ग्रामीणों का पलायन रुका और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया गया। यह योजना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम थी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी मनरेगा गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मनरेगा को लगातार कमजोर करने की कोशिश की है। हाल ही में सरकार द्वारा बिना विचार-विमर्श और विपक्ष को विश्वास में लिए मनरेगा के स्वरूप में बदलाव किया गया है, जिससे इसकी मूल भावना को ठेस पहुंची है। उन्होंने यह भी कहा कि अब रोजगार से जुड़े फैसले जमीनी जरूरतों के बजाय दिल्ली से तय किए जाएंगे।

सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देशहित और जनहित से जुड़ी योजना है। कांग्रेस इसे कमजोर करने के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और किसानों, श्रमिकों व भूमिहीन ग्रामीण गरीबों के हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।

उन्होंने कहा कि जैसे 20 साल पहले गरीबों को रोजगार का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया गया था, वैसे ही आज भी मनरेगा के पक्ष में लड़ाई जारी रहेगी।

झारखंड राजभवन का नाम बदला — अब “लोक भवन झारखंड” के नाम से जाना जाएगा

झारखंड राजभवन का नाम बदला — अब “लोक भवन झारखंड” के नाम से जाना जाएगा

झारखंड के राजभवन का नाम अब बदलकर “लोक भवन झारखंड” कर दिया गया है। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृह मंत्रालय की पहल के तहत देश के सभी राजभवनों को लोक-केंद्रित पहचान दी जा रही है।

इसी क्रम में अब रांची और दुमका के राजभवन को आधिकारिक रूप से लोक भवन नाम दिया गया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव नितीन मदन कुलकर्णी के हस्ताक्षर से बुधवार को आदेश जारी किया गया।

सरकार के अनुसार यह बदलाव राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू हुआ है। नए नाम की घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि नाम बदलने का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सरकार सेवा के लिए है।

प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदला, अब ‘सेवा तीर्थ’ कहलाएगा — राजभवनों को मिला नया नाम ‘लोकभवन’

प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदला, अब ‘सेवा तीर्थ’ कहलाएगा — राजभवनों को मिला नया नाम ‘लोकभवन’

#नई_दिल्ली : केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और देशभर के राजभवनों के नाम बदल दिए हैं। अब PMO को ‘सेवा तीर्थ’ और सभी राजभवनों को ‘लोकभवन’ के नाम से जाना जाएगा।

सेवा की भावना पर जोर


पीएमओ की ओर से कहा गया कि भारत के पब्लिक इंस्टिट्यूशन्स में बड़ा और गहरा बदलाव हो रहा है। शासन का विचार अब सत्ता से सेवा और अथॉरिटी से जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक भी है।

पीएमओ जल्द ही अपने 78 साल पुराने साउथ ब्लॉक ऑफिस से निकलकर नए आधुनिक कैंपस ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने जा रहा है। यह कदम सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है।

पहले भी बदले जा चुके हैं कई सरकारी नाम


इससे पहले केंद्र सरकार ने राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया था। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास का नाम भी 2016 में रेस कोर्स रोड से बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन तंत्र को ऐसी पहचान दी जा रही है, जो कर्तव्य, पारदर्शिता, और जन-सेवा को दर्शाती है। केंद्रीय सचिवालय का नया नाम ‘कर्तव्य भवन’ इसी सोच को प्रतिबिंबित करता है।

राजभवनों के नए नाम


केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के राजभवनों का नाम बदलकर लोकभवन और राज्यपालों/उपराज्यपालों के आवास का नाम लोक निवास कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार ‘राजभवन’ नाम औपनिवेशिक मानसिकता को दिखाता है, इसलिए इसे बदलकर जनता-केंद्रित नाम दिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव भारत की लोकतांत्रिक सोच में आए वैचारिक परिवर्तन का प्रतीक है — अब शासन की भाषा सेवा, कर्तव्य और नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण की तरफ बढ़ रही है।

सीआईएससीई ने जारी की बोर्ड परीक्षा तिथियाँ: 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी से, 12वीं की 12 फरवरी से शुरू

सीआईएससीई ने जारी की बोर्ड परीक्षा तिथियाँ: 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी से, 12वीं की 12 फरवरी से शुरू

नयी दिल्ली : सीआईएससीई की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तिथियाँ घोषित कर दी गई हैं। परिषद के मुख्य कार्यकारी एवं सचिव जोसेफ इमैनुएल ने गुरुवार को बताया कि कक्षा 10 (ICSE) की परीक्षा 17 फरवरी से 30 मार्च तक होगी, जबकि कक्षा 12 (ISC) की परीक्षा 12 फरवरी से 6 अप्रैल तक आयोजित की जाएगी।

इस वर्ष लगभग 2.6 लाख छात्र ICSE और करीब 1.5 लाख छात्र ISC परीक्षा देंगे। इमैनुएल के अनुसार, परीक्षा समय-सारणी को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों को प्रमुख विषयों के बीच पर्याप्त तैयारी का समय मिल सके।

जारी डेटशीट में ICSE के 75 विषयों और ISC के 50 विषयों की पूरी परीक्षा अनुसूची शामिल है।