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गृह मंत्रालय व I4C की चेतावनी: फर्जी लोन ऐप्स से सावधान रहें

गृह मंत्रालय व I4C की चेतावनी: फर्जी लोन ऐप्स से सावधान रहें

अगर आप तुरंत लोन देने वाले मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सोच रहे हैं, तो ज़रा ठहरिए।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि कई तथाकथित “क्विक लोन ऐप” संदिग्ध विदेशी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। ये ऐप्स उपयोगकर्ताओं के डेटा, पैसे और निजी जानकारी के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, ऐसे ऐप्स अत्यधिक ब्याज दर, ब्लैकमेलिंग, कॉन्टैक्ट लिस्ट तक अनधिकृत पहुंच और ऑनलाइन ठगी जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे केवल RBI-नियंत्रित संस्थानों से ही लोन लें और किसी भी संदिग्ध ऐप से दूर रहें।


फर्जी लोन ऐप्स की सूची

  1. Ease Fund
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.moneyassist.borrow.now.tz
  2. Money Dock
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.moneydock.in.app
  3. Credibloan
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.shashwat.credibloan
  4. Rupee Lake-line Credit
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.finance.rupee.lake.app
  5. OakLoan – Personal Loan App
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.planstack.finance
  6. CarePay – Simple Loans & Fast Cash
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.carepay.carecoin.pay
  7. Fund Access
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.more.fund.access.user.app
  8. Bechraji Digital Bahi
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.digital.bahi.app
  9. DiyaCredit
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.cryptoxin.diyac
  10. Rupenex
    लिंक: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rupenex.app

सरकार की सलाह

गृह मंत्रालय और I4C ने नागरिकों को निम्न सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • केवल RBI-पंजीकृत बैंक या NBFC से ही लोन लें।
  • ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रामाणिकता और रिव्यू जांचें।
  • किसी भी ऐप को कॉन्टैक्ट, फोटो या निजी डेटा की अनावश्यक अनुमति न दें।
  • ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या
    www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
UGC के नई नियमावली जारी, मनुवादियों का विरोध; अभियान के स्टूडेंट्स विंग का समर्थन—29 जनवरी को धरना-प्रदर्शन।

UGC के नई नियमावली जारी, मनुवादियों का विरोध; अभियान के स्टूडेंट्स विंग का समर्थन—29 जनवरी को धरना-प्रदर्शन।

चाईबासा। 13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा एक महत्वपूर्ण नियमावली जारी की गई, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के साथ जाति, धर्म, लिंग और क्षेत्र के आधार पर हो रहे अन्याय, उत्पीड़न और भेदभाव को रोकना है। यह नियमावली भारतीय संविधान में निहित समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि इस नियमावली के जारी होते ही तथाकथित कुछ वर्गों द्वारा इसका विरोध किया जाने लगा। यह विरोध केवल एक प्रशासनिक असहमति नहीं है, बल्कि यह मनुवादी, ब्राह्मणवादी और ऊँच-नीच पर आधारित उस रुग्ण मानसिकता को उजागर करता है, जो आज भी बहुजन समाज के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलने से रोकना चाहती है।

इस विरोध का सीधा अर्थ यही निकाला जा सकता है कि हजारों वर्षों से चली आ रही जातिगत वर्चस्व की मानसिकता को आज भी बहुजन समाज के विद्यार्थियों पर थोपा जा रहा है। विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और अन्य पावर सेंटरों से दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को दूर रखने की एक सुनियोजित कोशिश लगातार जारी है।

यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पिछले पाँच वर्षों के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो यह स्पष्ट होता है कि जातीय भेदभाव के मामलों में लगभग 118% की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि हाल के वर्षों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के साथ विश्वविद्यालयों में भेदभाव और उत्पीड़न बढ़ा है, न कि घटा है।

आज भी समाज का एक वर्ग अपनी वर्चस्ववादी सोच के तहत दबे-कुचले समुदायों के लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार करता है। वे नहीं चाहते कि पिछड़े वर्गों के लोग उच्च पदों पर पहुँचें, निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में भाग लें और देश व समाज की सेवा करें। यही कारण है कि देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आज भी प्रतिनिधित्व की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है—

अनुसूचित जनजाति के लगभग 83%,

अनुसूचित जाति के लगभग 64%,

और अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग 80%

असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली पड़े हैं।

ऐसी परिस्थितियों में सामाजिक न्याय और समान अवसर की बात किस आधार पर की जा सकती है? जहाँ दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व नाममात्र का हो, वहाँ वे वर्चस्ववादी समाज के सामने अपनी बात मजबूती से कैसे रख सकते हैं?

विगत वर्षों में अनेक ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ विश्वविद्यालयों में दलित, पिछड़े और आदिवासी विद्यार्थियों को जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर इतना प्रताड़ित किया गया कि कई विद्यार्थियों ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा लिया। यह हमारे शैक्षणिक तंत्र और सामाजिक संवेदनशीलता पर एक गहरा प्रश्नचिह्न है।

ऐसी स्थिति में यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग उत्पीड़न और भेदभाव को रोकने के लिए नियमावली बनाता है, तो उसका विरोध करना वास्तव में अमानवीय व्यवहार को जायज ठहराने जैसा है। सवाल यह है कि वे कौन लोग हैं, जो आज भी जानवरों जैसा व्यवहार इंसानों के साथ करने को सही ठहराना चाहते हैं?

यह नियमावली किसी के अधिकार छीनने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह उन विद्यार्थियों को सुरक्षा और सम्मान देने की कोशिश है, जिन्हें सदियों से वंचित रखा गया है। यदि हमें एक सच्चे लोकतांत्रिक और संवैधानिक गणराज्य का निर्माण करना है, तो ऐसी प्रगतिशील पहलों का समर्थन करना ही होगा—विरोध नहीं।

लंदन में गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महात्मा गांधी को किया नमन

लंदन में गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महात्मा गांधी को किया नमन

रांची : गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने लंदन स्थित पार्लियामेंट स्क्वायर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू के सत्य, अहिंसा और ईमानदारी के आदर्श आज भी हमें उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व, समाज सेवा और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचार और जीवन मूल्य न केवल नागरिकों के लिए मार्गदर्शक हैं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में झारखंड से अध्ययन के लिए आए स्कॉलर्स, प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्य तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस अवसर को यादगार और प्रेरणादायी बताया।

77वें गणतंत्र दिवस पर लंदन में डॉ. अंबेडकर के निवास पर पहुंचे हेमंत सोरेन

77वें गणतंत्र दिवस पर लंदन में डॉ. अंबेडकर के निवास पर पहुंचे हेमंत सोरेन

रांची/लंदन: 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लंदन स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के निवास स्थान पर जाने का अवसर प्राप्त हुआ। इस ऐतिहासिक क्षण को उन्होंने अत्यंत भावुक बताते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर के प्रति नमन करते हुए वे उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिसने भारत जैसे विशाल लोकतंत्र की सशक्त नींव रखी। उन्होंने बाबा साहेब के समावेशी, सशक्त और समानतामूलक समाज के विचारों को आत्मसात करने की बात कही।

दावोस में झारखंड सरकार–टाटा स्टील बैठक, 11,000 करोड़ रुपये निवेश पर सहमति

दावोस में झारखंड सरकार–टाटा स्टील बैठक, 11,000 करोड़ रुपये निवेश पर सहमति

स्विट्ज़रलैंड : विश्व आर्थिक मंच (WEF), दावोस के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने टाटा स्टील के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक की। बैठक में टाटा स्टील ने झारखंड में न्यू-एज ग्रीन स्टील तकनीक के तहत कुल 11,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता दोहराई। इस संबंध में आशय पत्र और सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
प्रस्तावित निवेश में हिरसाना ईज़ी एंड मेल्ट टेक्नोलॉजी के लिए 7,000 करोड़ रुपये, कॉम्बी मिल परियोजना के लिए 1,500 करोड़ रुपये और टिनप्लेट विस्तार परियोजना के लिए 2,600 करोड़ रुपये शामिल हैं। सभी परियोजनाएं पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन स्टील तकनीक पर आधारित होंगी, जिनमें नीदरलैंड और जर्मनी की उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। हिताची ने भी विद्युत, उच्च स्तरीय ग्रिडिंग और उन्नत अवसंरचना में निवेश का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार टिकाऊ औद्योगिक विकास, स्वच्छ तकनीक और स्थानीय रोजगार सृजन को प्राथमिकता दे रही है। यह साझेदारी झारखंड को हरित औद्योगिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ाएगी और राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को मजबूत करेगी।
इस अवसर पर WEF की ओर से मुख्यमंत्री को व्हाइट बैज प्रदान किया गया और सहयोग का औपचारिक पत्र सौंपा गया। यह सहयोग क्रिटिकल मिनरल्स, नई ऊर्जा, जलवायु और जैव-विविधता संरक्षण जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा। झारखंड का विजन 2050, WEF की समावेशी समाज की अवधारणा से मेल खाता है।
स्वीडन ने अर्बन ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में निवेश को लेकर रुचि दिखाई है। इस संबंध में अप्रैल में भारत–स्वीडन राउंड टेबल बैठक आयोजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री की स्वीडन की कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात हुई।
इसके अलावा वर्ल्ड वुमन पॉलिटिकल लीडर्स फोरम के प्रतिनिधियों से मुलाकात में महिला राजनीतिक नेतृत्व के सशक्तिकरण, भारत चैप्टर की स्थापना और गैर-दलीय साझा मंच के गठन पर चर्चा की गई।
बैठक में टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन सहित WEF, स्वीडन इंडिया बिजनेस काउंसिल, हिताची इंडिया और टेक महिंद्रा के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।

90 दिनों में हर स्मार्टफोन पर अनिवार्य Sanchar Saathi: डेटा एक्सेस और सरकारी मॉनिटरिंग को लेकर उठे सवाल

90 दिनों में हर स्मार्टफोन पर अनिवार्य Sanchar Saathi: डेटा एक्सेस और सरकारी मॉनिटरिंग को लेकर उठे सवाल

भारत के दूरसंचार मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मोबाइल फोन निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे सरकार समर्थित साइबर सुरक्षा ऐप ‘Sanchar Saathi’ को अगले 90 दिनों के भीतर सभी नए स्मार्टफोनों में प्री-इंस्टॉल करें। यह ऐप न तो हटाया जा सकेगा और न ही डिसेबल होगा।
यह आदेश रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार जारी किया गया है।

ho language

क्या है Sanchar Saathi?

Sanchar Saathi एक सरकारी साइबर सुरक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, जो वेब, Android और iOS पर उपलब्ध है। यह नागरिकों को टेलीकॉम फ्रॉड से बचाने और मोबाइल से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करता है। इसके मुख्य फीचर्स हैं—

  • संदिग्ध कॉल, SMS और वेबसाइट लिंक की रिपोर्टिंग
  • चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक या ट्रैक करना
  • अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चलते हैं, यह जांचना
  • अंतरराष्ट्रीय कॉल्स जिनके नंबर +91 से शुरू होते हैं, उनकी रिपोर्टिंग (ताकि विदेशी अवैध कॉल सेटअप को पकड़ा जा सके)

सरकार के अनुसार, इस तरह की कॉल आमतौर पर इंटरनेट के जरिए विदेशी लोकेशन से भेजी जाती हैं, ताकि वे भारतीय नंबर जैसी दिखाई दें, और यह फ्रॉड व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।

ऐप के अब तक के प्रभाव

  • कुल इंस्टॉलेशन: 1.14 करोड़ से अधिक
  • सबसे अधिक उपयोग: आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र
  • लॉन्च: मई 2023
  • अब तक ब्लॉक किए गए खोए/चोरी हुए मोबाइल: 42 लाख से अधिक
  • ट्रेस किए गए: 26 लाख
  • सफल रिकवरी: 7,23,638 डिवाइस

कौन-कौन से परमिशन लेता है ऐप?

Google Play Store में सूचीबद्ध ऐप निम्न परमिशन का उपयोग करता है—

  • SMS (पढ़ना/भेजना)
  • कॉल लॉग व फोन स्टेटस
  • फोटो/फाइल्स को पढ़ना और संशोधित करना
  • कैमरा
  • स्टोरेज
  • डिवाइस ID व कॉल जानकारी
  • नेटवर्क कनेक्शन की मॉनिटरिंग
  • स्टार्टअप पर रन करना, वाइब्रेशन नियंत्रित करना

निर्माताओं को क्या करना होगा?

28 नवंबर 2025 को जारी निर्देश के अनुसार—

  • नई डिवाइस में ऐप प्री-लोड करना होगा
  • सप्लाई चेन में मौजूद फोन में OTA अपडेट के जरिए ऐप भेजना होगा
  • ऐप को पहली बार डिवाइस सेटअप करते समय आसानी से दिखना चाहिए
  • इसके फीचर्स को डिसेबल या लिमिट नहीं किया जा सकेगा

सरकार का कहना है कि यह कदम नकली IMEI, स्पूफिंग, चोरी की डिवाइस की बिक्री और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जरूरी है।

रूस के MAX ऐप जैसा कदम?

भारत का यह निर्देश रूस की नीति से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है।
रूस ने 1 सितंबर 2025 से सभी स्मार्ट डिवाइस पर घरेलू मैसेंजर ऐप MAX को अनिवार्य किया था। आलोचकों ने इसे निगरानी का माध्यम बताया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया।

रूस ने Telegram और WhatsApp पर भी सख़्ती बढ़ाई है और कई क्षेत्रों में इनकी 40% तक पहुँच सीमित है। Roskomnadzor का दावा है कि इन ऐप्स का उपयोग आतंकवाद, धोखाधड़ी और अपराध गतिविधियों में बढ़ रहा है।

भारत में इस कदम पर क्या सवाल उठेंगे?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • अनइंस्टॉल न होने वाले सरकारी ऐप व्यक्तिगत गोपनीयता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
  • व्यापक परमिशन के कारण नागरिकों में डेटा सुरक्षा की चिंता बढ़ सकती है।
  • लेकिन सरकार इसे टेलीकॉम सुरक्षा को मजबूत करने और फ्रॉड रोकने के लिए जरूरी बता रही है।
जयराज नगर का नामकरण और ट्रांसफार्मर का उद्घाटन — सांसद जोबा माझी ने किया शुभारंभ

जयराज नगर का नामकरण और ट्रांसफार्मर का उद्घाटन — सांसद जोबा माझी ने किया शुभारंभ

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिला के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत रापचा पंचायत के मौजा पिंड्राबेड़ा में रविवार को जयराज नगर के नामकरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद जोबा माझी शामिल हुईं। उन्होंने नामकरण बोर्ड का फीता काटकर उद्घाटन किया और जयराज नगर में लगाए गए नए ट्रांसफार्मर का भी औपचारिक शुभारंभ किया। उल्लेखनीय है कि सांसद के प्रयासों से क्षेत्र में नया ट्रांसफार्मर और बिजली के पोल स्थापित किए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय निवासियों ने सांसद के समक्ष पक्की सड़क निर्माण, कंपनियों से हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण, तथा अन्य जनसमस्याओं के समाधान की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

सांसद जोबा माझी ने अपने संबोधन में कहा कि जयराज नगर का नामकरण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए अंचल कार्यालय के माध्यम से सरकारी मान्यता प्राप्त करने की दिशा में पहल होनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि बस्ती के विभिन्न हिस्सों में पक्की सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा और अन्य समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

इस दौरान जयराज नगर के लोगों ने सांसद को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में रापचा के पूर्व मुखिया जवाहरलाल महाली, झामुमो के जिला सचिव वैद्यनाथ टुडू, पश्चिम सिंहभूम झामुमो सचिव राहुल आदित्य, समाजसेवी कालीपद सोरेन, जयराज नगर विकास समिति के रामजी सिंहदेव, सुग्रीव मुखी, विजय कुमार, आसीत आचार्य, गोपाल सिंह, अजय लाल, रत्नेश दुबे, विशेश्वर महाली, दिनेश महतो, दीपांकर पटनायक, मुनी पांडेय, कार्तिक महतो, संजीव प्रधान, राजेश महाली, जितेंद्र प्रमाणिक सहित कई लोग उपस्थित रहे।

दुबई एयर शो में तेजस विमान हादसा — लोगों को बचाते हुए विंग कमांडर नमांश स्याल ने दी शहादत

दुबई एयर शो में तेजस विमान हादसा — लोगों को बचाते हुए विंग कमांडर नमांश स्याल ने दी शहादत

दुबई : दुबई एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना का तेजस लड़ाकू विमान एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गया। इस विमान को विंग कमांडर नमांश स्याल उड़ा रहे थे, जिन्होंने हादसे के दौरान एयर शो में मौजूद भीड़ को बचाने के लिए बहादुरी और कर्तव्यपरायणता का परिचय देते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी। भारतीय वायुसेना ने पुष्टि की कि पायलट ने दुर्घटना के अंतिम क्षणों में विमान को भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया, जिसके चलते उन्हें इजेक्ट करने का मौका नहीं मिला और वे वीरगति को प्राप्त हुए। विंग कमांडर स्याल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के निवासी थे।

हिमाचल प्रदेश के सीएम ने जताया शोक

विंग कमांडर स्याल के निधन पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि दुबई एयर शो में तेजस विमान हादसे में कांगड़ा के वीर सपूत नमांश स्याल जी की शहादत अत्यंत हृदयविदारक है। सीएम सुक्खू ने कहा कि देश ने एक बहादुर, कर्तव्यनिष्ठ और साहसी पायलट खो दिया है। उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट करते हुए उनकी अदम्य वीरता और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को नमन किया।

कौन थे विंग कमांडर नमांश स्याल?
34 वर्षीय विंग कमांडर नमांश स्याल नगरोटा के निवासी थे। उन्होंने मिग-21 और सुखोई SU-30MKI जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया था। वर्तमान में वे भारतीय वायुसेना के तीसरे स्क्वॉर्डन में तेजस विमान उड़ा रहे थे।

कैसे हुआ हादसा?
भारतीय वायुसेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पायलट ने एक पॉजिटिव-हाई G टर्न लिया और ऊंचाई पाने के लिए विंग ओवर में रोल किया। इसी दौरान नेगेटिव G पुशओवर के दौरान विमान में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। पायलट ने तुरंत विमान को लेवल करने और भीड़ से दूर खींचने की कोशिश की, लेकिन विमान फ्लैट एटीट्यूड में जमीन से टकरा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि हादसे के अंतिम क्षणों में पायलट की प्राथमिकता नीचे मौजूद लोगों की सुरक्षा थी, जिसके कारण उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं की।

हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी आदेशित कर दी गई है। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के विश्लेषण के बाद ही दुर्घटना की पूरी जानकारी सामने आएगी।

देश एक वीर सपूत की शहादत को सलाम करता है।