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सरायकेला-खरसावाँ में अफीम की अवैध खेती रोकने के लिए प्री-कल्टीवेशन ड्राइव जारी

सरायकेला-खरसावाँ में अफीम की अवैध खेती रोकने के लिए प्री-कल्टीवेशन ड्राइव जारी

सरायकेला : सरायकेला-खरसावाँ पुलिस द्वारा वर्तमान फ़सलीय वर्ष में जिलेभर में अफीम की अवैध खेती की संभावना को समाप्त करने के उद्देश्य से प्री-कल्टीवेशन ड्राइव चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पुलिस विभिन्न माध्यमों से अवैध अफीम खेती की रोकथाम और वैकल्पिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रही है।

पिछले फसलीय वर्ष में जहां-जहां अफीम की खेती की गई थी, उन स्थानों का सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के दौरान पाया गया कि कई किसानों ने अफीम की जगह अन्य फसलों के लिए खेतों की जुताई कर ली है। वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आज, 18-11-25 को चौका थाना प्रभारी बजरंग महतो द्वारा चौका थाना क्षेत्र के सबसे सुदूर गांव मुटुदा में उच्च गुणवत्ता वाले चना, सरसों, गेहूं और मटर के बीज का वितरण किया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग 450 किलोग्राम बीज का वितरण किया गया, जिससे किसान अफीम छोड़कर सब्जियों एवं अनाज की खेती कर सकें। बीज वितरण के दौरान 70 से 80 किसान परिवारों को लाभ दिया गया।

पुलिस ने आमजनों से अपील की है कि वे अफीम की खेती का पूर्ण रूप से बहिष्कार करें और पारंपरिक सब्जियों एवं अनाजों की खेती को बढ़ावा दें।

मझगांव में भाजपा का आत्मनिर्भर भारत संकल्प सम्मेलन, स्वदेशी अपनाने और स्थानीय रोजगार पर जोर

मझगांव में भाजपा का आत्मनिर्भर भारत संकल्प सम्मेलन, स्वदेशी अपनाने और स्थानीय रोजगार पर जोर

मझगांव : आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी मझगांव विधानसभा का सम्मेलन कुमारढूंगी डाक बंगला में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता जे. बी. तुबिद उपस्थित थे। सम्मेलन की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। संचालन मंडल महामंत्री विनय दास ने किया।

जिला संयोजक प्रताप कटियार महतो ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए सबसे पहले प्रत्येक व्यक्ति का आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। इसके लिए स्थानीय और क्षेत्रीय रोजगार व्यवस्था को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार कौशल विकास प्रशिक्षण और स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से युवाओं को रोजगार व स्वावलंबन के अवसर दे रही है। महिलाओं का स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर होना भी सकारात्मक बदलाव है।

प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुवर गागराई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और कई देश भारत के साथ व्यापारिक समझौते कर रहे हैं। पतंजलि और श्री श्री रविशंकर के माध्यम से निर्मित स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ाकर देश को और अधिक स्वावलंबी बनाने की जरूरत है।

मुख्य अतिथि जे. बी. तुबिद ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत गांव-गांव में किसानों, महिलाओं, युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और बिक्री के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में विदेशी वस्तुओं के स्थान पर स्वदेशी उत्पाद अपनाना जरूरी है। रक्षा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत अब आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि निर्यातक देश के रूप में भी उभर रहा है।

कार्यक्रम को युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष चंद्र मोहन तियू और वरिष्ठ कार्यकर्ता वशिष्ठ प्रधान ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में घनश्याम पाटपिंगुवा, बेबी सिंपल, पीतांबर रावत, हरिश्चंद्र केसरी, मरचू बोदरा, खगेश्वर रावत, सुमन प्रधान, महेंद्र हेस्सा, अशोक तुम्बिल, जगदीश नायक, रामदेव पिगुवा, डमरूधर बारिक, अमरजीत कुमार, किरण नायक, सचिन नायक, कांग्रेस माझी, श्याम पिंगुवा, लक्ष्मण पिंगुवा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

हटगम्हारिया में मनरेगा लाभुकों के खातों में गड़बड़ी का आरोप, ठेकेदारों पर धोखाधड़ी की आशंका

हटगम्हारिया में मनरेगा लाभुकों के खातों में गड़बड़ी का आरोप, ठेकेदारों पर धोखाधड़ी की आशंका

पश्चिमी सिंहभूम : हटगम्हारिया प्रखंड के कुशमिता पंचायत के कई गांवों में मनरेगा से जुड़े 4–5 ठेकेदारों पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि ये ठेकेदार किसी एक AESP आईडी (जैसे—एयरटेल पेमेंट बैंक, पोस्ट पेमेंट बैंक, फिनो पेमेंट बैंक आदि) का इस्तेमाल कर जॉब कार्ड धारकों से झूठ बोलकर उनका फिंगरप्रिंट लेते हैं और उनके नाम पर बैंक खाता तथा एटीएम कार्ड बनवा लेते हैं। लाभुकों को न तो खाते की जानकारी दी जाती है और न ही एटीएम कार्ड उपलब्ध कराया जाता है।

मामला तब उजागर हुआ जब मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट पर जांच में यह पाया गया कि कई महिलाओं और बुजुर्गों के खातों में मनरेगा मजदूरी का पैसा जमा हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिनके नाम पर ये खाते खुले हुए हैं, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है। गांव में जब कुछ महिलाओं से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें किसी भी बैंक खाते या भुगतान की जानकारी नहीं दी गई है।
स्थानीय लोगों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

यूसीआईएल बदुंहुडंग माइंस पाँच दिनों से बंद, विस्थापित कमेटी का नए टेंडर पर विरोध

यूसीआईएल बदुंहुडंग माइंस पाँच दिनों से बंद, विस्थापित कमेटी का नए टेंडर पर विरोध

जमशेदपुर : 14 नबंवर शुक्रवार (पूर्वी सिंहभूम)सुंदरनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की बदुंहुडंग ओपेन कस्ट माइंस में नया टेंडर जारी होने के बाद पिछले पाँच दिनों से बदुंहुडंग-केरुवाडुंगरी एंव प्रभावित संयुक्त विस्थापित कमेटी द्वारा ओपन कास्ट माइंस का संचालन ठप कर दिया गया है।

विस्थापित कमेटी ने UCIL प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 में हुआ लिखित समझौता कंपनी द्वारा लागू नहीं किया गया। साथ ही कमेटी का कहना है कि ओपन कास्ट माइंस में प्रबंधन ने UCIL कर्मचारियों की एक अलग कमेटी  बनाकर ठेका कार्य को उन्हीं के माध्यम से चलाना शुरू कर दिया है, जिससे मूल विस्थापित परिवारों को—

स्थायी नौकरी,

ठेकेदारी में काम

तथा मृत्यु परिजन को समय पर नौकरी


जैसी सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं।



15 वर्षों से ठेकेदारी का आरोप :

कमेटी का यह भी आरोप है कि UCIL प्रबंधन और कुछ स्थायी कर्मचारियों की मिलीभगत से एक दल पिछले 15 वर्षों से ठेकेदारी व्यवस्था में काम कर रहा था। लेकिन नए टेंडर चार माह का लागू होते ही स्थिति बदल गई।

सोमवार को विस्तापित परिवार द्वारा ओपन कास्ट माइंस बंद होने की खबर मिलते ही पुराने ठेकेदार मजदूर अपने संगठन अध्यक्ष के साथ आकर नए संयुक्त विस्थापित कमेटी पर धावा बोल दिया।इसी दौरना धरना पर बैठी कई महिला प्रदर्शनकारी पीटकर घायल कर दी गईं।



त्रिपक्षीय वार्ता भी विफल :

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए कंपनी प्रबंधन ने गुरुवार दिनांक 13 नबंवर को दोनों पक्षों को बुलाकर त्रिपक्षीय बैठक की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद भी समाधान नहीं निकल सका।बदुंहुडंग-केरुवाडुंगरी एंव प्रभावित संयुक्त विस्थापित कमेटी ने आरोप लगाया कि प्रबंधन लगातार पुराने दल का ही समर्थन करता रहा।

नई संयुक्त विस्थापित कमेटी ने असहमति जताते हुए
बैठक को छोड़कर वापस धरना स्थल पल लौट आई और अपनी पुरानी माँगों पर अडिग रही।

आज शाम खबर लिखे जाने तक केरुवा डुंगरी के दोनों स्थायी कर्मचारी राधे गोप (कर्मचारी संख्या 20089) और जेना हो (कर्मचारी संख्या 20060) को कंपनी प्रबंधन द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

कंपनी प्रबंधन का आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने स्थानीय ग्रामीणों एवं बदुंहुडंग–केरुवाडुंगरी संयुक्त प्रभावित विस्थापित कमेटी को उकसा कर मांइस बंदी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
वहीं,अब आगे देखना होगा कि दोनों कर्मचारियों ने अपने गांव के हक के लडा़ई आवाज बनने में कंपनी प्रबंधन कितना दोषा करार देकर उनके विरुद क्या करवाई करतें हैं।

ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है—कंपनी समर्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

विस्थापित समिति और स्थानीय ग्रामीणों का सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब कंपनी प्रबंधन के समर्थन में कुछ कर्मचारियों ने जबरन मारपीट कर काम चालू कराया जा रहा था, तो उन पर अब तक पुलिस प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

विस्तापित परिवारों का आरोप है कि :

कंपनी के पक्ष में खड़े कुछ कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर धमकी, धक्का-मुक्की और जबरदस्ती काम शुरू करा रहा था,

परंतु घटना के वीडियो और गवाह मौजूद होने के बावजूद पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया।


नराज विस्तापित परिवारों के लोगों का कहना है कि

> “क्या कानून केवल विस्थापितों और ग्रामीणों के लिए है?
जब मारपीट कंपनी समर्थित कर्मचारियों ने की है, तो उन पर कार्रवाई कौन करेगा?”

इन सवालों के जवाब का इंतजार अब भी बना हुआ है।

ग्रामीणों और विस्थापित कमेटी द्वारा पिछले पाँच दिनों से मांइस बंद कर नए टेंडर का विरोध जारी है।



हमारी माँगे :-

1. बान्दुहूडाँग से विस्थापित हुए विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों को ठेकेदारी में 70% तक बहाली किया जाए।

2. बान्दुहूडाँग परियोजना से विस्थापित हुए मृत्यु केस को अविलंब नियोजन प्रक्रिया पूरी कर स्थायी नौकरी दिया जाए।

3. 2004-05 के बचे सभी विस्थापितो को यूसिल में नियोजन प्रक्रिया पूरी कर स्थायी नौकरी दिया जाए ।

4. 2004 – 05 विस्थापितों के पुनर्वास कर उनका संपूर्ण विकास किया जाए एवं मुआवजा दिया जाए ।

5. ऐसे विस्थापित कर्मी जो यूसिल में नौकरी के दौरान मृत्यु हुई है उनके आश्रित को 90 दिनों के अंदर नौकरी में बहाल किया जाए।

6. ऐसे विस्थापित जो नौकरी के उपरान्त अस्वस्थ्य होने के कारण अथवा नौकरी में लम्बे समय तक अनुपस्थित होने के कारण उन्हें नौकरी से बेदखल कर दिया गया है उनके आश्रितो को अविलम्ब नौकरी प्रदान किया जाए ।

झारखण्ड सरकार ने अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग कार्यक्रम शुरू किया

झारखण्ड सरकार ने अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग कार्यक्रम शुरू किया

झारखंड सरकार ने अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के माध्यम से “झारखंड अनुसूचित जनजाति शिक्षण उत्थान कार्यक्रम” शुरू किया है। इस योजना के तहत राज्य के मेधावी ST छात्रों को JEE और NEET की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी।

परियोजना निदेशक संजय कुमार भगत ने बताया कि यह योजना छात्रों को आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना उच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध कराने और उन्हें डॉक्टर या इंजीनियर बनने के अवसर प्रदान करने के लिए शुरू की गई है।

🟠 मुख्य विशेषताएँ:

300 चयनित छात्रों को रांची के हिंदपीढ़ी मल्टीपर्पस हॉल-कम-ट्रेनिंग सेंटर में आवासीय कोचिंग

विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण

लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग छात्रावास

अध्ययन सामग्री और ई-कॉन्टेंट युक्त टैबलेट

पुस्तकालय और डिजिटल अध्ययन सुविधा

🟠 पात्रता:

विद्यार्थी झारखंड का स्थायी निवासी और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से संबंधित हों

माता-पिता नियमित सरकारी सेवा में न हों

कोई अन्य सरकारी योजना से कोचिंग का लाभ न ले रहे हों

आवश्यक दस्तावेज़: जाति प्रमाणपत्र (ST), अंकतालिका, आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो

🟠 आवेदन प्रक्रिया:

ऑनलाइन: www.jharkhandshikshanutthan.com

ऑफलाइन: विभागीय/जिला कल्याण कार्यालय या ITDA से फॉर्म प्राप्त कर जमा करें

आवेदन की अंतिम तिथि: 19 नवंबर 2025, शाम 5 बजे तक। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 9251664830 पर संपर्क किया जा सकता है।