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झारखंड में सड़क हादसे पर बढ़ी अनुग्रह राशि, अब मृतक के आश्रितों को मिलेंगे 4 लाख रुपए।

झारखंड में सड़क हादसे पर बढ़ी अनुग्रह राशि, अब मृतक के आश्रितों को मिलेंगे 4 लाख रुपए।

रांची | झारखंड सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए अनुग्रह राशि में चार गुना बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren की अध्यक्षता में हुई झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया।
नई व्यवस्था के तहत अब सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के आश्रितों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी, जबकि पहले यह राशि 1 लाख रुपये थी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से प्रभावित परिवारों को आर्थिक रूप से बड़ी मदद मिलेगी।

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बैठक में अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का फैसला किया गया। इसके तहत संबंधित जिले के उपायुक्त (डीसी) द्वारा घटना का सत्यापन किए जाने के बाद ही सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ने और दोहरे भुगतान की संभावना समाप्त होने की उम्मीद जताई गई है।

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इसके अलावा, ‘अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम’ के अंतर्गत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार में कार्यरत क्षमता संवर्धन पदाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारियों की सेवा अवधि को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई।
बैठक में ‘युवा आपदा मित्र योजना’ को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। Dumka, Godda, Pakur और Sahibganj जिलों में संचालित इस योजना के तहत स्वयंसेवकों का डेटाबेस तैयार कर उन्हें इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम से जोड़ने का निर्णय लिया गया।

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मुख्यमंत्री ने योजना के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने तथा स्वयंसेवकों को भत्ता देने का प्रस्ताव लाने के निर्देश भी दिए।
राज्य में डूबने से होने वाली मौतों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ‘संप्रति-48’ योजना के तहत गोताखोरों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि इन पहलों से आपदा प्रबंधन प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी तथा जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सकेगी।

मिडल ईस्ट तनाव का असर: झारखंड में सड़क निर्माण ठप, बिटुमिनस के दाम में भारी उछाल

मिडल ईस्ट तनाव का असर: झारखंड में सड़क निर्माण ठप, बिटुमिनस के दाम में भारी उछाल

जमशेदपुर | पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मिडल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब झारखंड के सड़क निर्माण कार्यों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों से आने वाली बिटुमिनस (अलकतरा) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे इसकी कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
राज्य के कई हिस्सों, विशेषकर जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम जिले में सड़क निर्माण की नई परियोजनाएं लगभग ठप हो गई हैं। बढ़ती लागत के कारण ठेकेदारों ने कार्य जारी रखने में असमर्थता जताई है।

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दामों में भारी उछाल, बजट से बाहर हुआ निर्माण
सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला प्रमुख कच्चा माल बिटुमिनस अब काफी महंगा हो चुका है। कुछ महीने पहले इसकी कीमत 40,000 से 50,000 रुपये प्रति टन के बीच थी, जो अब बढ़कर 61,000 से 1,00,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है।
तकनीकी रूप से, एक किलोमीटर सड़क निर्माण में कुल सामग्री का लगभग 5 से 8 प्रतिशत हिस्सा बिटुमिनस का होता है। हालांकि, मौजूदा कीमतों ने प्रति किलोमीटर लागत को इतना बढ़ा दिया है कि पुराने टेंडर रेट पर काम करना ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
नई परियोजनाओं पर लगा ब्रेक
जमशेदपुर पथ प्रमंडल के कार्यपालक पदाधिकारी दीपक सहाय के अनुसार, फिलहाल मरम्मत कार्य किसी तरह जारी है, लेकिन नई परियोजनाओं की शुरुआत नहीं हो पा रही है। हाल ही में टेंडर प्राप्त करने वाले कई संवेदकों ने कार्य शुरू करने से इनकार कर दिया है।

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ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा बाजार दरों पर कच्चा माल खरीदकर परियोजनाओं को पूरा करना संभव नहीं है। उन्होंने विभाग से कम से कम एक महीने की मोहलत मांगी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति सामान्य हो सके।
NHAI के लक्ष्यों पर भी असर
रांची स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक विजय कुमार ने भी स्थिति को गंभीर बताया है। उनके अनुसार, युद्ध जैसे हालात के चलते लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है।

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विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के कारण मालवाहक जहाजों का किराया और बीमा लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा प्रभाव बिटुमिनस की कीमतों पर पड़ा है।
आगे की स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो झारखंड में सड़क निर्माण की रफ्तार लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है। इसका असर न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर पड़ेगा, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

बकरी पालन प्रशिक्षण का समापन, प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित

बकरी पालन प्रशिक्षण का समापन, प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित

सरायकेला | पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), सरायकेला में आयोजित 12 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन कर प्रशिक्षण प्राप्त सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीएनबी के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक दुबई हेंब्रम एवं शाखा प्रबंधक बिनाई भगत ने प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए। अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि बकरी पालन एक लाभकारी व्यवसाय है,

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जिसके माध्यम से प्रशिक्षु स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इच्छुक प्रशिक्षु बैंक से ऋण प्राप्त कर अपना स्वयं का उद्यम शुरू कर सकते हैं।

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कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्य शैलेन्द्र गोप, गोविन्द रॉय, इंद्रजीत कैबत, द्रौपदी महतो सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सरायकेला-खरसावां में खाद्य सुरक्षा को लेकर सघन जांच, दो दुकानदारों पर जुर्माना

सरायकेला-खरसावां में खाद्य सुरक्षा को लेकर सघन जांच, दो दुकानदारों पर जुर्माना

सरायकेला-खरसावां |  उपायुक्त श्री नीतिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार मंगलवार, 29 अप्रैल 2026 को खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री सुधीर रंजन द्वारा सरायकेला बाजार क्षेत्र में खुदरा एवं थोक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया।

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निरीक्षण के दौरान एक्सपायर्ड एवं बिना लेबल वाले खाद्य पदार्थों की सघन जांच की गई। एक दुकान में एक्सपायर्ड नारियल पानी पाए जाने पर उसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया तथा संबंधित दुकानदार पर ₹2000 का जुर्माना लगाया गया। वहीं, एक अन्य थोक विक्रेता के गोदाम में गंदगी एवं बिना लेबल के खाद्य सामग्री पाए जाने पर ₹2000 का जुर्माना अधिरोपित किया गया।

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जांच अभियान के क्रम में संजय चौक एवं आसपास के क्षेत्रों में गोलगप्पा विक्रेताओं की भी जांच की गई। सभी विक्रेताओं को स्वच्छ पानी के उपयोग, ताजा खाद्य सामग्री बनाए रखने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करने के निर्देश दिए गए और आवश्यक जागरूकता प्रदान की गई।

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खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने सरायकेला बाजार स्थित सभी खुदरा एवं थोक विक्रेताओं, होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों से अपील की है कि वे अज्ञात स्रोत से प्राप्त खाद्य सामग्री तथा एक्सपायर्ड पेय पदार्थ, चिप्स एवं अन्य खाद्य वस्तुओं का विक्रय न करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत मानकों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें फूड लाइसेंस के निलंबन तक की कार्रवाई शामिल है।
जिला प्रशासन द्वारा खाद्य सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आम नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण के मद्देनजर इस प्रकार के सघन जांच अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे।

चाईबासा: प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत शिक्षकों का उन्मुखीकरण, शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर जोर

चाईबासा: प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत शिक्षकों का उन्मुखीकरण, शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हन विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में बुधवार को जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट ‘परख’ के अंतर्गत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

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उपायुक्त ने अपने संबोधन में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को उनके समर्पण के लिए बधाई देते हुए बताया कि जिले ने इस वर्ष राज्य स्तर पर 17वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से आगामी वर्ष में जिला राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षक मिलकर शत-प्रतिशत प्रयास करें, तो सफलता निश्चित है।

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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने विद्यालयों में शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने सभी स्कूलों में नियमित पैरेंट-टीचर मीटिंग आयोजित करने, प्रत्येक माह की 5 तारीख को खेल दिवस मनाने तथा खेल सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को पूरी तरह क्रियाशील रखने, विद्यार्थियों के लेखन कौशल को विकसित करने के लिए प्रतिदिन एक घंटे की राइटिंग क्लास संचालित करने तथा नियमित रूप से होमवर्क देने और उसकी निगरानी करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने समय पर विद्यालय पहुंचने वाले विद्यार्थियों को गुलाब फूल देकर सम्मानित करने की पहल अपनाने का सुझाव भी दिया। प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत साप्ताहिक टेस्ट सीरीज आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

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इसके अतिरिक्त, “बात तो करनी होगी” पहल के अंतर्गत मासिक धर्म, बाल श्रम, बाल विवाह और यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील विषयों पर विद्यार्थियों से खुलकर संवाद करने पर बल दिया गया। सभी विद्यालयों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया। वहीं “बोलेगा चाईबासा” पहल के तहत प्रतिदिन प्रार्थना सभा का संचालन दो विद्यार्थियों द्वारा कराने का निर्देश दिया गया, ताकि उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हो सके।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स का उपायुक्त एवं अन्य अतिथियों ने अवलोकन किया और बच्चों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, चक्रधरपुर के अनुमंडल पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं अन्य संबंधित लोग उपस्थित थे।

सरायकेला में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती, विशेष जांच अभियान में चालकों पर कार्रवाई

सरायकेला में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती, विशेष जांच अभियान में चालकों पर कार्रवाई

सरायकेला |  जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर बुधवार को राजनगर थाना क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो की मौजूदगी में दोपहिया वाहन चालकों की सघन जांच की गई।

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जांच के दौरान बिना हेलमेट वाहन चला रहे चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया गया। खास बात यह रही कि केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर कई चालकों को मौके पर हेलमेट भी उपलब्ध कराए गए और उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया।

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अभियान में पुलिस पदाधिकारियों के साथ-साथ सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान आम लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करते हुए हेलमेट पहनने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और नशे की हालत में वाहन न चलाने की अपील की गई।

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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से ऐसे जांच और जागरूकता अभियान निरंतर चलाए जाएंगे।

खरसावां में महा रक्तदान शिविर का आयोजन, 80 यूनिट रक्त संग्रहित

खरसावां में महा रक्तदान शिविर का आयोजन, 80 यूनिट रक्त संग्रहित

खरसावां | प्रखंड मुख्यालय में बुधवार को प्रखंड प्रशासन एवं “समस्त रक्तवीर खरसावां” के संयुक्त तत्वावधान में एक महा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 80 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी, अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू, खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार, प्रखंड प्रमुख मनेन्द्र जामुदा एवं जिला परिषद सदस्य काली चरण बानरा सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

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इस अवसर पर बीडीओ प्रधान माझी ने कहा कि विज्ञान ने भले ही काफी प्रगति कर ली हो, लेकिन रक्त का निर्माण आज भी मशीन से संभव नहीं है। रक्त केवल मानव शरीर से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान मानवीय संवेदना का सर्वोत्तम उदाहरण है, क्योंकि रक्त किसी जाति, धर्म या मजहब को नहीं देखता, बल्कि केवल जीवन बचाने का कार्य करता है। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित रक्तदान से हार्ट अटैक की संभावना कम होती है, रक्त पतला रहता है और थक्के जमने का खतरा घटता है। साथ ही, इससे वजन भी नियंत्रित रहता है। उन्होंने लोगों से वर्ष में कम से कम दो बार रक्तदान करने की अपील की।

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अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू ने रक्तदान को एक अत्यंत सराहनीय एवं मानवहितकारी कार्य बताते हुए कहा कि इसके लिए खरसावां वासी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छता और सकारात्मक सोच के साथ समाज सेवा में आगे आने का आह्वान किया।
शिविर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रक्तदान किया और रक्तदाताओं के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

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इन लोगों को किया गया सम्मानित
सरायकेला-खरसावां मॉडल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बिनय कुमार सिंह को अब तक 81 बार रक्तदान एवं 79 बार कैंसर पीड़ितों के लिए प्लेटलेट्स डोनेट करने सहित कुल 160 बार रक्त एवं प्लेटलेट्स दान करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा खरसावां के शिक्षाविद् एवं समाजसेवी आलोक दास (36 बार रक्तदान), प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी (31 बार रक्तदान) तथा अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू (12 बार रक्तदान) को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उप प्रमुख ज्योत्सना मंडल, जिला परिषद सदस्य सावित्री बानरा, मुखिया सुनिता तापे, प्रभाकर मंडल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से 7 नाबालिग बच्चियां रेस्क्यू, तस्करी की आशंका

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से 7 नाबालिग बच्चियां रेस्क्यू, तस्करी की आशंका

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में मंगलवार देर रात पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू किया। सभी बच्चियों को सुरक्षित बरामद कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), चाईबासा को सौंप दिया गया है।

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जानकारी के अनुसार, सभी बच्चियां झींकपानी और गोइलकेरा प्रखंड के कुईडा क्षेत्र की रहने वाली हैं। बताया जा रहा है कि वे गुजरात के राजकोट में एक कंपनी में काम करने जा रही थीं। इसी दौरान चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने रात करीब 11 बजे स्टेशन परिसर में छापेमारी कर उन्हें बरामद किया।

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रेस्क्यू के दौरान CWC की प्रतिनिधि पिंकू बोदरा ने अन्य किशोरियों से भी पूछताछ की, जिनमें कुछ बालिग पाई गईं। फिलहाल सभी नाबालिग बच्चियों को संरक्षण में रखा गया है और उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है।

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पुलिस मामले की जांच कर रही है और बच्चियों को बाहर भेजने वाले संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक महीने में यह तीसरा मामला है, जिससे क्षेत्र में मानव तस्करी की आशंका बढ़ गई है।

सरायकेला: नव पदस्थापित एसपी निधि द्विवेदी ने थाना का किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

सरायकेला: नव पदस्थापित एसपी निधि द्विवेदी ने थाना का किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

सरायकेला | जिले की नव पदस्थापित पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने मंगलवार को सरायकेला थाना का औचक निरीक्षण कर कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने थाना प्रभारी विनय कुमार से क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों की स्थिति तथा पुलिस कार्यप्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

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निरीक्षण के क्रम में एसपी ने अनुसूचित जाति-जनजाति थाना, महिला थाना, थाना हाजत, आगंतुक कक्ष एवं बाल मित्र थाना का बारीकी से अवलोकन किया। थाना परिसर में साफ-सफाई एवं व्यवस्थाएं संतोषजनक पाए जाने पर उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए थाना प्रभारी के कार्यों की सराहना की।

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बाल मित्र थाना को और आकर्षक बनाने के निर्देश
बाल मित्र थाना के निरीक्षण के दौरान एसपी ने इसे और अधिक बच्चों के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि परिसर को पूरी तरह चाइल्ड-फ्रेंडली बनाया जाए। इसके तहत फर्श पर मैट बिछाने, दीवारों पर रंगीन पेंटिंग कराने एवं सजावट के माध्यम से बच्चों के लिए सहज और सुरक्षित वातावरण तैयार करने की बात कही।

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निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में एसपी निधि द्विवेदी ने लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को त्वरित न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही अधिकारियों को कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने की हिदायत भी दी।

“नाला दिसुम का जाल”: पलायन, शोषण और शिक्षा व्यवस्था की विफलता पर प्रेम सिंह डिंगिल की कड़ी चेतावनी

“नाला दिसुम का जाल”: पलायन, शोषण और शिक्षा व्यवस्था की विफलता पर प्रेम सिंह डिंगिल की कड़ी चेतावनी

चक्रधरपुर | KNT के शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह डिंगिल ने चक्रधरपुर और आसपास के क्षेत्रों से गए प्रवासी श्रमिकों के साथ हुई घटना को केवल मारपीट का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विफलता का सीधा परिणाम बताया है। उनका कहना है कि जब तक युवाओं को अपने गांव में भविष्य नहीं दिखेगा, तब तक वे “नाला दिसुम” (बाहरी दुनिया) के लालच में फंसते रहेंगे।

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तमिलनाडु के नमक्कल से लौटे श्रमिकों—अनिल समद और मंकी हेस्सा—के बयान बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि कपड़ा मिलों में स्थिति बंधुआ मजदूरी जैसी थी, जहां मजदूरों के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उनकी मजदूरी तक रोक ली गई। कई मामलों में इलाज का खर्च भी मजदूरों से ही वसूला गया और उन्हें परिसर से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं थी।

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सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया कि कई किशोर-किशोरियां अपनी उम्र आधार कार्ड (Aadhaar) में बढ़ाकर इस “पलायन के जाल” में शामिल हो रहे हैं। यह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उन्हें किसी भी तरह की कानूनी सुरक्षा से भी वंचित कर देता है, जिससे वे शोषण के लिए आसान शिकार बन जाते हैं।

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प्रेम सिंह डिंगिल के अनुसार, यह पूरी स्थिति दर्शाती है कि गांवों में शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के अवसरों की कितनी भारी कमी है। “नाला दिसुम” जाना अब मजबूरी के साथ-साथ एक खतरनाक मानसिकता बनती जा रही है।
समाधान की दिशा में जरूरी कदम:
इस गंभीर सामाजिक संकट से निपटने के लिए केवल जांच नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत कदम जरूरी हैं—
पंचायत स्तर पर प्रवासी श्रमिकों का अनिवार्य पंजीकरण
झारखंड और तमिलनाडु सरकार के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित रेस्क्यू सिस्टम
स्थानीय स्तर पर कौशल विकास और रोजगार के अवसर
बिचौलियों (एजेंट्स) की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई
यह मामला सिर्फ कुछ मजदूरों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है—क्या हम अपने युवाओं को उनके ही घर में सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य दे पा रहे हैं?