राँची | झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मुद्दा सामने आया है, जहाँ निजी विद्यालयों द्वारा प्रत्येक वर्ष री-एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से जबरन अवैध वसूली की जा रही है। इस संबंध में एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार द्वारा राँची उपायुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है।

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिले के अधिकांश निजी विद्यालय शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि व्यवसाय बना चुके हैं। हर वर्ष री-एडमिशन के नाम पर भारी-भरकम फीस वसूली जा रही है। जो अभिभावक इस अवैध राशि का भुगतान नहीं कर पाते, उनके बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, उन्हें परीक्षा से वंचित करने, नाम काटने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसी धमकियाँ दी जाती हैं।

यह स्थिति न केवल अमानवीय है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। साथ ही, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत इस प्रकार की अवैध वसूली और शिक्षा में बाधा डालना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि राँची जिला में शिक्षा के नाम पर संगठित लूट चल रही है, जिससे आम जनता आर्थिक और मानसिक रूप से शोषित हो रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की गई हैं, सभी निजी विद्यालयों की तत्काल और व्यापक जांच कराई जाए।री-एडमिशन के नाम पर हो रही अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए। दोषी विद्यालयों के विरुद्ध मान्यता रद्द करने, आर्थिक दंड एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश जारी कर इस प्रकार की वसूली को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए। संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए।
साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि इस मामले में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इस मुद्दे को राज्य सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) एवं न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में देखी जा रही है।

