चाईबासा | एक असहाय और अज्ञात विक्षिप्त वृद्ध व्यक्ति (उम्र लगभग 60–65 वर्ष) की दयनीय स्थिति ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया। मानसिक संतुलन ठीक नहीं होने के कारण वह अपने पैरों पर चलने में भी असमर्थ थे और किसी तरह खुद को घसीटते हुए शहर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर दिन-रात गुजार रहे थे।

परिजनों का कोई पता नहीं होने के कारण वह राहगीरों और स्थानीय लोगों द्वारा दी गई खाद्य सामग्री पर ही निर्भर थे। उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी—शरीर पर जख्म और संक्रमण थे, साथ ही वे अपना दैनिक क्रिया भी सड़क पर ही करने को मजबूर थे। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे एक स्थान पर स्थायी रूप से भी नहीं रह पाते थे।

सदर अस्पताल, चाईबासा में उनका इलाज कर पाना भी संभव नहीं हो पा रहा था, क्योंकि इससे अन्य मरीजों में संक्रमण का खतरा था। साथ ही सड़क पर रहने के कारण विशेषकर रात के समय भारी वाहनों से दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ था।

इस मामले में मानवीय संवेदनाओं के आधार पर संज्ञान लेते हुए पश्चिमी सिंहभूम जिला के कांग्रेस प्रवक्ता सह सामाजिक कार्यकर्ता त्रिशानु राय ने सदर अनुमंडल पदाधिकारी संदीप अनुराग टोपनो को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया और वृद्ध को रिनपास, कांके (रांची) में समुचित इलाज हेतु भेजने का अनुरोध किया।
सदर अनुमंडल पदाधिकारी, चाईबासा द्वारा की गई अनुशंसा के बाद बुधवार सुबह त्रिशानु राय की मौजूदगी में उक्त वृद्ध को बड़ी बाजार स्थित गणेश मंदिर चौक से सदर अस्पताल चाईबासा की एम्बुलेंस के माध्यम से रिनपास, कांके (रांची) भेजा गया। उनके साथ सहिया एवं अस्पताल कर्मियों को भी भेजा गया ताकि रास्ते में उचित देखभाल सुनिश्चित हो सके।
इस पहल के लिए त्रिशानु राय ने जिला प्रशासन, डालसा तथा सदर अस्पताल, चाईबासा प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस दौरान सहिया पार्वती बारी, पीएलवी सूरज कुमार ठाकुर, अस्पताल कर्मी नियाज अहमद, निखिल कारवा, साधु चरण बोदरा, कार्तिक कारवा सहित स्थानीय निवासी मो. शाकिर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

