जमशेदपुर | झारखंड की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर अब पारंपरिक स्टील उत्पादन के साथ-साथ भविष्य के स्वच्छ ईंधन ‘हाइड्रोजन’ के क्षेत्र में भी अपनी वैश्विक पहचान बना रहा है। टाटा मोटर्स के वाणिज्यिक वाहनों में हाइड्रोजन इंजनों की बढ़ती मांग और नए ऑर्डर्स के चलते उत्पादन में तेजी लाई गई है, जिससे शहर ग्रीन टेक्नोलॉजी के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।

टाटा कमिंस प्राइवेट लिमिटेड (TCPL) के ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशंस प्लांट में B 6.7H हाइड्रोजन इंजनों का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल औद्योगिक विकास का उदाहरण है, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूत कर रही है। जर्मनी के बाद जमशेदपुर दुनिया का दूसरा ऐसा केंद्र बन गया है, जहां हाइड्रोजन आधारित आंतरिक दहन इंजन (H2-ICE) का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है।

करीब 354 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस मेगा प्रोजेक्ट को झारखंड सरकार के सहयोग से विकसित किया गया है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस प्लांट की वर्तमान उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 4,000 से अधिक हाइड्रोजन इंजन और 10,000 बैटरी सिस्टम तैयार करने की है।

टाटा मोटर्स के भारी वाहनों में इन इंजनों का सफल परीक्षण किया जा चुका है। इसके बाद अब इनके वाणिज्यिक उत्पादन को विस्तार दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित इंजन पारंपरिक पेट्रोल और डीजल के प्रभावी विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहे हैं और यह तकनीक भारत के ‘नेट जीरो’ लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही, टाटा मोटर्स को मिल रहे बड़े ऑर्डर्स यह संकेत देते हैं कि देश का परिवहन क्षेत्र तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा है। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
जमशेदपुर की यह पहल न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए औद्योगिक और पर्यावरणीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

