चाईबासा | आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया ने 11 मार्च को ग्राम जुगीनन्दा (दुडिरता) पहुंचे। जहाँ हाल ही में जंगली हाथी द्वारा मकान क्षतिग्रस्त करने, अनाज खाने तथा जान-माल के नुकसान की शिकायत मिलने के बाद उन्होंने पीड़ित परिवारों से मिलकर घटनास्थल का जायजा लिया।

पीड़ित निरंजन जेराई ने बताया कि मंगलवार की रात करीब 1:30 बजे जंगली हाथी ने उनके घर की चारदीवारी और बगान का गेट तोड़ दिया। उस समय वे अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ घर में सो रहे थे। हाथी ने घर को नुकसान पहुंचाया और घर में रखा लगभग 50 किलो चावल खा गया। किसी तरह उन्होंने अपने परिवार के साथ जान बचाकर वहां से भागकर सुरक्षित स्थान पर शरण ली। काफी देर तक उत्पात मचाने के बाद हाथी वहां से चला गया।

इसके बाद पास में रहने वाले सुशील जेराई (40 वर्ष), पिता गुरुचरण जेराई के घर को भी हाथी ने निशाना बनाया। सुशील जेराई अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ घर में सो रहे थे। रात करीब 1:40 बजे हाथी की आवाज सुनकर उन्होंने परिवार के साथ पड़ोसी के घर में शरण लेकर किसी तरह रात बिताई। इस दौरान हाथी ने उनके टाली घर के दो कमरों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और घर में रखा धान तथा दो बोरा चावल खाकर बर्बाद कर दिया। इसके अलावा तीन बोरा धान को भी नुकसान पहुंचाया।
मानसिंह तिरिया ने कहा कि घटना के बाद भी वन विभाग के कर्मचारी पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि जंगली हाथी वन विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार उन्हें नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि जगन्नाथपुर, हटगम्हरिया, कुमारडुंगी, मझगांव, टोंटो और झींकपानी क्षेत्रों में लगातार जंगली हाथियों द्वारा मकानों, अनाज और रबी फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई पीड़ित किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल रहा है। इस समस्या को लेकर 23 मार्च 2026 को कोल्हान आयुक्त के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है।
तिरिया ने कहा कि क्षेत्र के किसान सब्जी और बागवानी कर अपनी आजीविका चला रहे हैं, लेकिन जंगली हाथियों के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। कई किसान कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन उचित मुआवजा नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। उन्होंने सरकार से मुआवजा राशि बढ़ाने और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की, ताकि पीड़ित किसानों को समय पर राहत मिल सके।
मौके पर पीड़ित परिवार और ग्रामीण भी उपस्थित थे।

