गणतंत्र दिवस पर आत्ममंथन आवश्यक: अधिकार हैं, लेकिन आमजन आज भी बुनियादी जरूरतों से वंचित:- धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : गणतंत्र दिवस पर देशभर में उत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन यह भी जरूरी है कि हम इस मौके पर आत्ममंथन करें कि क्या हम वास्तव में संविधान की भावना के अनुरूप एक न्यायपूर्ण और समान समाज बना पाए हैं।
एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व लोकसभा व विधानसभा प्रत्याशी धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि संविधान लागू हुए 75 वर्षों बाद भी देश का बड़ा वर्ग आज तक रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों से कोसों दूर है। सवाल यह है कि जब देश गणतंत्र है, तो जनता आज भी क्यों असमानता, भुखमरी, बेरोजगारी, अन्याय और शोषण का शिकार है?
उन्होंने कहा कि संविधान ने हमें समानता का अधिकार दिया, लेकिन सामाजिक और आर्थिक असमानता आज भी जमीनी सच्चाई बनी हुई है। शिक्षा का अधिकार होने के बावजूद करोड़ों बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं। स्वास्थ्य का अधिकार होने के बावजूद गरीब जनता आज भी महंगे इलाज और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था से जूझ रही है। रोजगार के अधिकार की बात होती है, लेकिन युवा वर्ग बेरोजगारी और असुरक्षा की आग में जल रहा है।
धी. रामहरि पेरियार ने यह भी कहा कि आज लोकतंत्र का स्वरूप केवल चुनाव और सत्ता तक सीमित होता जा रहा है, जबकि लोकतंत्र का असली अर्थ है, जनता का सम्मान, उनकी जरूरतों की पूर्ति और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना। जब आम नागरिक अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हो जाए, तो यह गणतंत्र के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह केवल समारोहों तक सीमित न रहे, बल्कि संविधान की आत्मा को जमीन पर उतारे। नीतियां ऐसी हों जो सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि जनता की जिंदगी में बदलाव लाएं। गरीब, आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, किसान, मजदूर और युवा, सभी को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिले, यही सच्चा गणतंत्र होगा।
गणतंत्र दिवस केवल झंडा फहराने का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में एक न्यायपूर्ण, समान और मानवीय समाज की ओर बढ़ रहे हैं? अगर नहीं, तो यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम सवाल उठाएं, संघर्ष करें और संविधान में निहित मूल्यों, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व, को वास्तविक जीवन में स्थापित करें।
असली गणतंत्र तभी होगा जब
संविधान सिर्फ किताब में नहीं,
बल्कि हर नागरिक की थाली, स्कूल, अस्पताल, रोजगार और सम्मान में उतरे।

By maskal.news

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