जल-जंगल-जमीन के संघर्षकर्ता पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या, झारखंड में आक्रोश

जगन्नाथपुर : झारखंड में ग्रामसभा को सशक्त बनाने हेतु पेशा अधिनियम 1996 के प्रभावी नियमावली की मांग और स्थानीय अड़की क्षेत्र अंतर्गत सोना खान के विरोध में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहे पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। इसे राज्य के आदिवासी आंदोलन के लिए एक गंभीर चुनौती माना जा रहा है। इससे पूर्व भी भूमि माफियाओं के विरोध में आवाज उठाने वाले सुभाष मुंडा की हत्या हो चुकी है।
झारखंड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया है कि ‘आबुआ दिशूम, आबुआ राज’ का दावा करने वाली सरकार के कार्यकाल में जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की लगातार हत्याएं हो रही हैं। संगठन ने संथाल परगना में सूर्यनारायण हांसदा की हत्या पर भी राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। मोर्चा का कहना है कि सरकार जल, जंगल और जमीन माफियाओं के दबाव में काम कर रही है।
संयुक्त मोर्चा ने सोमा मुंडा की निर्मम हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर कठोरतम सजा दिलाने की मांग की है। साथ ही मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा एवं एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि सोना खान किसी बड़े उद्योगपति को न देकर ग्रामसभा के माध्यम से संचालित किया जाना चाहिए।
इस हत्याकांड के विरोध में नोवामुंडी चौक पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य सलाहकार सह पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा सहित अशोक पान, अंबिका दास, फिरोज अहमद, राजेंद्र बालमुचू, साहू पुरती, राकेश राऊत, गौतम मिंज, कृष्णा सिंकु, लक्ष्मण बालमुचू, ज्योति तिरिया, हरीश बालमुचू, अंजलि लोंगा, सुमन बारजो एवं गीता बारजो उपस्थित थे।

By maskal.news

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