पश्चिम सिंहभूम में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला उजागर, कृषि भूमि पर फर्जी निर्माण से करोड़ों का मुआवजा निकाला गया

चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर मुआवजा घोटाला, अवैध निर्माण और भू-अर्जन विभाग–दलाल गठजोड़ का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। एंटी करप्शन ऑफ इंडिया झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि पेरियार ने उपायुक्त को विस्तृत शिकायत देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद कई मार्गों—कुदाहतु–उसम्बीर, टोंटो–मंझारी, जोड़ापोखर–झींकपानी—पर रातों-रात एक जैसे डिजाइन के अस्थायी और सेडनुमा घर खड़े कर दिए गए। अधिकांश भूमि अब भी राजस्व रिकॉर्ड में कृषि भूमि के रूप में दर्ज है, फिर भी आवासीय मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

शिकायत में आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण विभाग और भू-अर्जन कार्यालय में 35–40% कमीशन लेकर फर्जी फाइलें पास की जा रही हैं। इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है, बल्कि कई ग्रामीणों की जमीन भी गलत तरीके से प्रभावित हुई है।

पेरियार ने कहा है कि कृषि भूमि पर बिना कन्वर्ज़न और बिना नक्शा स्वीकृति के निर्माण करना अवैध है, फिर भी इन्हीं संरचनाओं का हवाला देकर भारी मुआवजा निकाला जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र संबंधी धाराओं के अंतर्गत गंभीर अपराध है।

उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि अधिसूचना के बाद बने सभी निर्माणों की पहचान कर हटाया जाए, फर्जी मुआवजों को रद्द किया जाए, संलिप्त अधिकारियों–दलालों पर FIR दर्ज हो, और पूरे मामले की जांच सतर्कता ब्यूरो या लोकायुक्त से कराई जाए। साथ ही मुआवजा सूची और भुगतान राशि को जिला वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।

शिकायत के साथ कई स्थानों पर बने सेडनुमा घरों के GPS फोटो भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें शिकायत में घोटाले का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया गया है।

By maskal.news

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