पश्चिमी सिंहभूम : चक्रधरपुर स्थित डुकरी कुकड़ा उड़ा ऐतिहासिक मैदान में द्वितीय किली सामाड वार्षिक जोमसुईम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और खूंटी जिले से बड़ी संख्या में सामाड हगेया (स्वजातीय बंधु) शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत परंपरा के अनुसार दियुरी द्वारा पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर गोहारी (प्रार्थना) के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभिन्न गांवों से आए सामाड हगेया का मंच पर परिचय कराया गया, जिससे आपसी भाईचारा और एकता मजबूत हुई।
इस अवसर पर समाज के प्रबुद्धजनों ने सामाड समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया। विजय सिंह सामाड ने स्वागत भाषण में समाज की एकता और सहयोग को आवश्यक बताया। मंच का संचालन मुचिया सामाड ने किया। मुख्य अतिथि भूपेश सामाड (जज) ने समाज के संवैधानिक अधिकारों और पहचान को बनाए रखने का संदेश दिया। मानकी कृष्ण सामाड, शिक्षक मनोहर सामाड, दियुरी सुरेन्द्र सामाड और पूर्व विधायक शशिभूषण सामाड ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
जोमसुईम के अवसर पर बच्चों से लेकर बड़ों तक ने पारंपरिक नृत्य एवं गीतों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के अध्यक्ष श्रीराम सामाड, सचिव बांगुर सामाड और कोषाध्यक्ष अभय पार्थिक सामाड की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान पूर्व मुखिया सुशीला सामाड सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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