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संविधान कोई औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की आशा, अधिकार और सुरक्षा की नींव है, जिनके लिए यह देश आज भी बराबरी का वादा पूरा नहीं कर पाया है:- धी. रामहरि पेरियार

संविधान कोई औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की आशा, अधिकार और सुरक्षा की नींव है, जिनके लिए यह देश आज भी बराबरी का वादा पूरा नहीं कर पाया है:- धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : आज संविधान दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय और समानता के सवालों पर एंटी करप्शन आफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व प्रत्याशी धी. रामहरि पेरियार ने वर्तमान व्यवस्था पर तीखी और निर्भीक टिप्पणी की।
      धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि संविधान दिवस पर भाषण देने वाले वही लोग हैं, जिनकी नीति और नीयत ने आज भी दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को जकड़कर रखा है। संविधान को मंचों पर सजाने वालों को मैं साफ चेतावनी देता हूँ, यह देश बाबासाहेब का है, मनुवादी सोच का नहीं। जब तक न्याय, बराबरी और सम्मान हर घर तक नहीं पहुँचता, हमारी लड़ाई न रुकेगी, न झुकेगी और न थमेगी।
   उन्होंने कहा कि संविधान कोई औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की आशा, अधिकार और सुरक्षा की नींव है, जिनके लिए यह देश आज भी बराबरी का वादा पूरा नहीं कर पाया है।
     उन्होंने आगे कहा कि आज भी आरक्षण पर सुनियोजित हमला किया जा रहा है। आज भी व्यवस्थागत भेदभाव सामाजिक ढांचे में जिंदा है।
    सत्ता, मीडिया, न्याय और नीतिगत संस्थाओं में वंचित तबकों का प्रतिनिधित्व आज भी न्यूनतम है।
     जाति आधारित हिंसा और भेदभाव के मामलों में न्याय अब भी दूर की चीज बना हुआ है।
   पेरियार ने स्पष्ट कहा कि यह संघर्ष किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय की उस सोच के खिलाफ है जो संविधान के मूल सिद्धांतों को कमजोर करती है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले महीनों में देशभर में एक व्यापक संवैधानिक जागरूकता और अधिकार सुरक्षा अभियान चलाया जाएगा, जिसमें युवाओं, महिलाओं, मजदूरों, किसानों और समाज के वंचित वर्गों को बड़ी संख्या में जोड़ा जाएगा।
    उन्होंने यह भी कहा हम संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं, लेकिन उन ताकतों से समझौता नहीं करेंगे जो बराबरी के अधिकारों को मिटाना चाहती हैं। अगर किसी को समस्या है तो साफ सुन ले, हम आवाज उठाते रहेंगे, चाहे कितनी भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
    अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि संविधान को केवल किताबों में नहीं, जीवन और संघर्ष में जिंदा रखें।