चक्रधरपुर : पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत रामडा स्थित गुड़ाडीह मैदान में महली समाज एकता मंच के तत्वावधान में वनभोज सह मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महली समाज की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान, शिक्षा के प्रति जागरूकता और भावी पीढ़ी को संगठित करना था। कार्यक्रम में कोल्हान क्षेत्र के दर्जनों गांवों से आए हजारों महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्गों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्वागत दल ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर उत्साह का माहौल देखने को मिला।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में यूसीआईएल जादूगोड़ा के डीजीएम श्री मनोरंजन महली उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में टाटा स्टील के श्री रामचन्द्र बेसरा, हेडमास्टर श्री ब्रह्मा बेसरा, फॉरेस्टर श्री बीरेंद्र महली, G2C 2025 में जर्मनी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सुश्री मलोती हेंब्रम, सामाजिक कार्यकर्ता श्री इंदर हेंब्रम तथा मानवाधिकार कार्यकर्ता श्री जवाहरलाल महली शामिल थे। अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया तथा फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
महली समाज एकता मंच के अध्यक्ष श्री गणपति महली ने स्वागत भाषण में कहा कि समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन समाज को संगठित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं श्री जवाहरलाल महली ने समाज को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री इंदर हेंब्रम ने युवाओं से समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में आगे आने की अपील की। हेडमास्टर श्री ब्रह्मा महली ने शिक्षा को समाज की उन्नति का आधार बताते हुए बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि श्री मनोरंजन महली ने महली समाज के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज आने वाले समय में अपनी अलग पहचान और अधिकारों के लिए संगठित प्रयास करेगा।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। समाज की बच्चियों ने गीतों के माध्यम से शिक्षा, एकता और समाज सुधार का संदेश दिया। साथ ही मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर झामुमो महासचिव श्री बहादुर महली द्वारा नृत्य मंडली एवं सांस्कृतिक दलों को पारंपरिक साड़ी भेंट कर सम्मानित किया गया।
हजारों ग्रामीणों की सहभागिता वाले इस आयोजन को समाज की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और शिक्षा के प्रति जागरूकता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को नई दिशा और मजबूत पहचान देने में सहायक सिद्ध होते हैं।

