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आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

भवन तैयार, बजट खर्च… फिर भी कॉलेज बंद

जगन्नाथपुर : जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत बुकासाई में आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के रूप में विकसित की जा रही महत्वाकांक्षी योजना कागजों में तो तेज रफ्तार से आगे बढ़ती दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। छात्रावास बनकर तैयार हैं, कॉलेज भवन खड़े हैं, सरकारी धन खर्च हो चुका है, इसके बावजूद आज तक कॉलेज का सुचारु संचालन शुरू नहीं हो पाया, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल उद्घाटन, निरीक्षण और आश्वासन का खेल चल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर जनता को सिर्फ सपने दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविक लाभ शून्य है।


        पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र, फिर भी विकास ठप यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहाँ से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा का पैतृक प्रखंड जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद यदि क्षेत्र में इतनी महत्वपूर्ण शैक्षणिक और स्वास्थ्य परियोजना वर्षों तक ठप पड़ी है, तो यह साफ तौर पर शासन–प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
       स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि जब प्रभावशाली राजनीतिक पहचान के बावजूद योजनाएँ धरातल पर नहीं उतर पा रहीं, तो आम क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
योजना नहीं, परिणाम चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि
सिर्फ योजना बना देना, शिलान्यास कर देना या औपचारिक निरीक्षण कर लेना विकास नहीं होता। विकास तब कहलाता है जब योजना तय समय-सीमा में पूरी हो, नियमित निगरानी हो और जनता को वास्तविक लाभ मिले।
     बुकासाई आयुर्वेदिक कॉलेज की वर्तमान स्थिति इस बात का उदाहरण बन चुकी है कि किस प्रकार योजनाओं को जानबूझकर लटकाकर लूट का बाजार खड़ा कर दिया जाता है।


निरीक्षण में भी खुली पोल
निरीक्षण के दौरान कॉलेज का सत्यापन एवं परीक्षण किया गया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि संसाधन उपलब्ध हैं, भवन पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी न पढ़ाई शुरू है और न ही अस्पताल की कोई सेवा। यह स्थिति या तो घोर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, या फिर यह संदेह को जन्म देती है कि कहीं भ्रष्टाचार के कारण तो इस योजना को ठंडे बस्ते में नहीं डाला गया।
      जवाबदेही तय करने की मांग
इस मामले को लेकर एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस सिस्टम को सुधारना केवल जरूरत नहीं, हमारा कर्तव्य है। अब सवालों से कोई नहीं बच सकता।


उन्होंने स्पष्ट रूप से सवाल उठाए
कॉलेज संचालन में देरी के लिए ज़िम्मेदार कौन है? तय समय-सीमा का उल्लंघन क्यों किया गया?
आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल आम जनता के लिए कब खोले जाएंगे? जनता को आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए, स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे झूठे आश्वासनों से थक चुके हैं। यदि शीघ्र ही कॉलेज और अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हुआ, तो यह मुद्दा व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
   अंत में एक ही सवाल गूंज रहा है,
विकास आखिर कब कागजों से निकलकर जमीन पर आएगा?
क्योंकि विकास कोई एहसान नहीं, जनता का अधिकार है।