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पश्चिमी सिंहभूम में हाथी का आतंक, 16 लोगों की मौत

पश्चिमी सिंहभूम में हाथी का आतंक, 16 लोगों की मौत

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा, टोंटो, गोइलकेरा, नोवामुंडी, हाटगम्हरिया, मझगांव और कुमारडुंगी प्रखंडों में बीते एक सप्ताह से एक नर हाथी द्वारा लगातार जनहानि की घटनाएं सामने आ रही हैं। अब तक हाथी के हमले में 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिससे पूरे इलाके में भय और दहशत का माहौल है।

फिलहाल हाथी की मौजूदगी हाटगम्हरिया क्षेत्र में बताई जा रही है और उसके मझगांव व कुमारडुंगी की ओर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

इस गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता एवं चाईबासा नगर आईटी सेल संयोजक दुवारिका शर्मा ने झारखंड सरकार और वन विभाग से मामले को आपात स्थिति मानते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर 24×7 निगरानी, ड्रोन व ट्रैकिंग सिस्टम के उपयोग तथा प्रशिक्षित ट्रेंक्विलाइजेशन टीम की तैनाती की मांग की।

उन्होंने मृतकों के परिजनों को तुरंत सम्मानजनक मुआवजा, घायलों को निशुल्क इलाज और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थायी अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दुवारिका शर्मा ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात में घर से बाहर न निकलें, सुबह अंधेरे में शौच के लिए बाहर न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

पश्चिम सिंहभूम में हाथी हमलों पर वन विभाग सतर्क, सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम

पश्चिम सिंहभूम में हाथी हमलों पर वन विभाग सतर्क, सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम

चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले में लगातार हो रहे हाथियों के हमलों को देखते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जिलेवासियों की सुरक्षा के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं। विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी के निर्देश पर चाईबासा और कोल्हान डिवीजन में व्यापक निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।

जानकारी के अनुसार आरसीसीएफ जमशेदपुर, सीएफ चाईबासा सहित सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी जिला मुख्यालय में कैंप कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। गठित टीमों के माध्यम से प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है। लोगों को सतर्क करने के लिए सार्वजनिक घोषणाएं की जा रही हैं, साथ ही टॉर्च और पटाखों का वितरण भी किया गया है।

हाथियों की गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की तैनाती की गई है। 4 जनवरी से बंगाल से आई विशेषज्ञों की टीम हाथियों को मानव बस्तियों से दूर रखने और नुकसान को कम करने का कार्य कर रही है।

समस्या उत्पन्न कर रहे हाथी को बेहोश कर अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए 6 जनवरी 2026 को वंतारा से औपचारिक बातचीत शुरू की गई। वहीं 7 जनवरी 2026 को वाइल्डलाइफ SOS और मोबाइल वेटरनरी यूनिट, क्योंझर (ओडिशा) से चर्चा के बाद MVU क्योंझर (WTI) की टीम चाईबासा पहुंची।

इसके अलावा CCF वाइल्डलाइफ की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जो मौके पर कैंप कर आवश्यक कार्रवाई करेगी। प्रभावित क्षेत्रों में थर्मल ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। नियमानुसार पीड़ितों को अनुग्रह राशि और मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है।

हाथी हमलों में घायल लोगों का अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है। PCCF वाइल्डलाइफ स्वयं चाईबासा का दौरा कर रहे हैं, जबकि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII), देहरादून से भी विशेषज्ञों को बुलाया गया है।

वन विभाग ने आम लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।