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पश्चिमी सिंहभूम में कृषि व पशुपालन योजनाओं को सशक्त बनाने पर जोर, उपायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक

पश्चिमी सिंहभूम में कृषि व पशुपालन योजनाओं को सशक्त बनाने पर जोर, उपायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में शुक्रवार को जिला दंडाधिकारी–सह–उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, भूमि संरक्षण एवं गव्य विकास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आय और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

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बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, अपर उपायुक्त प्रवीण केरकट्टा सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं डीएमएफटी पीएमयू के प्रतिनिधि उपस्थित थे। उपायुक्त ने विभागवार योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए जमीनी स्तर पर उपलब्ध संरचनाओं और समूहों को सशक्त बनाने के निर्देश दिए।
कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपायुक्त ने जिले के सभी 18 प्रखंडों में स्वयं सहायता समूह या किसान उत्पादक समूह के माध्यम से कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का निर्देश दिया। भूमि संरक्षण विभाग को संबंधित समूहों और उपलब्ध कृषि यंत्रों की सूची एवं प्राक्कलन तैयार करने को कहा गया।

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सब्जी उत्पादन बढ़ाने और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज एवं पौधे उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्रानुसार हाईटेक पॉलीहाउस नर्सरी संचालन हेतु तीन एकड़ भूमि चिन्हित कर प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में हॉर्टिकल्चर क्लस्टर डेवलपमेंट के तहत नारंगी, केला, कटहल एवं सरीफा जैसे फलों के उत्पादन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। संबंधित विभागों को डीएमएफटी पीएमयू के सहयोग से उत्पादन क्षमता और बाजार संभावनाओं का भौतिक सत्यापन कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया।
इसके अलावा लिफ्ट इरीगेशन के माध्यम से सालभर खेती को प्रोत्साहित करने, नोआमुंडी हाट बाजार के विकास तथा राज्य योजना के तहत 15 किसानों को मोती उत्पादन से जोड़ने की जानकारी दी गई।

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मत्स्य प्रक्षेत्र में आय वृद्धि के लिए मत्स्य बीज, फिश फीड, हैचरी एवं केज कल्चर के माध्यम से 100 नए परिवारों को मछली पालन से जोड़ने का निर्देश दिया गया। पशुपालन एवं गव्य विकास के तहत दुग्ध उत्पादक समितियों के गठन, पशु चारा उत्पादन को बढ़ावा देने तथा चाईबासा स्थित कुक्कुट पालन केंद्र के संचालन हेतु प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
सहकारिता विभाग को वित्तीय वर्ष 2023-24 से पूर्व एवं अब तक स्वीकृत कोल्ड स्टोरेज की सूची और उनकी वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया।
उपायुक्त ने कहा कि इन सभी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करना और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है।