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सात साल हो गए, हर बरसी पर फोटो, फूल और भाषण मिल जाते हैं, लेकिन देश अब आँसू नहीं, सच और जवाबदेही मांगता है:- धी. रामहरि पेरियार

सात साल हो गए, हर बरसी पर फोटो, फूल और भाषण मिल जाते हैं, लेकिन देश अब आँसू नहीं, सच और जवाबदेही मांगता है:- धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व लोकसभा/विधानसभा प्रत्याशी रहे धी. रामहरि पेरियार ने तीखे शब्दों में कहा कि शहादत का सम्मान केवल पुष्प अर्पित करने से नहीं, बल्कि सत्य को सामने लाने से होता है। सात वर्षों तक यदि तथ्य और जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं हो पाए, तो यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं बल्कि जवाबदेही से बचने का संकेत प्रतीत होता है।

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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती भावनात्मक नारों से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही से होती है। यदि जांच पूरी हो चुकी है तो संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? आखिर देश को सच जानने से क्यों रोका जा रहा है? सवाल पूछना किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, इसे राष्ट्रविरोध नहीं कहा जा सकता।

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धी. पेरियार ने कहा कि शहादत को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना देश की भावनाओं के साथ अन्याय है। देश उन वीर सपूतों के परिवारों के प्रति जवाबदेह है जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनकी कुर्बानी का सच्चा सम्मान तभी होगा जब पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों की जिम्मेदारी तय हो।

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उन्होंने स्पष्ट मांग की कि केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर, इन गंभीर और बुनियादी सवालों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाए। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका केवल भावनाएं दिखाने की नहीं, बल्कि सच को उजागर करने की भी है।
अंत में धी. पेरियार ने कहा कि अब समय आ गया है कि चुप्पी टूटे, सत्य सामने आए और देश को स्पष्ट उत्तर मिले। सात वर्षों की प्रतीक्षा पर्याप्त है, अब पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।