चाईबासा (सेरेंगसिया) : देशाउलि फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार, 1 फरवरी 2026 को एक दिवसीय कार्यक्रम “मंथन – आपके विचारों का मंच” (पुनर्मिलन समारोह) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं संस्थाओं से जुड़े बुद्धिजीवी, पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्यगण उपस्थित रहे।
पुनर्मिलन समारोह के दौरान प्रतिभागियों ने अपना परिचय देते हुए अपनी वर्तमान सामाजिक स्थिति और परिस्थितियों की जानकारी साझा की। इसके पश्चात सामाजिक विषयों पर आत्मचिंतन एवं मंथन करते हुए सामाजिक समस्याओं, उनके समाधान तथा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
समारोह में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि कोल्हान क्षेत्र के देशाउलि-जयरा एवं अन्य पवित्र दैवीय स्थलों को सुदृढ़ करने के लिए पहले अपने-अपने गांव के दिउरि से संपर्क स्थापित किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं का स्थायी समाधान आदिवासी जीवनशैली में निहित है, जिसे व्यापक स्तर पर जागरूकता के माध्यम से धरातल पर उतारने की आवश्यकता है।
अंत में चार मुख्य बिंदुओं को केंद्र में रखकर निष्कर्ष हेतु विचार-विमर्श किया गया और सामाजिक परिवर्तन के लिए सामूहिक पहल करने का निर्णय लिया गया।
इस कार्यक्रम में झारखंड एवं उड़ीसा के विभिन्न सामाजिक संगठनों में से कोल्हान के मानकी मुण्डा संघ के उपाध्यक्ष काली चरण बिरूआ, मानकी यमुना किशोर बिरूवा, आयुब स्कूल संस्थापक प्रधान बिरूवा, आराध्या सिंकु, गुरु चरण सिंकु, जीवन सिंह लागुरी, ज्यला कोड़ा, डेनिस तिरिया, दुनाराम हेस्सा, दीपक तुबिड, निक्कु कुदादा, पंकज बांकिरा, प्रकाश पुरती, प्रेम सागर देवगम, बेस बुड़ीउली, मदन सिंह, मनोहर कुदादा, राहुल कारवा, राम देव बोयपाई, रमेश बिरूली, रमेश सिंकु, राजेश सिंकु, विपिन हेंब्रम, मुण्डा शत्रुघ्न कुंकल, दिउरि श्याम चरण लागुरी, शिवानी सिंह तिरिया, समियल लागुरी, समीर हेंब्रम, सोनाली हेम्बरोम, सोनू हेस्सा, संजीव बोदरा, सुखमोहन अंगरिया, सुमित सिंह कंडाईत, सुरेश सावैंयां, सुशीला बोदरा, सिदम हेंब्रम, हीरामनी देवगम, अजय सिंकु, आराध्या सिंकु एवं अन्य सामाजिक शुभचिंतकों ने “मंथन – आपके विचारों का मंच” (पुनर्मिलन समारोह) में हिस्सा लिया।
आयोजन को सफल बनाने में देशाउलि फाउंडेशन से जुड़े मनोज बिरूवा, लादू देवगम, मनोज हेंब्रम, रविन्द्र गिलुआ, निर्मल सिंकु, सपना हो तथा अंतर्राष्ट्रीय फोटोजर्नलिस्ट आशिष बिरूली का विशेष योगदान रहा।
02
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