पश्चिमी_सिंहभूम : चाईबासा में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने ‘नो एंट्री’ लागू करने की मांग सरकार से की थी, लेकिन यह मांग अब गंभीर विवाद में बदल गई है। आरोप है कि सड़क सुरक्षा के मुद्दे को उठाने के बाद पुलिस ने आधी रात में कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया तथा उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल भेज दिया। जानकारी के अनुसार अब तक लगभग डेढ़ दर्जन लोग जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि 75 नामजद और 500 अज्ञात लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
इस कार्रवाई का सबसे दर्दनाक प्रभाव उन परिवारों पर पड़ा है जिनके माता-पिता जेल में बंद हैं। कुछ ऐसे बच्चे सामने आए हैं जिनके पिता महाराष्ट्र में मजदूरी करते हैं और मां पिछले महीने से जेल में बंद हैं। इन बच्चों को माता-पिता के जीवित होने के बावजूद पड़ोसियों के सहारे “अनाथों” की तरह जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है। उनके चेहरों पर मायूसी और आंखों में दर्द साफ झलक रहा है।
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर आवाज उठाई गई है। फेसबुक पोस्ट के माध्यम से चंपाई सोरेन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा की मांग करना अपराध नहीं, बल्कि नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसके बदले लोगों को दमनकारी कार्रवाई झेलनी पड़ी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड में आदिवासियों पर अत्याचार, जमीन कब्जाने के प्रयास और जन आंदोलनों को कुचलने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि वीर शहीदों के वंशजों तक को सम्मान नहीं दिया जा रहा और सत्ता के नशे में कुछ लोग इन परिवारों को पीड़ा पहुंचा रहे हैं।
सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से सवाल किया है कि सड़क सुरक्षा की मांग करने वालों को अपराधी क्यों माना जा रहा है और इन बेसहारा बच्चों की जिम्मेदारी कौन लेगा? इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
19
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