चाईबासा : चाईबासा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हाल के दिनों में घटित आपराधिक घटनाएँ केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं। इन घटनाओं ने सामाजिक ताने-बाने, नैतिक मूल्यों और सामुदायिक जिम्मेदारी पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

राँची, ईचागढ़ लोकसभा, विधानसभा प्रत्याशी रहे पूर्व प्रत्याशी धी० रामहरि पेरियार ने कहा कि केवल अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेज देना पर्याप्त समाधान नहीं है। जेल सजा का माध्यम है, लेकिन स्थायी सामाजिक सुधार का उपाय नहीं। यदि अपराध की जड़ पर प्रहार नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएँ रुकने वाली नहीं हैं। अपराध का पिरामिड मॉडल समझना होगा

धी० रामहरि पेरियार ने अपराध की समस्या को पिरामिड मॉडल से समझाते हुए कहा नींव: नशा, अशिक्षा, बेरोजगारी, नैतिक पतन और सामाजिक असमानता।

मध्य भाग: परिवार और समाज की चुप्पी, डर, उदासीनता और समझौता। चोटी: अपराध, हिंसा और महिलाओं एवं कमजोर वर्गों के खिलाफ अत्याचार। जब तक पिरामिड की नींव मजबूत और स्वस्थ नहीं होगी, तब तक अपराध की चोटी गिरकर बार-बार खड़ी होती रहेगी।
समाज को क्या करना होगा?
धी० रामहरि पेरियार ने स्पष्ट किया कि समाधान केवल प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी से निकलेगा। उन्होंने निम्न कदमों की जनता से अपील की ग्राम सभा एवं मोहल्ला बैठकें: महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी पर खुली चर्चा हो।
युवा निगरानी समिति का गठन:
गांव स्तर पर जिम्मेदार युवाओं की टीम बने जो नशाखोरी, छेड़छाड़ और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे तथा प्रशासन को सूचित करे।
स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम:
लैंगिक शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों और दंडात्मक कानूनों की जानकारी दी जाए, ताकि नई पीढ़ी सही दिशा में आगे बढ़े। नशा मुक्ति अभियान:
कई अपराधों की जड़ नशा है। इसे सामाजिक आंदोलन बनाकर जड़ से समाप्त करने की आवश्यकता है।
तेज न्याय प्रक्रिया और सामाजिक बहिष्कार: दोषियों को त्वरित न्याय मिले और समाज भी स्पष्ट संदेश दे कि ऐसे कृत्य अस्वीकार्य हैं। सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि समाज के बुद्धिजीवी, शिक्षक, पूर्व सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता और पंचायत प्रतिनिधि यदि आगे नहीं आएँगे तो केवल पुलिस-प्रशासन के भरोसे बदलाव अधूरा रहेगा।
धी० रामहरि पेरियार ने कड़े शब्दों में कहा अपराधी पैदा नहीं होते, समाज की चुप्पी उन्हें बढ़ाती है। अगर समाज चुप रहेगा, तो अपराध मजबूत होगा; यदि समाज खड़ा होगा, तो अपराध स्वतः कमजोर पड़ेगा।
अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे भय और चुप्पी की संस्कृति को त्यागकर जागरूक, संगठित और जिम्मेदार समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ। यही स्थायी समाधान का मार्ग है।

