आदिवासी_समाज

सिलायडीह में 13 वर्ष बाद आदिवासी परिवार की सरना धर्म में घर वापसी

सिलायडीह में 13 वर्ष बाद आदिवासी परिवार की सरना धर्म में घर वापसी

कुचाई : सिलायडीह गांव में रविवार को एक आदिवासी परिवार ने 13 साल बाद ईसाई धर्म छोड़कर पुनः सरना धर्म स्वीकार किया। राम मुंडा, उनकी पत्नी मंजू मुंडा और उनके तीन बच्चे—जरासन, सुनील और मेनका मुंडा—ने बोंगा–बुरू पूजा पद्धति के अनुसार शुद्धिकरण कर अपने मूल धर्म में वापसी की। शुद्धिकरण समारोह सरना धर्म गुरू शिवचरण मुंडा, वनमाली मुंडा और डोमन मुंडा द्वारा संपन्न की गई।।

मंजू मुंडा ने बताया कि 13 वर्ष पहले बच्चों की लगातार खराब तबीयत और जानकारी के अभाव में उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया था। वहीं जरासन मुंडा ने कहा कि उस समय मार्गदर्शन की कमी के कारण वे गलत दिशा में चले गए थे, लेकिन अब शिक्षा और समझ बढ़ने के साथ वे अपने मूल धर्म में लौट आए हैं। परिवार की बेटी मेनका ने समाज से अपील की कि धर्म परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय सही जानकारी और समझ के आधार पर ही लें।

कार्यक्रम में समाजसेवी और जनप्रतिनिधि संदीप मुंडा, चमर सिंह मुंडा, मुखिया मंगल सिंह मुंडा, रविन्द्र मुंडा, रामचन्द्र सिंह मुंडा, जगन्नाथ सिंह मुंडा, केपी सेट सोय, मेघनाथ सिंह मुंडा, गुरूवा मुंडा, श्रवण सरदार, ग्राम मुंडा गणेश राम मुंडा, भूषण मुंडा, दीना मुंडा, कुशल मुंडा, जिला परिषद सदस्य जिंगी हेम्ब्रम, शम्भू सिंह मुंडा, तुलसी मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

ग्रामीणों का मानना है कि परिवार की यह घर वापसी समुदाय में सांस्कृतिक जागरूकता और अपनी परंपराओं की ओर लौटने का महत्वपूर्ण संदेश देती है।