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अबुआ सरकार बजट घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई पर सवाल उठाए:- धी रामहरि पेरियार

अबुआ सरकार बजट घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई पर सवाल उठाए:- धी रामहरि पेरियार

चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व प्रत्याशी धी. रामहरि पेरियार ने झारखंड में प्रस्तुत आम बजट पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि राज्य का बजट भाषणों और कागजों में भले ही विकास का बड़ा खाका पेश करता हो, लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी सच्चाई बिल्कुल अलग नजर आती है।

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उन्होंने कहा कि गांवों में आज भी सड़कें टूटी हुई हैं, कई सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे हैं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में न डॉक्टर हैं न दवाइयाँ, और युवाओं के सामने रोजगार का गहरा संकट है। यदि बजट वास्तव में विकासोन्मुख होता, तो उसका प्रभाव आम जनता के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता।

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धी. रामहरि पेरियार ने सवाल उठाया कि आखिर करोड़ों- अरबों रुपये के बजट आवंटन के बावजूद धरातल पर ठोस बदलाव क्यों नहीं दिख रहा? आवंटित राशि किन योजनाओं में, किस स्तर पर और किस गुणवत्ता के साथ खर्च की गई, इसकी पारदर्शी जानकारी जनता को क्यों नहीं दी जा रही?
    उन्होंने कहा कि यदि सरकार स्वयं को जनता की अपनी सरकार कहती है, तो उसे हर विभाग के बजट आवंटन, व्यय विवरण और योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी चाहिए। केवल घोषणा और शिलान्यास से विकास नहीं होता, बल्कि ईमानदार क्रियान्वयन और जवाबदेही से होता है।

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एंटी करप्शन ऑफ इंडिया की ओर से मांग की गई है कि: सभी विभागों के बजट व्यय का विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए। प्रमुख योजनाओं की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। जिला स्तर पर सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) अनिवार्य किया जाए। भ्रष्टाचार या अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
   उन्होंने कहा कि जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होगी। लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही सर्वोपरि है और हर एक रुपये का हिसाब जनता को मिलना ही चाहिए।