चाईबासा | गोप गौड़ आरक्षण आंदोलन समिति के केंद्रीय अध्यक्ष रामहरि गोप ने कहा कि झारखंड के पिछड़ा वर्ग समाज से परिसीमन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक हिस्सेदारी के प्रश्न पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज समय का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि समाज की जनसंख्या कितनी है, बल्कि यह है कि उसकी राजनीतिक भागीदारी और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उसकी हिस्सेदारी कितनी है।

उन्होंने कहा कि झारखंड का पिछड़ा वर्ग वर्षों से अपनी संख्या के अनुपात में अधिकार, सम्मान और प्रतिनिधित्व से वंचित रहा है। चुनाव के समय समाज की संख्या को वोट बैंक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन सत्ता और नीतिगत निर्णयों में उसकी भागीदारी सीमित कर दी जाती है। यह स्थिति लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत है।
रामहरि गोप ने कहा कि आने वाला परिसीमन केवल नक्शे पर लकीरें खींचने का कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाले कई दशकों तक राजनीतिक शक्ति संतुलन तय करेगा। यदि पिछड़ा वर्ग समाज आज भी चुप बैठा रहा, तो कल उसके हिस्से की आवाज, उसका प्रतिनिधित्व और उसके अधिकार और अधिक कमजोर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जो समाज अपने अधिकारों के लिए संगठित नहीं होता, उसके अधिकार धीरे-धीरे उससे छीन लिए जाते हैं। अधिकार किसी की कृपा से नहीं मिलते, बल्कि जागरूकता, संघर्ष और एकजुटता से प्राप्त होते हैं।

रामहरि गोप ने जोर देकर कहा कि अपना हिस्सा पाने और बचाने के लिए आंदोलन ही सबसे प्रभावी विकल्प है तथा एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है। सत्ता हमेशा संगठित लोगों की आवाज सुनती है, बिखरे हुए समाज की नहीं। जब तक पिछड़ा वर्ग समाज अपनी सामूहिक शक्ति को नहीं पहचानेगा, तब तक उसकी वास्तविक हिस्सेदारी का सपना अधूरा रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि आज आवश्यकता है कि पिछड़ा वर्ग समाज जातीय उपविभाजनों, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और राजनीतिक भ्रमों से ऊपर उठकर एक साझा मंच पर आए। समाज को यह समझना होगा कि यदि आज अधिकारों और प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी कि जब उनके भविष्य का निर्णय हो रहा था, तब समाज मौन क्यों था।

उन्होंने झारखंड के युवाओं, छात्रों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सभी पिछड़ा वर्ग संगठनों से अपील की कि वे गांव-गांव, पंचायत-पंचायत और शहर-शहर जनजागरण अभियान चलाएं तथा समाज को उसके संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जागरूक करें।
रामहरि गोप ने कहा कि संख्या में बड़ा होने के बावजूद यदि कोई समाज निर्णय लेने की प्रक्रिया में कमजोर है, तो उसे अपनी ताकत को संगठित करने की आवश्यकता है। समय आ गया है कि पिछड़ा वर्ग समाज जागे, संगठित हो और अपने अधिकारों की लड़ाई को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से मजबूत करे। क्योंकि जो समाज अपने हिस्से के लिए संघर्ष नहीं करता, उसके हिस्से का निर्णय दूसरे लोग कर देते हैं।

