चाईबासा {पश्चिमी सिंहभूम} | झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में शिक्षा विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, टोंटो में वित्तीय प्रबंधन और सामग्री आपूर्ति में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका सामने आई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) टोनी प्रेमराज टोप्पो के औचक निरीक्षण में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

ड्रेस वितरण में भारी लापरवाही
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि छात्राओं को सत्र की स्कूल ड्रेस अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कक्षा 10वीं और 12वीं की कई छात्राएं विद्यालय छोड़ चुकी हैं, लेकिन उन्हें भी ड्रेस नहीं मिली। यह मामला ड्रेस आपूर्ति में लापरवाही और संभावित फंड दुरुपयोग की ओर संकेत करता है।
खाद्य सामग्री आपूर्ति में अनियमितता
विद्यालय में सामग्री आपूर्ति के लिए दो फर्मों का चयन किया गया है—
• बिरसा ट्रेडर्स: फल, दूध, सब्जी, पोशाक एवं स्टेशनरी
• जोहार एंटरप्राइजेज: खाद्यान्न सामग्री
सूत्रों के अनुसार, बिरसा ट्रेडर्स का संचालन शिक्षा विभाग से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान भंडार गृह में हल्दी और सब्जी मसाला जैसी सामग्री निविदा की शर्तों के अनुरूप नहीं पाई गई। हैरानी की बात यह रही कि घटिया गुणवत्ता के बावजूद संबंधित वेंडर को भुगतान भी कर दिया गया था।

लेखापाल अनुपस्थित, रजिस्टर गायब
विद्यालय की लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर विनिया कुमारी निरीक्षण के समय बिना सूचना के अनुपस्थित पाई गईं। उपस्थिति पंजी में ‘विशेष अवकाश’ दर्ज था, लेकिन उसका कोई स्वीकृत आवेदन उपलब्ध नहीं था। नियमानुसार विशेष अवकाश के दौरान आवासीय परिसर में रहना अनिवार्य होता है।
डीईओ द्वारा वार्डेन के माध्यम से संपर्क करने पर उन्होंने आने से इनकार कर दिया और मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। इसके साथ ही विद्यालय के महत्वपूर्ण वित्तीय अभिलेख (रजिस्टर) भी गायब पाए गए, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।

डीईओ की कड़ी कार्रवाई
छात्राओं के बयान और स्थलीय जांच के आधार पर प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने पर डीईओ ने सख्त कदम उठाए हैं—
• लेखापाल विनिया कुमारी का मानदेय तत्काल प्रभाव से स्थगित
• विद्यालय के सभी वित्तीय लेन-देन पर रोक
• संबंधित कर्मियों को दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश
जांच के मुख्य बिंदु
• छात्राओं को समय पर स्कूल ड्रेस नहीं मिली
• 10वीं और 12वीं की छात्राएं बिना ड्रेस लिए विद्यालय छोड़ गईं
• निविदा शर्तों का उल्लंघन कर घटिया खाद्य सामग्री की आपूर्ति
• गुणवत्ता जांच के बिना वेंडर्स को भुगतान
•लेखापाल बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित
• निरीक्षण के दौरान महत्वपूर्ण रजिस्टर गायब
• मानदेय भुगतान पर रोक
• विद्यालय के वित्तीय कार्यों को अस्थायी रूप से फ्रीज किया गया
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

