विधानसभा में जयराम महतो ने उठाया 1932 खतियान, जमीन अधिकार और कुड़मी को एसटी दर्जा देने का मुद्दा

रांची | झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान डुमरी विधायक Jairam Mahato ने 1932 खतियान, जमीन के अधिकार और कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। विभिन्न विभागों के बजट प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के लोगों की पहचान उनकी जमीन और खेती से जुड़ी हुई है।

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उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के समय आदिवासी और मूलवासी समाज की जमीन की सुरक्षा के लिए विलकिंसन नियम के साथ-साथ Chotanagpur Tenancy Act और Santhal Parganas Tenancy Act जैसे कानून लागू किए गए थे। इसके बावजूद आज भी बड़े औद्योगिक समूहों द्वारा रैयतों की जमीन अधिग्रहण के मामले सामने आ रहे हैं।

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विधायक ने Deoghar Airport का उदाहरण देते हुए कहा कि जमीन अधिग्रहण के बाद भी किसानों को उनकी जमीन का सही बाजार मूल्य नहीं मिल रहा है। कई मामलों में अभी भी पुराने मानदंडों के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने राज्य में सक्रिय जमीन माफियाओं का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार पिछले एक वर्ष में रांची और आसपास के क्षेत्रों में कई हत्याएं जमीन विवाद से जुड़ी रही हैं। साथ ही अंचल कार्यालयों में तीन लाख से अधिक जमीन से जुड़े मामले लंबित हैं और ऑनलाइन रिकॉर्ड में खाता और प्लॉट नंबर से संबंधित कई त्रुटियां भी पाई गई हैं। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए विशेष शिविर लगाने का सुझाव दिया।

सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उन्होंने कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि वर्ष 1950 में इस समुदाय को कथित रूप से साजिश के तहत एसटी सूची से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने सुझाव दिया कि टीआरआई के माध्यम से नई एथनोग्राफिक रिपोर्ट तैयार कराकर कुर्मी समाज को एसटी सूची में शामिल करने की अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजी जाए।

इसके अलावा उन्होंने सूड़ी समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग की। साथ ही केवट, मल्ला और निषाद जातियों को भी अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत बताई।

विधायक ने 1932 आधारित स्थानीय नीति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य गठन के 25 साल बाद भी इस पर स्पष्ट नीति नहीं बन पाई है। उनके अनुसार स्थानीय नीति का उद्देश्य किसी को बाहर करना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि राज्य की सुविधाओं का लाभ किसे प्राथमिकता के आधार पर मिले।

उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सुझाव दिए। उनका कहना था कि जिस तरह मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, उसी तरह विभागों के सचिव और प्रधान सचिव भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें ताकि आम लोगों की समस्याओं का जल्दी समाधान हो सके। इसके अलावा उन्होंने 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष शिक्षकों को गृह जिले में स्थानांतरण की सुविधा देने और पेंशन निदेशालय में जल्द निदेशक नियुक्त करने की मांग भी की।

By maskal.news

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